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ईरानी विदेश मंत्री अराघची की ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों में सैन्य सहयोग 'अस्वीकार्य'

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ईरानी विदेश मंत्री अराघची की ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों में सैन्य सहयोग 'अस्वीकार्य'

सारांश

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने ब्रिटेन को सीधे शब्दों में कहा — अमेरिकी हमलों में सहयोग 'अस्वीकार्य' है और इससे ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार मिलता है। फरवरी के विनाशकारी हमलों, विफल MOU और होर्मुज तनाव के बीच यह चेतावनी लंदन-तेहरान संबंधों में नई दरार की ओर इशारा करती है।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 1 अगस्त 2026 को ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड को फोन पर चेतावनी दी।
अराघची ने कहा कि अमेरिकी हमलों में किसी भी रूप में ब्रिटिश सैन्य सहयोग 'स्वीकार्य नहीं' होगा।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान-संबंधी अभियानों के लिए ब्रिटिश अड्डों के अमेरिकी उपयोग की अनुमति बरकरार रखी है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ कमांडर और नागरिक मारे गए।
ईरान ने जून में अमेरिका के साथ MOU पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अराघची के अनुसार वाशिंगटन अपने वादे पूरे करने में विफल रहा।
मिलिबैंड ने कहा कि ब्रिटेन युद्ध में शामिल नहीं है और कूटनीति ही समाधान का रास्ता है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 1 अगस्त 2026 को ब्रिटेन को स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि वह ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों में किसी भी रूप में भागीदार न बने। यह चेतावनी अराघची और ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के दौरान दी गई, जिसका विवरण ईरानी विदेश मंत्रालय ने जारी किया।

चेतावनी का मर्म: 'आक्रामक देशों' से सहयोग अस्वीकार्य

अराघची ने कहा कि 'आक्रामक देशों' के साथ कोई भी सहयोग — चाहे वह मौजूदा रक्षा समझौतों के अंतर्गत ही क्यों न हो — 'स्वीकार्य नहीं' होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और 'आक्रामता की परिभाषा संबंधी कन्वेंशन' का हवाला देते हुए कहा कि किसी देश की भूमि या सुविधाओं को किसी तीसरे देश के विरुद्ध गैरकानूनी हमलों के लिए उपलब्ध कराना स्वयं आक्रामकता की श्रेणी में आता है, और इससे पीड़ित देश को आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त होता है।

गौरतलब है कि पिछले महीने ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान से संबंधित अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति जारी रखी थी — जो उनके पूर्ववर्ती की नीति की निरंतरता थी।

ब्रिटेन की नीतियों पर ईरान की आपत्ति

अराघची ने लंदन की नीतियों को 'अनुचित और गलत' बताया। उन्होंने दो विशेष मुद्दे उठाए: पहला, ब्रिटेन द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करना; और दूसरा, हाल के महीनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के विरुद्ध थोपे गए दो सशस्त्र संघर्षों में ब्रिटेन की कथित 'मिलीभगत'। उन्होंने ब्रिटेन से तेहरान के प्रति अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

पृष्ठभूमि: फरवरी के हमले और उसके बाद की स्थिति

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और अनेक नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और कड़ी कर ली।

यह ऐसे समय में आया है जब ईरान ने जून में अमेरिका के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करना था। अराघची के अनुसार, ईरान ने यह प्रक्रिया अच्छी नीयत से शुरू की थी, लेकिन वाशिंगटन अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा।

होर्मुज और ओमान का कारक

अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के प्रबंधन के लिए ओमान के साथ एक परिचालन तंत्र स्थापित करने के ईरान के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने चेताया कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है — एक स्पष्ट संकेत कि ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर बाहरी दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा।

ब्रिटेन का रुख: कूटनीति की वकालत

विदेश सचिव मिलिबैंड ने वार्ता में स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान के विरुद्ध किसी युद्ध में शामिल नहीं है और उन्होंने कूटनीति को ही विवादों के समाधान का एकमात्र रास्ता बताया। आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर नज़र बनी रहेगी, क्योंकि होर्मुज की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए निर्णायक बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर उन्हीं अड्डों के उपयोग की अनुमति बनाए रखता है जिन्हें तेहरान 'मिलीभगत' कहता है। जून का विफल MOU दर्शाता है कि बातचीत की मेज़ पर भरोसे की खाई गहरी है। होर्मुज पर ईरान की बढ़ती पकड़ और ओमान के साथ परिचालन तंत्र की कोशिश संकेत देती है कि तेहरान अब कूटनीति और दबाव — दोनों मोर्चों पर एक साथ चल रहा है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने ब्रिटेन को क्या चेतावनी दी?
अराघची ने कहा कि ब्रिटेन द्वारा अमेरिकी सैन्य हमलों में किसी भी प्रकार का सहयोग — चाहे मौजूदा रक्षा समझौतों के तहत ही क्यों न हो — ईरान के लिए 'अस्वीकार्य' होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ऐसा सहयोग ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार देता है।
28 फरवरी 2026 के हमलों में क्या हुआ था?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए, जिसके बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ईरान और अमेरिका के बीच MOU क्यों विफल हुआ?
अराघची के अनुसार, ईरान ने जून 2026 में अमेरिका के साथ संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन वाशिंगटन अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा। ईरान का कहना है कि उसने यह प्रक्रिया अच्छी नीयत से शुरू की थी।
ब्रिटेन के सैन्य अड्डों का अमेरिका कैसे उपयोग कर रहा है?
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान से संबंधित अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति बरकरार रखी है, जो उनके पूर्ववर्ती की नीति की निरंतरता है। ईरान इसी को अपनी आपत्ति का मुख्य आधार बना रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का क्या रुख है?
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के प्रबंधन के लिए ओमान के साथ एक परिचालन तंत्र स्थापित करने की कोशिश की है। अराघची ने चेताया है कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से स्थिति और जटिल हो जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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