सोमालीलैंड का इजरायल को स्पष्ट इनकार: 'अपने देश में मिलिट्री बेस नहीं बनाने देंगे'
सारांश
मुख्य बातें
सोमालीलैंड के रक्षा मंत्री मोहम्मद यूसेफ अली ने 17 जून 2026 को तेल अवीव में स्पष्ट किया कि उनका देश इजरायली सेना को अपनी धरती पर कोई सैन्य अड्डा स्थापित करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने ऐसी किसी भी खबर को सिरे से 'अफवाह' करार दिया और कहा कि इजरायली सैन्य या पुलिस बलों की तैनाती को लेकर उनके देश की कोई मंशा नहीं है।
रक्षा मंत्री का बयान और पृष्ठभूमि
अली तेल अवीव में एक व्यावसायिक सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह स्थिति स्पष्ट की। उनका यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि इजरायल ने सोमालीलैंड में एक खुफिया अड्डा पहले ही स्थापित कर लिया है और सैन्य बेस बनाने पर भी बातचीत जारी है। रविवार को 'सोमाली गार्जियन' ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
इस मसले पर जब सोमालीलैंड में इजरायल के दूत माइकल लोटेम से प्रतिक्रिया माँगी गई, तो उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
सोमालीलैंड-इजरायल संबंधों की पृष्ठभूमि
इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी — ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बना। इस कदम पर सोमालिया ने तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे अपनी संप्रभुता पर 'जानबूझकर किया गया हमला' करार दिया था।
मान्यता के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक और व्यावसायिक संबंध तेज़ी से आगे बढ़े। सोमालीलैंड ने अपना नया राजदूत इजरायल में नियुक्त किया और घोषणा की कि उसका दूतावास यरुशलम में होगा — एक निर्णय जिसने कुछ इस्लामिक देशों की आलोचना को आमंत्रित किया, जो पूर्वी यरुशलम पर इजरायल के कब्ज़े को अवैध मानते हैं।
राष्ट्रपति का रुख और सैन्य सहयोग की सीमा
फरवरी 2026 में सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने कहा था कि उनका देश इजरायल के साथ भविष्य में सैन्य सहयोग की उम्मीद रखता है, लेकिन इजरायली सैन्य बेस स्थापित करने पर कोई वार्ता नहीं हुई है। हाल ही में राष्ट्रपति अब्दुल्लाही और उनकी पत्नी फर्दौसा मोहम्मद रोबले एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आगे की बातचीत के लिए इजरायल पहुँचे।
यह ऐसे समय में आया है जब 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और कई बड़ी शक्तियाँ इस रणनीतिक इलाके में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश में हैं।
सोमालीलैंड की रणनीतिक स्थिति
गौरतलब है कि सोमालीलैंड 1991 से वास्तविक रूप में स्वायत्त है — जब सोमालिया गृहयुद्ध की चपेट में आया था। तब से यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत और स्थिर रहा है। 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में इसकी भौगोलिक स्थिति इसे समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
आगे क्या
रक्षा मंत्री के इस स्पष्ट बयान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इजरायल और सोमालीलैंड के बीच सैन्य सहयोग की रूपरेखा किस दिशा में आगे बढ़ती है। कथित तौर पर खुफिया सहयोग और राजनयिक संबंधों की गति को देखते हुए, दोनों देशों के बीच संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र बनी रहेगी।