अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: कम से कम 30 भारतीय-अमेरिकी जीते, नित्या रमन लॉस एंजिलिस मेयर रेस में आगे
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका में 5 नवंबर 2026 को संपन्न मध्यावधि चुनावों में कम से कम 30 भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने राज्य विधानसभाओं की सीटें जीतीं, जिससे भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता मिशिगन और एरिजोना की विधानसभाओं का नेतृत्व करने की स्थिति में पहुँच गए हैं। लॉस एंजिलिस के मेयर पद की दौड़ में भारतीय मूल की उम्मीदवार नित्या रमन मौजूदा मेयर करेन बैस पर करीब 27,000 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं, हालाँकि अभी प्रमुख अमेरिकी मीडिया नेटवर्कों ने इस मुकाबले का आधिकारिक नतीजा घोषित नहीं किया है।
मिशिगन और एरिजोना में भारतीय-अमेरिकी नेतृत्व की ओर
मिशिगन के 24वें जिले से रंजीव पुरी ने लगभग 66 प्रतिशत वोट हासिल कर दोबारा जीत दर्ज की। डेमोक्रेटिक पार्टी के राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल करने और राज्य सरकार पर पूर्ण नियंत्रण पाने के बाद उनका कद और मज़बूत हुआ है। जीत के बाद पुरी ने कहा, 'मिशिगन की जनता ने अपनी आवाज़ बुलंद कर दी और साफ़ कह दिया कि अब बहुत हो चुका।'
एरिजोना में सीनेट अल्पसंख्यक नेता प्रिया सुंदरेशन ने 18वें जिले से लगभग 66 प्रतिशत वोट पाकर दोबारा जीत हासिल की। एरिजोना सचिवालय के अनौपचारिक आँकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने राज्य की दोनों विधानमंडलीय सदनों पर नियंत्रण कर लिया है। डेमोक्रेटिक लेजिस्लेटिव कैंपेन कमेटी ने इसे 1960 के दशक के बाद पहली बार राज्य में डेमोक्रेटिक ट्राइफेक्टा — यानी गवर्नर और दोनों सदनों पर एक ही पार्टी का नियंत्रण — बताया है। सुंदरेशन ने कहा, 'हमें पूरा भरोसा है कि जनवरी तक हमारे पास ट्राइफेक्टा होगा।' हालाँकि वह भविष्य में कौन-सा पद संभालेंगी, यह अभी तय नहीं हुआ है; रिपोर्टों के अनुसार वह सीनेट प्रेसीडेंट पद के लिए दावेदारी पेश करने की तैयारी में हैं।
लॉस एंजिलिस मेयर रेस: नित्या रमन की बढ़त
लॉस एंजिलिस के मेयर पद की दौड़ में अनुमानित कुल मतों के करीब दो-तिहाई की गिनती के बाद नित्या रमन को लगभग 52 प्रतिशत (4.05 लाख वोट) और मौजूदा मेयर करेन बैस को करीब 48 प्रतिशत (3.79 लाख वोट) मिले हैं। रमन करीब 27,000 वोटों से आगे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बैस को शेष लगभग 3.94 लाख वोटों में से करीब 53 प्रतिशत वोट हासिल करने होंगे, तभी वह रमन की बढ़त पलट सकेंगी। बुधवार की शुरुआत में बैस मामूली बढ़त पर थीं, लेकिन बाद में रमन ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। इसी चुनाव में मारिसा रॉय को सिटी अटॉर्नी पद के रनऑफ का विजेता माना गया — उन्होंने जॉन मैककिनी के मुकाबले लगभग 66 प्रतिशत वोट हासिल किए।
ऐतिहासिक जीतें: पहले सिख-अमेरिकी और पहली भारतीय-अमेरिकी महिला विधायक
दक्षिणी अमेरिका में दो उम्मीदवारों की जीत को उनके समर्थक ऐतिहासिक बता रहे हैं। ज्योत सिंह ने जॉर्जिया के 97वें हाउस जिले से करीब 68 प्रतिशत वोट (13,800 वोट) के साथ जीत दर्ज की। भारतीय-अमेरिकी संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के अनुसार, वह जॉर्जिया राज्य विधानमंडल के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और पहले सिख-अमेरिकी हैं।
टेक्सास में पूजा सेठी ने 47वें हाउस जिले में लगभग 63 प्रतिशत (57,500 वोट) पाकर जीत हासिल की। सेठी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि वह टेक्सास विधानमंडल के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला और पहली एशियाई-अमेरिकी डेमोक्रेटिक महिला हैं।
अन्य उल्लेखनीय विजेताओं में नबीला सैयद (इलिनोइस, 57 प्रतिशत), लीसा कौल (न्यूयॉर्क, 55 प्रतिशत), राम विलिवालम (इलिनोइस, 73 प्रतिशत), जय चौधरी (नॉर्थ कैरोलिना, 75 प्रतिशत), मांका ढींगरा (वॉशिंगटन, 92 प्रतिशत) और रेणुका मायादेव (विस्कॉन्सिन, 90 प्रतिशत) शामिल हैं।
राज्यव्यापी चुनाव और कुछ उल्लेखनीय हार
अरुणा मिलर ने गवर्नर वेस मूर के साथ मैरीलैंड की उप-राज्यपाल के रूप में दोबारा जीत हासिल की। जोश कौल ने लगभग 55 प्रतिशत वोटों के साथ तीसरी बार विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल का चुनाव जीता। कौल ने कहा, 'विस्कॉन्सिन में यह चुनाव पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है।'
हालाँकि सभी भारतीय मूल के उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली। विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार गए — उन्हें लगभग 44 प्रतिशत वोट मिले, जबकि एक्टन को 52 प्रतिशत प्राप्त हुए। सरिता कोमाटिरेड्डी भी न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल का चुनाव हार गईं।
समग्र प्रदर्शन: 85 प्रतिशत सफलता दर
कुल 41 भारतीय-अमेरिकी स्टेट लेजिस्लेटिव उम्मीदवारों में से 30 ने जीत दर्ज की, दो बढ़त बनाए हुए हैं और नौ हार गए। भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने घोषित हो चुके 33 मुकाबलों में से 28 में जीत हासिल की, जो लगभग 85 प्रतिशत की सफलता दर है। 30 विजेताओं में से 15 महिलाएँ हैं और 8 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। सबसे अधिक चार विजेता इलिनोइस से रहे। यह प्रदर्शन अमेरिकी राजनीति में भारतीय प्रवासी समुदाय की बढ़ती साख और सांगठनिक शक्ति को रेखांकित करता है।