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कंधार में भारतीय व्यापारी: सूखे मेवे की खरीद और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश, पाक सीमा बंद होने से बढ़ी मुश्किलें

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कंधार में भारतीय व्यापारी: सूखे मेवे की खरीद और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश, पाक सीमा बंद होने से बढ़ी मुश्किलें

सारांश

पाकिस्तान सीमा बंद और एयर फ्रेट महँगा होने से भारत-अफगानिस्तान व्यापार संकट में है। कंधार में फंसे भारतीय व्यापारी तीसरे देशों के रास्ते सूखे मेवे भेज रहे हैं, जबकि पाक मार्ग से अफगान निर्यात $454 मिलियन से सिकुड़कर महज $7 मिलियन पर आ गया है।

मुख्य बातें

कंधार में मौजूद भारतीय व्यापारी तीसरे एशियाई देशों के रास्ते सूखे मेवे नई दिल्ली भेज रहे हैं, क्योंकि सीधा मार्ग बंद है।
पाकिस्तान के रास्ते अफगान निर्यात 2024-25 में $454 मिलियन से गिरकर 2025-26 में मात्र $7 मिलियन रह गया।
अक्टूबर 2025 में सीमा झड़प के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पूरी तरह बंद कर दी गई।
पाक मार्ग से कंटेनर ट्रैफिक 2022-23 के उच्चतम स्तर 1,02,886 कंटेनर से घटकर 2025-26 में 11,592 कंटेनर रह गया।
वैकल्पिक मार्गों में चाबहार पोर्ट , उज्बेकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान रेल कॉरिडोर और एयर फ्रेट शामिल हैं, लेकिन ये महँगे हैं।
बाधाओं के बावजूद 2025-26 में भारत-अफगानिस्तान कुल व्यापार $907.85 मिलियन तक पहुँचा।

कंधार (अफगानिस्तान) में फंसे भारतीय व्यापारियों का एक समूह सूखे मेवे की खरीद के साथ-साथ अब वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश में जुटा है, क्योंकि पाकिस्तान से होकर जाने वाले जमीनी रास्ते बंद हो चुके हैं और हवाई माल ढुलाई (एयर फ्रेट) की लागत लगातार बढ़ रही है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यह स्थिति अफगान निर्यातकों के लिए भी गंभीर संकट बन चुकी है, जो अपना माल वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने में संघर्ष कर रहे हैं।

कंधार के भारतीय व्यापारियों की स्थिति

अफगान समाचार वेबसाइट को दिए एक बयान में भारतीय व्यापारी आनंद ने कहा, 'हम यहाँ तीन-चार दिनों से सूखे मेवे खरीद रहे हैं और फिर उन्हें दूसरे एशियाई देशों के ज़रिए नई दिल्ली भेजते हैं। अफगानिस्तान के साथ हमारा व्यापार ऐसा ही है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत-अफगानिस्तान व्यापार अब सीधे मार्ग के बजाय तीसरे देशों के रास्ते हो रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, कंधार के किसानों ने बताया कि प्रांत की मशहूर सुनहरी किशमिश, जिसे स्थानीय रूप से 'अब्जोश' कहा जाता है और जो 'आइटा' नामक अंगूर से बनाई जाती है, पहले सीधे भारत निर्यात होती थी — लेकिन वह मार्ग अब बंद हो चुका है।

सुनहरी किशमिश: कंधार की पहचान

सुनहरी किशमिश बनाने की प्रक्रिया में किसान अंगूरों को एक विशेष घोल में डुबोते हैं और फिर उन्हें सात दिनों तक तैयार ज़मीन पर फैलाकर सुखाते हैं। कंधार के अधिकांश ताज़े और सूखे मेवे पड़ोसी, अरब और यूरोपीय देशों को निर्यात किए जाते हैं। हालाँकि, हाल के महीनों में एयर फ्रेट की बढ़ती लागत ने व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है।

पाकिस्तान सीमा बंद होने का असर: आँकड़े बोलते हैं

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान का कंटेनर ट्रैफिक 2022-2023 में अपने उच्चतम स्तर 1,02,886 कंटेनर (मूल्य $6.7 अरब) पर पहुँचा था। इसके बाद यह लगातार गिरता रहा और 2024-2025 में 42,959 कंटेनर ($1.36 अरब) तथा 2025-26 में मात्र 11,592 कंटेनर ($367 मिलियन) रह गया।

अक्टूबर 2025 में एक तीखी सीमा झड़प के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पूरी तरह बंद कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के रास्ते भारत और अन्य देशों को होने वाला अफगानिस्तान का निर्यात 2024-2025 में $454 मिलियन से घटकर 2025-26 में मात्र $7 मिलियन रह गया — यह गिरावट किसी भी मानक से चौंकाने वाली है।

वैकल्पिक मार्ग: राहत या नई चुनौती?

