रिपोर्ट: बांग्लादेश के लिए भारत की रणनीतिक भूमिका बढ़ी, आपूर्ति संकट के बीच
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश के लिए भारत की **महत्ता** बढ़ी है।
- आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा के लिए औपचारिक समझौता नहीं है।
- भारत ने **दवाओं** के कच्चे माल की आपूर्ति को बहाल किया।
- बांग्लादेश का दवा उद्योग **भारत** और **चीन** पर निर्भर है।
- भारत ने **डीजल** आपूर्ति की क्षमता दिखाई है।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के कारण बांग्लादेश के लिए भारत की महत्ता काफी बढ़ गई है। यद्यपि दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी पर व्यापक चर्चाएं हुई हैं, लेकिन आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा के लिए अब तक कोई औपचारिक और बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ है।
यूरेशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2022 के बीच कंटेनर फ्रेट की दरों में तेजी से वृद्धि और बंदरगाहों पर बढ़ते बैकलॉग ने बांग्लादेश को यह एहसास कराया कि उसकी मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाएं संकट की स्थिति में सक्षम नहीं हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस अवधि में दवाओं के कच्चे माल और औद्योगिक इनपुट की कमी हो गई या उनकी आपूर्ति में देरी हुई। कई जरूरी सामान दूर-दूर के बंदरगाहों पर फंस गए, जबकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई। ऐसे में सबसे तेज़ आपूर्ति देने वाला देश भारत था, जो बांग्लादेश के पड़ोस में स्थित है।
रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से पहले बांग्लादेश हर साल चीन और भारत से दवाओं के लिए आवश्यक एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) का बड़ा आयात करता था। लेकिन जब चीन में फैक्ट्रियां बंद हुईं और वैश्विक लॉजिस्टिक्स प्रभावित हुआ, तब भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय कंपनियों ने घरेलू चुनौतियों के बावजूद प्रतिबंध हटने के बाद सीमा पार आपूर्ति को तेजी से बहाल किया। बेनाापोल या पेट्रापोल के रास्ते ट्रक से दवाइयों का कच्चा माल केवल 2 दिन में ढाका पहुंच सकता है, जबकि शंघाई या रॉटरडैम से समुद्री मार्ग से आने में अधिक समय लगता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बांग्लादेश का दवा उद्योग, जो दक्षिण एशिया में मजबूत माना जाता है, मुख्य रूप से तैयार दवाइयां बनाता है। लेकिन इन दवाओं के लिए आवश्यक कच्चे रसायनों (एपीआई) के आयात पर निर्भरता है, जिनके प्रमुख आपूर्तिकर्ता भारत और चीन हैं। ऐसे में चीन से आपूर्ति में व्यवधान के दौरान भारत एक विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरा।
ऊर्जा की जरूरतों को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने रिफाइनरी नेटवर्क और बांग्लादेश-भारत मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से आपात स्थिति में डीजल आपूर्ति करने की क्षमता रखता है। हालांकि कुछ मौकों पर ऐसा किया गया है, लेकिन इसे अब तक औपचारिक समझौते का रूप नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि दोनों देशों को आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट, संरचित और कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आपूर्ति बाधित न हो।