ईरानी विदेश मंत्री अराघची की ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों में सैन्य सहयोग 'अस्वीकार्य'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 1 अगस्त 2026 को ब्रिटेन को स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि वह ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों में किसी भी रूप में भागीदार न बने। यह चेतावनी अराघची और ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के दौरान दी गई, जिसका विवरण ईरानी विदेश मंत्रालय ने जारी किया।
चेतावनी का मर्म: 'आक्रामक देशों' से सहयोग अस्वीकार्य
अराघची ने कहा कि 'आक्रामक देशों' के साथ कोई भी सहयोग — चाहे वह मौजूदा रक्षा समझौतों के अंतर्गत ही क्यों न हो — 'स्वीकार्य नहीं' होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और 'आक्रामता की परिभाषा संबंधी कन्वेंशन' का हवाला देते हुए कहा कि किसी देश की भूमि या सुविधाओं को किसी तीसरे देश के विरुद्ध गैरकानूनी हमलों के लिए उपलब्ध कराना स्वयं आक्रामकता की श्रेणी में आता है, और इससे पीड़ित देश को आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त होता है।
गौरतलब है कि पिछले महीने ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान से संबंधित अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति जारी रखी थी — जो उनके पूर्ववर्ती की नीति की निरंतरता थी।
ब्रिटेन की नीतियों पर ईरान की आपत्ति
अराघची ने लंदन की नीतियों को 'अनुचित और गलत' बताया। उन्होंने दो विशेष मुद्दे उठाए: पहला, ब्रिटेन द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करना; और दूसरा, हाल के महीनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के विरुद्ध थोपे गए दो सशस्त्र संघर्षों में ब्रिटेन की कथित 'मिलीभगत'। उन्होंने ब्रिटेन से तेहरान के प्रति अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
पृष्ठभूमि: फरवरी के हमले और उसके बाद की स्थिति
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और अनेक नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और कड़ी कर ली।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान ने जून में अमेरिका के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करना था। अराघची के अनुसार, ईरान ने यह प्रक्रिया अच्छी नीयत से शुरू की थी, लेकिन वाशिंगटन अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा।
होर्मुज और ओमान का कारक
अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के प्रबंधन के लिए ओमान के साथ एक परिचालन तंत्र स्थापित करने के ईरान के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने चेताया कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है — एक स्पष्ट संकेत कि ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर बाहरी दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा।
ब्रिटेन का रुख: कूटनीति की वकालत
विदेश सचिव मिलिबैंड ने वार्ता में स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान के विरुद्ध किसी युद्ध में शामिल नहीं है और उन्होंने कूटनीति को ही विवादों के समाधान का एकमात्र रास्ता बताया। आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर नज़र बनी रहेगी, क्योंकि होर्मुज की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए निर्णायक बनी हुई है।