रिपोर्टों के अनुसार, अफगान व्यापारियों ने अब ईरान के चाबहार पोर्ट, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होकर जाने वाले रेल कॉरिडोर तथा भारत के लिए एयर फ्रेट लिंक का उपयोग शुरू कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष पहले से ही व्यापार मार्गों को प्रभावित कर रहा है। ये विकल्प व्यापार को जीवित रखते हैं, लेकिन इनकी लागत अधिक है और भू-राजनीतिक जोखिम भी बना रहता है।

भारत-अफगानिस्तान व्यापार: चुनौतियों के बावजूद जारी

गौरतलब है कि भारत, अफगानिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है। पाकिस्तान द्वारा रास्ते बंद करने के बावजूद 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार $907.85 मिलियन तक पहुँचा। भारत मुख्य रूप से सूखे मेवे, केसर और मसाले आयात करता है, जबकि दवाएँ, मशीनरी और खाद्य उत्पाद निर्यात करता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और एयर फ्रेट की बढ़ती लागत ने इस व्यापार को और कठिन बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर इन बाधाओं से पार पाने के लिए कोई स्थायी और किफायती मार्ग विकसित कर पाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दक्षिण एशियाई भू-राजनीति की विफलता का प्रमाण है। भारत चाबहार और एयर कॉरिडोर के ज़रिए व्यापार जारी रखने में सफल रहा है, लेकिन यह महँगा विकल्प दीर्घकाल में टिकाऊ नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या भारत की अफगानिस्तान नीति केवल व्यापार को जीवित रखने तक सीमित रहेगी, या वह किसी स्थायी और किफायती बहुपक्षीय कनेक्टिविटी ढाँचे की दिशा में ठोस कदम उठाएगी — जो अब तक नहीं हुआ है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंधार में भारतीय व्यापारी क्यों फंसे हैं और वे क्या कर रहे हैं?
भारतीय व्यापारी सूखे मेवे खरीदने के लिए कंधार गए थे, लेकिन पाकिस्तान से होकर जाने वाला सीधा जमीनी मार्ग बंद होने के कारण वे अब तीसरे एशियाई देशों के रास्ते माल नई दिल्ली भेजने के विकल्प तलाश रहे हैं। व्यापारी आनंद के अनुसार, यही अब भारत-अफगानिस्तान व्यापार का तरीका बन गया है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा कब और क्यों बंद हुई?
अक्टूबर 2025 में एक तीखी सीमा झड़प के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा बंद कर दी गई। इससे पहले भी पाकिस्तान ने भारत से अफगानिस्तान आने वाले सामान के लिए रुकावटें पैदा की थीं, जिससे ट्रांजिट व्यापार पहले से ही प्रभावित था।
पाकिस्तान सीमा बंद होने से अफगान व्यापार पर क्या असर पड़ा?
आँकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के रास्ते भारत और अन्य देशों को होने वाला अफगान निर्यात 2024-25 में $454 मिलियन से घटकर 2025-26 में मात्र $7 मिलियन रह गया। कंटेनर ट्रैफिक भी 2022-23 के उच्चतम स्तर 1,02,886 से गिरकर 2025-26 में 11,592 पर आ गया।
भारत-अफगानिस्तान व्यापार के लिए कौन-से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, अफगान व्यापारी अब ईरान के चाबहार पोर्ट, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होकर जाने वाले रेल कॉरिडोर तथा एयर फ्रेट लिंक का उपयोग कर रहे हैं। हालाँकि ये विकल्प व्यापार को जारी रखते हैं, लेकिन इनकी लागत अधिक है और भू-राजनीतिक जोखिम भी बना रहता है।
कंधार की 'अब्जोश' किशमिश क्या है और इसका भारत से क्या संबंध है?
कंधार की 'अब्जोश' किशमिश 'आइटा' नामक अंगूर से बनाई जाती है, जिसे एक विशेष घोल में डुबोकर सात दिनों तक सुखाया जाता है। यह सुनहरी किशमिश पहले सीधे भारत निर्यात होती थी, लेकिन पाकिस्तान मार्ग बंद होने के बाद यह व्यापार बाधित हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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