14 अगस्त 2026
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भारत ने बांग्लादेश को भेजे 19 ब्रॉड-गेज पैसेंजर कोच, एक दशक बाद फिर शुरू हुई सप्लाई

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भारत ने बांग्लादेश को भेजे 19 ब्रॉड-गेज पैसेंजर कोच, एक दशक बाद फिर शुरू हुई सप्लाई

सारांश

लगभग एक दशक के अंतराल के बाद भारत ने बांग्लादेश को पैसेंजर कोच भेजने शुरू कर दिए हैं। RCF कपूरथला में बने 19 ब्रॉड-गेज कोचों की यह पहली खेप 200 कोच की बड़ी परियोजना की शुरुआत है, जो पद्मा रेल ब्रिज नेटवर्क को मजबूत करेगी और दोनों देशों के रेल सहयोग को नई दिशा देगी।

मुख्य बातें

भारत ने 14 अगस्त 2026 को दर्शना बॉर्डर के रास्ते बांग्लादेश को 19 ब्रॉड-गेज पैसेंजर कोच की पहली खेप भेजी।
ये कोच पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में निर्मित हैं और 200 कोच की बड़ी खरीद का हिस्सा हैं।
पूरी परियोजना की लागत 1,704.66 करोड़ बांग्लादेशी टका है; 1,331 करोड़ टका यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) के ऋण से आएगा।
पहले बैच में 3 एसी स्लीपर , 3 एसी चेयर कार , 11 नॉन-एसी चेयर कार और 2 पावर कार शामिल हैं।
भारत ने इससे पहले 2015-16 में बांग्लादेश को 120 कोच दिए थे — यह उसके बाद की पहली बड़ी डिलीवरी है।
अनुबंध में 36 महीने की आपूर्ति अवधि और 24 महीने की वारंटी का प्रावधान है।

भारत ने लगभग एक दशक के अंतराल के बाद बांग्लादेश को पैसेंजर कोच की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी है। 14 अगस्त 2026 को बांग्लादेशी मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, नई पीढ़ी के 19 ब्रॉड-गेज पैसेंजर कोच का पहला बैच दर्शना बॉर्डर के रास्ते बांग्लादेश भेजा जा रहा है। ये कोच पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में निर्मित हैं।

परियोजना का विवरण और वित्त पोषण

बांग्लादेश रेलवे और भारत की सरकारी कंपनी आरआईटीईएस लिमिटेड (RITES Ltd.) के बीच ढाका के रेल भवन में हुए समझौते के तहत कुल 200 ब्रॉड-गेज यात्री कोच खरीदे जाने हैं। इस समझौते की लागत लगभग 1,205.54 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जबकि पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 1,704.66 करोड़ टका आँकी गई है। इसमें से लगभग 1,331 करोड़ टका यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) के ऋण से वित्त पोषित होने की उम्मीद है, शेष राशि बांग्लादेश सरकार वहन करेगी।

पहले बैच में क्या शामिल है

बांग्लादेशी समाचार पत्र 'डेली सन' की रिपोर्ट के अनुसार, इस पहले कंसाइनमेंट में तीन एसी स्लीपर कोच, तीन एसी चेयर कार, 11 नॉन-एसी चेयर कार और दो पावर कार शामिल हैं। ये कोच मार्च 2022 में स्वीकृत और मई 2024 में हस्ताक्षरित अनुबंध के तहत पहली खेप हैं। अनुबंध में आपूर्ति और कमीशनिंग के लिए 36 महीने का समय निर्धारित है, जिसके बाद 24 महीने की वारंटी अवधि होगी।

RITES की भूमिका और तकनीकी सहायता

रिपोर्टों के अनुसार, RITES केवल कोचों की आपूर्ति तक सीमित नहीं है — वह डिजाइन, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षण से जुड़ी समग्र तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश रेलवे कई वर्षों से पुराने और जर्जर कोच बेड़े की समस्या से जूझ रहा है। गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले 2015-16 में बांग्लादेश रेलवे को 120 कोच डिलीवर किए थे।

