कंधार में भारतीय व्यापारी: सूखे मेवे की खरीद और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश, पाक सीमा बंद होने से बढ़ी मुश्किलें
सारांश
मुख्य बातें
कंधार (अफगानिस्तान) में फंसे भारतीय व्यापारियों का एक समूह सूखे मेवे की खरीद के साथ-साथ अब वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश में जुटा है, क्योंकि पाकिस्तान से होकर जाने वाले जमीनी रास्ते बंद हो चुके हैं और हवाई माल ढुलाई (एयर फ्रेट) की लागत लगातार बढ़ रही है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यह स्थिति अफगान निर्यातकों के लिए भी गंभीर संकट बन चुकी है, जो अपना माल वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने में संघर्ष कर रहे हैं।
कंधार के भारतीय व्यापारियों की स्थिति
अफगान समाचार वेबसाइट को दिए एक बयान में भारतीय व्यापारी आनंद ने कहा, 'हम यहाँ तीन-चार दिनों से सूखे मेवे खरीद रहे हैं और फिर उन्हें दूसरे एशियाई देशों के ज़रिए नई दिल्ली भेजते हैं। अफगानिस्तान के साथ हमारा व्यापार ऐसा ही है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत-अफगानिस्तान व्यापार अब सीधे मार्ग के बजाय तीसरे देशों के रास्ते हो रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, कंधार के किसानों ने बताया कि प्रांत की मशहूर सुनहरी किशमिश, जिसे स्थानीय रूप से 'अब्जोश' कहा जाता है और जो 'आइटा' नामक अंगूर से बनाई जाती है, पहले सीधे भारत निर्यात होती थी — लेकिन वह मार्ग अब बंद हो चुका है।
सुनहरी किशमिश: कंधार की पहचान
सुनहरी किशमिश बनाने की प्रक्रिया में किसान अंगूरों को एक विशेष घोल में डुबोते हैं और फिर उन्हें सात दिनों तक तैयार ज़मीन पर फैलाकर सुखाते हैं। कंधार के अधिकांश ताज़े और सूखे मेवे पड़ोसी, अरब और यूरोपीय देशों को निर्यात किए जाते हैं। हालाँकि, हाल के महीनों में एयर फ्रेट की बढ़ती लागत ने व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है।
पाकिस्तान सीमा बंद होने का असर: आँकड़े बोलते हैं
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान का कंटेनर ट्रैफिक 2022-2023 में अपने उच्चतम स्तर 1,02,886 कंटेनर (मूल्य $6.7 अरब) पर पहुँचा था। इसके बाद यह लगातार गिरता रहा और 2024-2025 में 42,959 कंटेनर ($1.36 अरब) तथा 2025-26 में मात्र 11,592 कंटेनर ($367 मिलियन) रह गया।
अक्टूबर 2025 में एक तीखी सीमा झड़प के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पूरी तरह बंद कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के रास्ते भारत और अन्य देशों को होने वाला अफगानिस्तान का निर्यात 2024-2025 में $454 मिलियन से घटकर 2025-26 में मात्र $7 मिलियन रह गया — यह गिरावट किसी भी मानक से चौंकाने वाली है।
वैकल्पिक मार्ग: राहत या नई चुनौती?
रिपोर्टों के अनुसार, अफगान व्यापारियों ने अब ईरान के चाबहार पोर्ट, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होकर जाने वाले रेल कॉरिडोर तथा भारत के लिए एयर फ्रेट लिंक का उपयोग शुरू कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष पहले से ही व्यापार मार्गों को प्रभावित कर रहा है। ये विकल्प व्यापार को जीवित रखते हैं, लेकिन इनकी लागत अधिक है और भू-राजनीतिक जोखिम भी बना रहता है।
भारत-अफगानिस्तान व्यापार: चुनौतियों के बावजूद जारी
गौरतलब है कि भारत, अफगानिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है। पाकिस्तान द्वारा रास्ते बंद करने के बावजूद 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार $907.85 मिलियन तक पहुँचा। भारत मुख्य रूप से सूखे मेवे, केसर और मसाले आयात करता है, जबकि दवाएँ, मशीनरी और खाद्य उत्पाद निर्यात करता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और एयर फ्रेट की बढ़ती लागत ने इस व्यापार को और कठिन बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर इन बाधाओं से पार पाने के लिए कोई स्थायी और किफायती मार्ग विकसित कर पाते हैं या नहीं।