मिशिगन सीनेटर अब्दुल एल-सैयद की पत्नी की जड़ें कर्नाटक के भटकल से, जानें पूरा कनेक्शन
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राज्य मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद ने 5 नवंबर 2026 को सीनेट चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया — और उनकी यह जीत भारत के कर्नाटक के एक छोटे तटीय कस्बे भटकल से भी जुड़ी है। एल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू भारतीय मूल की हैं, जिनका परिवार उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल से ताल्लुक रखता है।
चुनावी जीत का विवरण
42 वर्षीय एल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को लगभग 52 प्रतिशत के मुकाबले 46 प्रतिशत मतों से शिकस्त दी। वह निवर्तमान डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे। यह जीत अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में उल्लेखनीय मानी जा रही है।
भटकल से क्या है कनेक्शन
डॉ. सारा जुकाकू का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन में हुआ, लेकिन उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके पिता डॉ. तैयब जुकाकू भटकल के मूल निवासी हैं और पेशे से किडनी रोग विशेषज्ञ हैं। भटकल मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और इसकी आबादी लगभग 46 हजार है।
सारा के दादा जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू पेशे से वकील थे और पूर्व मैसूर राज्य सरकार में मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के कार्यकाल में उप वित्त मंत्री रहे थे। जुकाकू परिवार नावायत समुदाय से संबंधित है — दक्षिण-पश्चिम भारत के तटीय क्षेत्रों में बसा एक ऐतिहासिक मुस्लिम व्यापारी समुदाय।
एल-सैयद और सारा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि
डॉ. सारा ने मिशिगन विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र और नियर ईस्टर्न स्टडीज़ में अध्ययन किया। इसके बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री हासिल की। एल-सैयद और सारा की मुलाकात मिशिगन विश्वविद्यालय में मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन के माध्यम से हुई और दोनों ने 2006 में विवाह किया। उनकी दो बेटियाँ हैं।
स्वयं एल-सैयद मिशिगन में जन्मे हैं और मिस्र से अमेरिका आए प्रवासी मोहम्मद एल-सैयद के बेटे हैं। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से स्नातक, ऑक्सफोर्ड में रोड्स स्कॉलर के रूप में डॉक्टरेट और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री हासिल की।
राजनीतिक सफर और विवाद
2015 में डेट्रॉयट के तत्कालीन मेयर माइक डगन ने एल-सैयद को शहर का स्वास्थ्य निदेशक नियुक्त किया। उन्होंने बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने, स्कूलों से सीसा हटाने और ओवरडोज में इस्तेमाल होने वाली दवा नारकन की उपलब्धता बढ़ाने जैसे कार्यक्रम चलाए। 2017 में उन्होंने पद छोड़कर मिशिगन के गवर्नर पद का चुनाव लड़ा, लेकिन 2018 के डेमोक्रेटिक प्राइमरी में ग्रेचेन व्हिटमर से हार गए।
गौरतलब है कि 2022 के अंत से अप्रैल 2025 तक उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव एवं पूर्व सैनिक सेवा विभाग का नेतृत्व किया, जो करीब 18 लाख लोगों को सेवाएँ देता है। इस दौरान उन्होंने लगभग 3 लाख लोगों के 70 करोड़ डॉलर तक के चिकित्सा ऋण को माफ करने की योजना शुरू की।
एल-सैयद का नाम उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ एक राजनीतिक विवाद में भी चर्चा में रहा। अगस्त में एल-सैयद ने अपनी भारतीय मूल की पत्नी और बच्चों के संदर्भ में वेंस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उनके बच्चे भी उतने ही अमेरिकी हैं जितने किसी अन्य अमेरिकी परिवार के। इस पर मिशिगन रिपब्लिकन पार्टी की सह-अध्यक्ष सनी रेड्डी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उषा वेंस की भारतीय विरासत को राजनीतिक मजाक का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका
चुनाव प्रचार के अंतिम सप्ताह में दक्षिण एशियाई और भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने एल-सैयद का समर्थन किया। 30 अक्टूबर को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के इम्पैक्ट फंड और साथ फंड ने मिशिगन के वेस्टलैंड में 'लाइट अप द वोट' नाम से दिवाली कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मिशिगन की सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जोसलिन बेन्सन, राज्य विधानसभा में डेमोक्रेटिक नेता रंजीव पुरी और सिनसिनाटी के मेयर आफताब प्योरवाल भी शामिल हुए। एल-सैयद ने समुदाय के सदस्यों के साथ दीप जलाया और मतदान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
आगे की राजनीतिक प्राथमिकताएँ
सीनेट में एल-सैयद ने 'मेडिकेयर फॉर ऑल' का समर्थन किया है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उनकी प्रमुख प्राथमिकता रही हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर उन्होंने गाजा युद्ध को नरसंहार बताया है और इजरायल को हथियारों की आपूर्ति पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की वकालत की है। वह सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम एवं पेंशन समिति और विदेश संबंध समिति में स्थान पाने के इच्छुक हैं। भटकल से शुरू हुआ यह पारिवारिक सिलसिला अब वाशिंगटन की सत्ता के गलियारों तक पहुँच गया है।