बांग्लादेश रेल नेटवर्क पर असर

नए कोचों से दक्षिण-पश्चिमी बांग्लादेश में रेल सेवाओं की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है, विशेष रूप से पद्मा रेल ब्रिज से संचालित होने वाली सेवाओं की। 200 नए कोच खरीदने का मुख्य उद्देश्य पुराने स्टॉक को प्रतिस्थापित करना, यात्री सुविधाओं में सुधार और रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है।

परियोजना में देरी और आगे की राह

यह परियोजना शुरू से ही विलंब की शिकार रही — मार्च 2022 में मंजूरी के बाद अनुबंध पर हस्ताक्षर मई 2024 में हो सके, यानी दो वर्ष से अधिक का अंतराल रहा। RCF कपूरथला ने अब 19 कोच का पहला बैच तैयार कर लिया है। शेष 181 कोचों की डिलीवरी अनुबंध की समयसीमा के अनुसार चरणबद्ध तरीके से होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और रेल सहयोग एक स्थिर कड़ी के रूप में उभरा है। हालाँकि, मार्च 2022 की मंजूरी से मई 2024 के अनुबंध तक दो साल से अधिक की देरी यह सवाल उठाती है कि द्विपक्षीय परियोजनाओं में क्रियान्वयन की गति को लेकर दोनों पक्षों की प्राथमिकताएँ कितनी संरेखित हैं। EIB की वित्तीय भागीदारी इस परियोजना को केवल भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय ढाँचे से बाहर ले जाती है और इसे एक बहुपक्षीय विकास निवेश बनाती है — जो भविष्य के बुनियादी ढाँचे सहयोग के लिए एक मिसाल हो सकती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने बांग्लादेश को कितने पैसेंजर कोच भेजे हैं और ये कहाँ बने हैं?
भारत ने 14 अगस्त 2026 को बांग्लादेश को 19 ब्रॉड-गेज पैसेंजर कोच की पहली खेप भेजी है, जो पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में निर्मित हैं। ये कोच दर्शना बॉर्डर के रास्ते बांग्लादेश पहुँच रहे हैं।
बांग्लादेश के लिए 200 कोच परियोजना की कुल लागत क्या है और इसे कौन वित्त पोषित कर रहा है?
पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 1,704.66 करोड़ बांग्लादेशी टका है। इसमें से लगभग 1,331 करोड़ टका यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) के ऋण से और शेष बांग्लादेश सरकार के बजट से वित्त पोषित होने की उम्मीद है।
इस परियोजना में RITES की क्या भूमिका है?
भारत की सरकारी कंपनी RITES लिमिटेड इस परियोजना की आपूर्तिकर्ता एजेंसी है। वह कोचों की आपूर्ति के साथ-साथ डिजाइन, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी प्रशिक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएगी। अनुबंध में 36 महीने की आपूर्ति अवधि और 24 महीने की वारंटी का प्रावधान है।
नए कोचों से बांग्लादेश रेलवे को क्या फायदा होगा?
नए कोचों से दक्षिण-पश्चिमी बांग्लादेश में रेल सेवाओं की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है, खासकर पद्मा रेल ब्रिज से चलने वाली सेवाओं की। 200 नए कोचों का मुख्य उद्देश्य पुराने और जर्जर बेड़े को प्रतिस्थापित करना और यात्री सुविधाओं में सुधार करना है।
भारत ने इससे पहले बांग्लादेश को कब कोच भेजे थे?
भारत ने इससे पहले 2015-16 में बांग्लादेश रेलवे को 120 कोच डिलीवर किए थे। वर्तमान खेप उसके बाद की पहली बड़ी डिलीवरी है, यानी लगभग एक दशक के अंतराल के बाद यह आपूर्ति फिर शुरू हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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