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ईरान पर अमेरिकी हमले में देरी क्यों? पूर्व राजदूत वीणा सिकरी ने गोला-बारूद की कमी को बताया कारण

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ईरान पर अमेरिकी हमले में देरी क्यों? पूर्व राजदूत वीणा सिकरी ने गोला-बारूद की कमी को बताया कारण

सारांश

पूर्व राजनयिक वीणा सिकरी का विश्लेषण — ईरान पर अमेरिकी हमला टला क्योंकि गोला-बारूद और इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी हो सकती है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की जंग में ईरान अपनी स्थिति मज़बूत रखे हुए है, और नाटो देश भी इस जलमार्ग पर अपनी भूमिका तलाश रहे हैं।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने 22 अगस्त को ईरान पर अमेरिकी हमले में देरी के कारणों का विश्लेषण किया।
कथित तौर पर अमेरिकी सेना के पास गोला-बारूद, इंटरसेप्टर और मिसाइलों की उपलब्धता में कमी हो सकती है।
अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण को अपना अधिकार मान रहा है।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट अपने नियंत्रण में रखने का निर्णय लिया है; अधिकतम ओमान के साथ समझौते की संभावना।
नाटो देश भी होर्मुज स्ट्रेट में अपनी भूमिका पर विचार कर रहे हैं, रिपोर्टों के अनुसार।

भारत की पूर्व राजनयिक और बांग्लादेश में पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने 22 अगस्त को ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में हो रही देरी के संभावित कारणों पर अपना विश्लेषण साझा किया। उनके अनुसार, अमेरिकी सेना के पास गोला-बारूद, इंटरसेप्टर और अन्य मिसाइलों की उपलब्धता में कमी की संभावना इस देरी की प्रमुख वजह हो सकती है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए हालिया कड़े बयानों की पृष्ठभूमि में आया है।

होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की जंग

वीणा सिकरी ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी रणनीति को समझाते हुए कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह का बयान दिया है। उन्होंने कहा, 'अमेरिकी, जितना हो सके, होर्मुज स्ट्रेट में जाने और बाहर आने वाले सभी जहाजों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस लिहाज से, उन्हें लगता है कि यह हमारा इलाका है — क्योंकि अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड जहाजों की मूवमेंट को कंट्रोल करने में सक्षम है।' गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील है।

हमले में देरी की वजह — हथियारों की कमी का संदेह

पूर्व राजनयिक ने कहा कि अमेरिका ईरान को 'बहुत बड़े हमले' की धमकी दे रहा है, लेकिन वह हमला अब तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग कहते हैं कि शायद गोला-बारूद, इंटरसेप्टर और दूसरी मिसाइलों की उपलब्धता में कुछ दिक्कतों की वजह से अमेरिकी सेना के पास कमी हो रही है।' हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अंदाज़ा है और कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष के कारण पश्चिमी देशों के हथियार भंडार पर पहले से दबाव बताया जाता रहा है।

नाटो देशों की भूमिका और बदलती भू-राजनीति

सिकरी ने यह भी बताया कि कुछ रिपोर्टों के अनुसार नाटो देश भी होर्मुज स्ट्रेट में अपनी भूमिका पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद बदलती हुई स्थिति है और कोई सच में नहीं जानता कि यह कहाँ जाएगी। उनके अनुसार, ईरान ने यह तय कर लिया है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में रहेगा और अधिकतम वह ओमान के साथ किसी समझौते पर विचार कर सकता है।

विशेषज्ञ का आकलन — स्थिति अनिश्चित

वीणा सिकरी का यह विश्लेषण कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है। दशकों के राजनयिक अनुभव वाली सिकरी का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव केवल सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक भी है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की यह लड़ाई वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में घटनाक्रम किस दिशा में जाता है, यह पूरी दुनिया की नज़रों में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अगर यह ईरान नीति को प्रभावित कर रहा है तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा सवाल है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान-अमेरिका टकराव केवल द्विपक्षीय नहीं — भारत समेत तेल आयातक देशों के लिए यह सीधे ऊर्जा सुरक्षा का मामला है, जिसे भारतीय नीति-निर्माताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान पर अमेरिकी हमले में देरी क्यों हो रही है?
पूर्व राजनयिक वीणा सिकरी के अनुसार, अमेरिकी सेना के पास गोला-बारूद, इंटरसेप्टर और अन्य मिसाइलों की उपलब्धता में कमी हो सकती है, जिस कारण हमला टल रहा है। हालाँकि यह अनुमान है और कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका और ईरान में विवाद क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख जलमार्ग है। अमेरिका इससे गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण चाहता है, जबकि ईरान इसे अपने प्रभाव क्षेत्र में मानता है। दोनों देशों के बीच यह रणनीतिक टकराव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।
वीणा सिकरी कौन हैं और उनका विश्लेषण क्यों महत्वपूर्ण है?
वीणा सिकरी बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त और अनुभवी भारतीय राजनयिक हैं। उनका दक्षिण एशिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में दशकों का अनुभव है, जिससे उनका भू-राजनीतिक विश्लेषण नीतिगत हलकों में विशेष महत्व रखता है।
क्या नाटो देश होर्मुज स्ट्रेट में शामिल हो सकते हैं?
वीणा सिकरी के अनुसार, कुछ रिपोर्टों में संकेत है कि नाटो देश होर्मुज स्ट्रेट में अपनी भूमिका पर विचार कर रहे हैं। हालाँकि यह स्थिति अभी भी अनिश्चित है और कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी क्या स्थिति रखता है?
वीणा सिकरी के अनुसार, ईरान ने यह तय कर लिया है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में रहेगा। अधिकतम वह ओमान के साथ किसी समझौते पर विचार करने को तैयार है, लेकिन अमेरिकी नियंत्रण स्वीकार करने की कोई संभावना नहीं दिखती।
राष्ट्र प्रेस
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