ईरान राष्ट्रपति पेजेश्कियन की चेतावनी: 'आक्रमणकारियों को पछतावा होने तक प्रतिरोध जारी रहेगा'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मंगलवार, 8 सितंबर को स्पष्ट किया कि जब तक हमलावर देशों को अपने कृत्यों पर पूर्ण पश्चाताप नहीं होता, तब तक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अपना प्रतिरोध पूरी शक्ति के साथ जारी रखेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब 28 फरवरी 2026 को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन का आधिकारिक रुख
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा से युद्ध के खिलाफ रहा है और लोगों के हितों की रक्षा तथा पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने को युद्ध से दूर रहने में मानता है।" उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार ईरान ने अब तक आक्रामकता के विरुद्ध साहसपूर्वक रक्षात्मक कदम उठाए हैं, वह प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक आक्रमणकारियों को पूरी तरह पछतावा नहीं हो जाता।
ईरानी विदेश मंत्री ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए युद्ध के प्रति ईरान के विरोध को रेखांकित किया।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और होर्मुज स्ट्रेट का संकट
28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने इजरायल तथा क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों व संपत्तियों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की लहर चलाई। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मज़बूत करते हुए वहाँ से जहाज़ों के गुज़रने पर प्रतिबंध लगा दिया।
प्रतिक्रियास्वरूप, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाज़ों को निशाना बनाते हुए नौसैनिक नाकाबंदी कर दी। होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, में इस व्यवधान ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर गंभीर दबाव डाला है।
इराक और अरब लीग की कूटनीतिक पहल
इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने सोमवार को काहिरा में अरब लीग के महासचिव नबील फहमी से मुलाकात की। इराकी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन व्यवधानों पर विस्तृत चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण अरब देशों, विशेष रूप से इराक, पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभावों की समीक्षा की। हुसैन ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव कम करने के लिए संवाद के रास्ते खोलने पर ज़ोर दिया और कहा कि अरब लीग इसमें सकारात्मक भूमिका निभाने में सक्षम है। फहमी ने संकटों से निपटने के लिए शांत कूटनीति और बातचीत को प्राथमिकता देने का समर्थन किया। यह बैठक मंत्रिस्तरीय अरब लीग परिषद के नियमित सत्र के दौरान आयोजित हुई।
समझौता ज्ञापन और वार्ता का अनिश्चित भविष्य
अमेरिका और ईरान ने 18 जून को क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस MOU के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुँचने के लिए बातचीत करनी थी, जिसकी समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई। गौरतलब है कि समयसीमा बीत जाने के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से वार्ता का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
क्या होगा आगे
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर जारी तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को और प्रभावित कर सकता है। अरब लीग की मध्यस्थता की पेशकश और इराक की कूटनीतिक सक्रियता से संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय देश इस संघर्ष के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयासरत हैं, हालाँकि तेहरान के कड़े रुख के बाद वार्ता की राह और जटिल हो गई है।