ईरानी राजदूत डॉ. फतहली का बड़ा बयान: अमेरिका-ईरान विवाद का हल केवल कूटनीति, युद्ध नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली ने 5 जून 2026 को नई दिल्ली में दिए एक विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि अमेरिका-ईरान तनाव का एकमात्र व्यावहारिक समाधान कूटनीति और संवाद है, न कि सैन्य टकराव। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी युद्ध की पहल नहीं की और वह शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान के पक्ष में खड़ा रहा है।
ईरान का रुख: संवाद और संप्रभुता
डॉ. फतहली ने कहा, 'हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम युद्ध और शांति, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार हैं। हम बातचीत और संवाद का स्वागत करते हैं। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद या मतभेद का समाधान कूटनीति के माध्यम से निकाला जा सकता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता ईरान के लिए 'रेड लाइन' है — यदि आक्रामकता हुई तो उसका जवाब उतने ही या उससे अधिक कड़े स्तर पर दिया जाएगा।
संघर्षविराम उल्लंघन के आरोप
राजदूत ने दावा किया कि 8 अप्रैल को घोषित संघर्षविराम का हाल के दिनों में कई बार अमेरिकी सेनाओं की ओर से उल्लंघन किया गया। उनके अनुसार, इसी कारण ईरानी सेना ने आत्मरक्षा के वैध अधिकार के तहत जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान संघर्षविराम के प्रति अब भी प्रतिबद्ध है, बशर्ते दूसरा पक्ष भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में हाल ही में पारित उस प्रस्ताव पर — जिसमें ईरान संघर्ष में राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकारों को सीमित करने की बात है — डॉ. फतहली ने कहा कि अमेरिका के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करना उनके लिए उचित नहीं। उन्होंने कहा कि ईरान की दृष्टि से जो भी कदम तनाव कम करने और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने में सहायक हो, वह सकारात्मक है। यह प्रस्ताव उसी दिशा में एक कदम माना जा सकता है।
कुवैत एयरपोर्ट हमले के आरोपों पर ईरान का पक्ष
कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के आरोपों को खारिज करते हुए डॉ. फतहली ने कहा कि ईरानी सैन्य विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार कुवैत एयरपोर्ट की ओर कोई ईरानी मिसाइल नहीं दागी गई। उनके अनुसार, एयरपोर्ट को जो नुकसान हुआ वह संभवतः अमेरिका निर्मित 'पैट्रियट' डिफेंस सिस्टम की खराबी के कारण हुआ, जिसकी इंटरसेप्टर मिसाइलें लक्ष्य रोकने में असफल रहीं और टर्मिनल पर गिर गईं। उन्होंने यह भी कहा कि कुवैत और बहरीन के कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के तहत 'आक्रामक कार्रवाई' की श्रेणी में आते हैं।
लेबनान और क्षेत्रीय स्थिरता पर ईरान का दृष्टिकोण
लेबनान में इजरायली कार्रवाइयों पर डॉ. फतहली ने कहा कि यह लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन है और युद्ध अपराधों की श्रेणी में आता है। उन्होंने गाजा में 70,000 से अधिक निर्दोष नागरिकों — जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे — की मौत और 10 लाख से अधिक लोगों के विस्थापन का उल्लेख किया। ईरान का मानना है कि लेबनान की सुरक्षा वहाँ के लोगों और सरकार को स्वयं सुनिश्चित करनी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान का संदेश
डॉ. फतहली ने कहा कि ईरान की सभ्यता सात हजार वर्षों से अधिक पुरानी है और पिछले तीन सौ वर्षों में ईरान ने किसी भी युद्ध की शुरुआत नहीं की। उन्होंने अमेरिका से आह्वान किया कि वह एक मजबूत और स्वतंत्र ईरान की वास्तविकता को स्वीकार करे और ईरानी लोगों के वैध अधिकारों को मान्यता दे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक दबाव के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है।