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सोमालीलैंड का इजरायल को स्पष्ट इनकार: 'अपने देश में मिलिट्री बेस नहीं बनाने देंगे'

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सोमालीलैंड का इजरायल को स्पष्ट इनकार: 'अपने देश में मिलिट्री बेस नहीं बनाने देंगे'

सारांश

सोमालीलैंड के रक्षा मंत्री ने तेल अवीव में साफ कह दिया — इजरायली सेना को अपनी धरती पर बेस नहीं बनाने देंगे। यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें खुफिया अड्डे की बात कही गई थी। दिसंबर 2025 में मान्यता देने के बाद से दोनों देशों के रिश्ते तेज़ी से बढ़े हैं, लेकिन सैन्य उपस्थिति की सीमा अभी तय नहीं।

मुख्य बातें

सोमालीलैंड के रक्षा मंत्री मोहम्मद यूसेफ अली ने 17 जून 2026 को तेल अवीव में इजरायली मिलिट्री बेस की खबरों को 'अफवाह' बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सैन्य या पुलिस बलों की तैनाती की उनके देश की कोई मंशा नहीं है।
इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी — ऐसा करने वाला वह पहला देश था।
'सोमाली गार्जियन' ने रविवार को रिपोर्ट किया था कि इजरायल ने सोमालीलैंड में एक खुफिया अड्डा स्थापित कर लिया है।
सोमालीलैंड में इजरायल के दूत माइकल लोटेम ने इस मसले पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
सोमालीलैंड 1991 से वास्तविक रूप में स्वायत्त है और 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर है।

सोमालीलैंड के रक्षा मंत्री मोहम्मद यूसेफ अली ने 17 जून 2026 को तेल अवीव में स्पष्ट किया कि उनका देश इजरायली सेना को अपनी धरती पर कोई सैन्य अड्डा स्थापित करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने ऐसी किसी भी खबर को सिरे से 'अफवाह' करार दिया और कहा कि इजरायली सैन्य या पुलिस बलों की तैनाती को लेकर उनके देश की कोई मंशा नहीं है।

रक्षा मंत्री का बयान और पृष्ठभूमि

अली तेल अवीव में एक व्यावसायिक सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह स्थिति स्पष्ट की। उनका यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि इजरायल ने सोमालीलैंड में एक खुफिया अड्डा पहले ही स्थापित कर लिया है और सैन्य बेस बनाने पर भी बातचीत जारी है। रविवार को 'सोमाली गार्जियन' ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

इस मसले पर जब सोमालीलैंड में इजरायल के दूत माइकल लोटेम से प्रतिक्रिया माँगी गई, तो उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।

सोमालीलैंड-इजरायल संबंधों की पृष्ठभूमि

इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी — ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बना। इस कदम पर सोमालिया ने तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे अपनी संप्रभुता पर 'जानबूझकर किया गया हमला' करार दिया था।

मान्यता के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक और व्यावसायिक संबंध तेज़ी से आगे बढ़े। सोमालीलैंड ने अपना नया राजदूत इजरायल में नियुक्त किया और घोषणा की कि उसका दूतावास यरुशलम में होगा — एक निर्णय जिसने कुछ इस्लामिक देशों की आलोचना को आमंत्रित किया, जो पूर्वी यरुशलम पर इजरायल के कब्ज़े को अवैध मानते हैं।

राष्ट्रपति का रुख और सैन्य सहयोग की सीमा

फरवरी 2026 में सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने कहा था कि उनका देश इजरायल के साथ भविष्य में सैन्य सहयोग की उम्मीद रखता है, लेकिन इजरायली सैन्य बेस स्थापित करने पर कोई वार्ता नहीं हुई है। हाल ही में राष्ट्रपति अब्दुल्लाही और उनकी पत्नी फर्दौसा मोहम्मद रोबले एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आगे की बातचीत के लिए इजरायल पहुँचे।

यह ऐसे समय में आया है जब 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और कई बड़ी शक्तियाँ इस रणनीतिक इलाके में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश में हैं।

सोमालीलैंड की रणनीतिक स्थिति

गौरतलब है कि सोमालीलैंड 1991 से वास्तविक रूप में स्वायत्त है — जब सोमालिया गृहयुद्ध की चपेट में आया था। तब से यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत और स्थिर रहा है। 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में इसकी भौगोलिक स्थिति इसे समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

आगे क्या

रक्षा मंत्री के इस स्पष्ट बयान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इजरायल और सोमालीलैंड के बीच सैन्य सहयोग की रूपरेखा किस दिशा में आगे बढ़ती है। कथित तौर पर खुफिया सहयोग और राजनयिक संबंधों की गति को देखते हुए, दोनों देशों के बीच संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर अरब और इस्लामिक देशों की नाराज़गी से बचने की ज़रूरत। रक्षा मंत्री का 'अफवाह' वाला शब्द चुनना महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने फरवरी में खुद भविष्य के सैन्य सहयोग की उम्मीद जताई थी — यानी इनकार पूर्ण नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थान पर सीमा-रेखा खींचने का प्रयास है। 'सोमाली गार्जियन' की खुफिया अड्डे वाली रिपोर्ट पर न इजरायल ने खंडन किया, न पुष्टि — यह चुप्पी खुद एक संकेत है। 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच सोमालीलैंड की यह स्थिति उसे एक मूल्यवान लेकिन नाज़ुक मोहरा बनाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमालीलैंड ने इजरायली मिलिट्री बेस से इनकार क्यों किया?
सोमालीलैंड के रक्षा मंत्री मोहम्मद यूसेफ अली ने 17 जून को तेल अवीव में स्पष्ट किया कि उनके देश की इजरायली सैन्य या पुलिस बलों की तैनाती की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने इस बारे में फैली खबरों को 'अफवाह' बताया।
इजरायल ने सोमालीलैंड को मान्यता कब दी?
इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी और ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बना। इस पर सोमालिया ने इसे अपनी संप्रभुता पर 'जानबूझकर किया गया हमला' कहा था।
सोमालीलैंड कब से स्वायत्त है और इसकी रणनीतिक अहमियत क्या है?
सोमालीलैंड 1991 से वास्तविक रूप में स्वायत्त है, जब सोमालिया गृहयुद्ध में फँस गया था। 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में इसकी भौगोलिक स्थिति इसे समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
'सोमाली गार्जियन' की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था?
रविवार को 'सोमाली गार्जियन' ने रिपोर्ट किया कि इजरायल ने सोमालीलैंड में एक खुफिया (इंटेलिजेंस) अड्डा स्थापित कर लिया है और वहाँ सैन्य बेस बनाने की संभावना पर भी चर्चा चल रही है। इजरायल के दूत माइकल लोटेम ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
सोमालीलैंड-इजरायल संबंधों पर अन्य देशों की क्या प्रतिक्रिया रही है?
कुछ इस्लामिक देशों ने इस साझेदारी की आलोचना की है, खासकर सोमालीलैंड के यरुशलम में दूतावास खोलने के फैसले पर। उनका तर्क है कि पूर्वी यरुशलम पर इजरायल का कब्ज़ा है, इसलिए वहाँ दूतावास खोलना उचित नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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