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होर्मुज स्ट्रेट में आईआरजीसी का दावा: अमेरिकी 'डाइव-एलडी' मानव रहित पनडुब्बी कब्जे में ली, MQ-9 ड्रोन भी मार गिराया

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होर्मुज स्ट्रेट में आईआरजीसी का दावा: अमेरिकी 'डाइव-एलडी' मानव रहित पनडुब्बी कब्जे में ली, MQ-9 ड्रोन भी मार गिराया

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट में आईआरजीसी ने अमेरिकी 'डाइव-एलडी' मानव रहित पनडुब्बी जब्त करने और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। अमेरिका ने तकनीकी खराबी स्वीकारी पर कब्जे से इनकार नहीं किया। 17 अगस्त को समाप्त हुई वार्ता समयसीमा के बाद यह घटना दोनों देशों के बीच नए टकराव का संकेत है।

मुख्य बातें

आईआरजीसी ने 9 सितंबर को दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश क्षेत्र में अमेरिकी मानव रहित पनडुब्बी 'डाइव-एलडी' को कब्जे में लिया।
आईआरजीसी ने उसी दिन एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर मार गिराने का भी दावा किया।
अमेरिकी सेना ने तकनीकी खराबी स्वीकार की, लेकिन ईरान द्वारा कब्जे की न पुष्टि की, न खंडन किया।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान 'आक्रमण करने वालों' के पछताने तक प्रतिरोध जारी रखेगा।
अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन की 60 दिन की समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है; वार्ता का भविष्य अनिश्चित।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने 9 सितंबर को दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश क्षेत्र में अमेरिकी सेना की एक अत्याधुनिक मानव रहित पनडुब्बी को कब्जे में ले लिया है। आईआरजीसी के अनुसार, यह वाहन अमेरिकी सैन्य शस्त्रागार की सबसे उन्नत अंडरवॉटर तकनीक से लैस है और इसे एक जटिल खुफिया व सैन्य अभियान के दौरान जब्त किया गया।

मानव रहित वाहन की पहचान और दावे

आईआरजीसी की आधिकारिक समाचार सेवा सेपाह न्यूज में जारी बयान के अनुसार, कब्जे में लिए गए इस पानी के भीतर काम करने वाले वाहन की पहचान 'डाइव-एलडी' के रूप में की गई है। संगठन ने इसे दुनिया की सबसे आधुनिक अंडरवॉटर वाहन तकनीकों में से एक बताया और कहा कि इसकी तस्वीरें अगले कुछ घंटों में जारी की जाएंगी। इसी दिन एक अलग बयान में आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे एक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया।

अमेरिकी सेना की प्रतिक्रिया

आईआरजीसी के इन दावों के बाद अमेरिकी सेना ने एक बयान जारी कर स्वीकार किया कि उसका एक पानी के भीतर काम करने वाला ड्रोन क्षेत्रीय जल सर्वेक्षण के दौरान एक दिन पहले तकनीकी खराबी का शिकार हो गया था। हालाँकि, अमेरिकी सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उस उपकरण को ईरान ने कब्जे में लिया है या नहीं। इस प्रकार, दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास बना हुआ है।

ईरानी राष्ट्रपति का कड़ा बयान

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि 'आक्रमण करने वालों' को अपने कदमों पर पूरी तरह पछतावा न हो जाए। उन्होंने लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है। हमारा मानना है कि लोगों के हितों की रक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका युद्ध भड़काने से बचना है।"

पेजेश्कियन ने आगे कहा, "लेकिन जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा न हो जाए। ईरान अपने महान लोगों के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।"

पृष्ठभूमि: बढ़ता तनाव और टूटती वार्ता

गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल तथा क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

यह ऐसे समय में आया है जब 18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचना था। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन हालिया तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों के बीच वार्ता का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

आगे क्या होगा

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है और इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। आईआरजीसी द्वारा जब्त किए गए उपकरण की तस्वीरें जारी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता के अगले कदम पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित संदेश है — और इसका समय उतना ही महत्वपूर्ण है जितना इसकी सामग्री। 17 अगस्त को समाप्त हुई वार्ता समयसीमा के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य क्षमता का प्रदर्शन कर यह स्पष्ट किया है कि वह बातचीत की मेज पर कमज़ोर नहीं आएगा। अमेरिकी सेना का अस्पष्ट बयान — जो न पुष्टि करता है, न खंडन — रणनीतिक चुप्पी की एक क्लासिक मिसाल है, लेकिन यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की बढ़ती पकड़ वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक जोखिम है, जिसकी कीमत सबसे पहले एशियाई आयातक देशों — भारत सहित — को चुकानी पड़ सकती है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट में कौन सी अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का दावा किया है?
आईआरजीसी ने 'डाइव-एलडी' नामक अमेरिकी मानव रहित पानी के भीतर काम करने वाले वाहन को होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश क्षेत्र में कब्जे में लेने का दावा किया है। इसे अमेरिकी सेना की सबसे आधुनिक अंडरवॉटर तकनीकों में से एक बताया गया है।
अमेरिकी सेना ने इस दावे पर क्या कहा?
अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया कि उसका एक पानी के भीतर काम करने वाला ड्रोन क्षेत्रीय जल सर्वेक्षण के दौरान तकनीकी खराबी का शिकार हुआ था। हालाँकि, सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उस उपकरण को ईरान ने कब्जे में लिया है या नहीं।
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि क्या है?
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए। 18 जून को दोनों देशों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, लेकिन 60 दिन की वार्ता समयसीमा 17 अगस्त को बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई।
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इस घटना पर क्या कहा?
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है, लेकिन वह पूरी ताकत से प्रतिरोध जारी रखेगा जब तक 'आक्रमण करने वालों' को पछतावा न हो। उन्होंने ईरान के अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
होर्मुज स्ट्रेट में यह घटना वैश्विक स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे भारत सहित एशिया के बड़े तेल आयातक देश प्रभावित हो सकते हैं।
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