ईरान-अमेरिका वार्ता: रेजाई बोले — वॉशिंगटन का जवाब अपर्याप्त, सात शर्तों पर कई मुद्दे अनसुलझे
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रेजाई ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन ने ईरान की सात शर्तों पर जो प्रतिक्रिया दी है, वह तेहरान की दृष्टि में संतोषजनक नहीं है। रेजाई के अनुसार, अमेरिका ने कुछ शर्तों को मानने की तत्परता दिखाई है, परंतु कई अहम मुद्दों पर उसका रुख अभी भी अस्पष्ट बना हुआ है।
एक्स पर रेजाई का सीधा संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक पोस्ट में रेजाई ने लिखा, 'अमेरिका ईरान की सात शर्तों में से कुछ को मानने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन हम उसके जवाब को अपर्याप्त मानते हैं। ईरान की कूटनीति बदल गई है और अब पुरानी स्थिति में वापसी नहीं होगी।' यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है।
ट्रंप और नेतन्याहू पर सीधा हमला
एक अन्य एक्स पोस्ट में रेजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अब तस्करी का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में नाकाम रहा है। रेजाई ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा, 'इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बातों में आकर ट्रंप ने मानव इतिहास के सबसे मूर्खतापूर्ण युद्धों में से एक शुरू कर दिया।' उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना पहले कभी इतनी कठिन और गंभीर स्थिति में नहीं फंसी थी।
ईरान की सात शर्तों का संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पूर्व रेजाई ने स्पष्ट किया था कि तेहरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर की बातचीत शुरू करने से पहले सात शर्तें रखी हैं। ईरान का रुख यह है कि यदि अमेरिका इस संकट से बाहर निकलना चाहता है और खुद को और गहरे दलदल में फंसने से बचाना चाहता है, तो उसके पास ईरान के अधिकारों और शर्तों को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
कूटनीतिक रुख में बदलाव का संकेत
रेजाई के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि ईरान अब पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक कड़े रुख पर है। विश्लेषकों के अनुसार, यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। ईरान के इस रुख से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर कूटनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा
रेजाई के इन बयानों के बाद ईरान-अमेरिका वार्ता की अगली दिशा अनिश्चित बनी हुई है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वॉशिंगटन ईरान की शेष शर्तों पर ठोस स्पष्टता नहीं देता, तब तक दोनों देशों के बीच सार्थक बातचीत की संभावना सीमित रहेगी। यह गतिरोध न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।