सोमालीलैंड राष्ट्रपति अब्दुल्लाही की इजरायल में ऐतिहासिक पहली राजकीय यात्रा, यरूशलम में दूतावास उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही (जिन्हें 'सिरो' के नाम से जाना जाता है) अपनी पत्नी फरदौसा मोहम्मद रोबल के साथ रविवार, 15 जून 2025 को इजरायल की एक ऐतिहासिक राजकीय यात्रा पर पहुँचे। इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह किसी सोमालीलैंड राष्ट्राध्यक्ष की इजरायल की पहली आधिकारिक यात्रा है। दिसंबर 2025 में इजरायल द्वारा सोमालीलैंड की स्वतंत्रता को औपचारिक मान्यता दिए जाने के बाद यह पहला उच्चस्तरीय राजनयिक दौरा भी है।
यात्रा का मुख्य घटनाक्रम
राष्ट्रपति अब्दुल्लाही के रविवार से गुरुवार तक इजरायल में रहने की जानकारी दी गई है। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण क्षण सोमवार शाम को आने की संभावना है, जब यरूशलम में सोमालीलैंड दूतावास का आधिकारिक उद्घाटन किया जाएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंधों की स्थापना का प्रतीक माना जा रहा है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति ने मूल रूप से मार्च 2025 के अंत में यह यात्रा करने की योजना बनाई थी, जो बाद में स्थगित हो गई थी। सोमालीलैंड के राजनयिक इस्माइल शिरवाक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेल अवीव की सड़कों पर सोमालीलैंड और इजरायल के झंडे साथ-साथ लहराते हुए तस्वीरें पोस्ट कीं और राष्ट्रपति के आगमन की पुष्टि की।
इजरायल-सोमालीलैंड संबंधों की पृष्ठभूमि
सोमालिया से अलग होकर स्वयं को स्वतंत्र घोषित करने वाले क्षेत्र सोमालीलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने वाला इजरायल पहला देश बना। यह मान्यता दिसंबर 2025 में दी गई थी। सोमालीलैंड अदन की खाड़ी के तट पर, लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित है — एक ऐसा भौगोलिक स्थान जो वैश्विक समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इजरायल ने इस स्वयं-घोषित गणराज्य को मान्यता देकर इस रणनीतिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश की है, ताकि ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रभाव का मुकाबला किया जा सके।
हूती खतरा और समुद्री सुरक्षा
सोमालीलैंड के सामने, अदन की खाड़ी के पार यमन में बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण रखने वाले हूती हाल के समय में इजरायल के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरे हैं। हूती ने लाल सागर से गुजरने वाले इजरायल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, जिससे क्षेत्रीय तनाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में सोमालीलैंड के साथ इजरायल की बढ़ती निकटता को इस भू-राजनीतिक समीकरण के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सहयोग से क्या उम्मीदें
दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों के समर्थकों का मानना है कि इस साझेदारी से आर्थिक विकास, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, सोमालीलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा — जो उसके दशकों पुराने मान्यता-संघर्ष में एक निर्णायक कदम हो सकता है।
यरूशलम में दूतावास के उद्घाटन के साथ, दोनों देशों के बीच संस्थागत राजनयिक ढाँचा आकार लेने लगा है — और आने वाले महीनों में द्विपक्षीय समझौतों की दिशा में और कदम उठाए जाने की संभावना है।