ईरान के विदेश मंत्री ने युद्ध अपराधियों की दवा कंपनियों पर बमबारी की निंदा की
सारांश
Key Takeaways
- युद्ध अपराध की गंभीरता को समझना आवश्यक है।
- ईरान अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
- अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध अपराधी अब इजरायल में दवा कंपनियों पर बमबारी कर रहे हैं। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं इन हमलावरों को कड़ी सजा देंगी।
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "इजरायल में युद्ध अपराधी अब खुलकर और बेशर्मी से दवा कंपनियों पर हमले कर रहे हैं। उनके इरादे स्पष्ट हैं, मगर वे यह नहीं समझ रहे हैं कि उनका सामना निहत्थे फिलिस्तीनी नागरिकों से नहीं है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं उन्हें कठोर सजा देंगी।"
इससे पहले, ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर उतरे एक विमान को अमेरिकी हमले में निशाना बनाया गया था। ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने चिकित्सा उपकरण और दवा ले जा रहे विमान पर हमले को युद्ध अपराध और अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के दूतावास के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की गई जानकारी में बताया गया कि ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर अमेरिकी हमले में एक विमान को निशाना बनाया गया, जो मानवीय मिशन के तहत दवा लेकर जा रहा था।
ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने इस हमले की कड़ी निंदा की। यह विमान कई देशों से दवाएं और चिकित्सा उपकरण लेकर निकला था और मशहद हवाई अड्डे पर उतरा था। संगठन के बयान में कहा गया कि मानवीय मिशनों में लगे नागरिक विमानों को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों का घोर उल्लंघन है।
संगठन ने कहा कि शिकागो कन्वेंशन (1944) और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन (1971) के अनुसार, नागरिक विमानों की सुरक्षा के खिलाफ कोई भी कार्य विमानन के क्षेत्र में एक अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कृत्य माना जाता है।
जिनेवा कन्वेंशन के अतिरिक्त प्रोटोकॉल I के अनुच्छेद 52 के तहत, नागरिक वस्तुओं पर हमले युद्ध अपराध माने जाते हैं।
नागरिक उड्डयन संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय निकायों से आग्रह किया कि वे इस कृत्य पर तुरंत ध्यान दें और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाएं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को दावा किया कि वे 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा। यदि संवाद से बात नहीं बनी, तो 'बम के जरिए बातचीत' को अंजाम दिया जाएगा।