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ईरान ने अमेरिका की नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया

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ईरान ने अमेरिका की नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया

सारांश

ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका की नाकेबंदी को गंभीरता से लिया है, इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए। उनका कहना है कि यह ना सिर्फ अवैध है, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध भी हो सकता है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

अमेरिकी नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन माना जा रहा है।
संघर्षविराम का उल्लंघन हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन भी हो सकता है।
आम नागरिकों पर प्रभाव डालने वाली कार्रवाई।
डोनाल्ड ट्रंप की बर्बादी की धमकी।

तेहरान, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के समुद्री तटों या बंदरगाहों पर अमेरिका की कथित "नाकेबंदी" को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम को तोड़ता है, बल्कि इसे अवैध और आपराधिक भी कहा जा सकता है।

बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ नियमों का उल्लेख करते हुए इसे ईरान की संप्रभुता के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करती है, जो किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग या उसकी धमकी को मना करता है।

उन्होंने यूएन प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। आगे उन्होंने कहा कि इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 (1974) के अनुच्छेद 3(सी) के तहत "आक्रामक कृत्य" भी माना जा सकता है, जिसमें किसी देश के बंदरगाहों या तटों की नाकेबंदी शामिल है।

इन नियमों और अनुच्छेदों का सामान्य मतलब है कि इस प्रकार की कार्रवाई से आम नागरिकों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और यदि उन्हें सामूहिक रूप से दंडित किया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

28 फरवरी को यूएस-इजरायल की संयुक्त एयर स्ट्राइक ने ईरान के कई हिस्सों में गंभीर तबाही मचाई। 40 दिन तक चले संघर्ष के बाद, अंततः 8 अप्रैल को अस्थायी विराम पर सहमति बनी। अब दूसरे दौर की बातचीत के लिए दोनों पक्ष फिर से इस्लामाबाद का रुख करेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ट्रुथ सोशल के माध्यम से इसकी जानकारी दी।

ट्रंप ने कहा कि डील पर सहमति न बनने की स्थिति में ईरान को बर्बाद करने की धमकी दी। उन्होंने कहा, "हम एक बहुत ही सही और वाजिब डील दे रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि वे इसे मानेंगे क्योंकि, अगर वे नहीं मानते हैं, तो यूनाइटेड स्टेट्स ईरान में हर एक पावर प्लांट और हर एक ब्रिज को उड़ा देगा।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे डील नहीं लेते हैं, तो यह उनके लिए सम्मान की बात होगी, क्योंकि वे वह करेंगे जो पिछले 47 साल से अमेरिका के अन्य राष्ट्रपति ईरान के साथ नहीं कर पाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की कार्रवाई न केवल उनके क्षेत्रीय अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ भी जाती है। इस प्रकार की घटनाएँ वैश्विक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका की नाकेबंदी का क्या असर होगा?
इस प्रकार की नाकेबंदी आम नागरिकों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जिससे मानवता के खिलाफ अपराध की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है?
हाँ, ईरान के प्रवक्ता के अनुसार, यह अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
संघर्षविराम का उल्लंघन कैसे हुआ?
ईरान का कहना है कि अमेरिका की नाकेबंदी पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम का उल्लंघन है।
यूएन चार्टर के अनुसार क्या नियम हैं?
यूएन चार्टर का अनुच्छेद 2(4) किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली कार्रवाइयों को प्रतिबंधित करता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने डील पर सहमति नहीं दी, तो अमेरिका उसकी सभी प्रमुख संरचनाओं को नष्ट कर देगा।
राष्ट्र प्रेस
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