सोमालीलैंड के पहले राजदूत मोहम्मद हाजी ने यरुशलम में राष्ट्रपति हर्जोग को सौंपे राजनयिक प्रमाण-पत्र
सारांश
मुख्य बातें
सोमालीलैंड के पहले राजदूत मोहम्मद हाजी ने 18 मई 2026 को यरुशलम में इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को अपने राजनयिक प्रमाण-पत्र सौंपे — एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण जो दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। हाजी ने इस अवसर पर कहा कि इजरायल और सोमालीलैंड के बीच संबंध 'रणनीतिक' प्रकृति के हैं।
राजदूत के शब्दों में संबंधों की परिभाषा
राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, हाजी ने कहा, 'हमने एक मजबूत संबंध बनाया है, जो रणनीतिक प्रकृति का है और विकास, राजनीतिक सहयोग, सुरक्षा सहयोग तथा लोगों के बीच संबंधों समेत कई क्षेत्रों में आगे का रास्ता खोलेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि यह रिश्ता केवल दो सरकारों तक सीमित नहीं, बल्कि दोनों देशों की जनता के बीच भी गहरा है — सोमालीलैंड के शहरों और ग्रामीण इलाकों में इजरायली झंडे लहराते देखे जाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1960 से 2025 तक
हाजी ने इस अवसर पर याद दिलाया कि 1960 में इजरायल उन गिने-चुने देशों में शामिल था जिसने सोमालीलैंड को पहली बार मान्यता दी थी। इसके बाद 26 दिसंबर 2025 को इजरायल ने एक बार फिर सबसे पहले सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की घोषणा की — स्वतंत्रता और संप्रभुता के 35 वर्षों बाद। गौरतलब है कि सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से अलग होकर खुद को स्वतंत्र देश घोषित किया था, लेकिन अब तक अधिकांश देशों ने उसे मान्यता नहीं दी है।
उस घोषणा के समय प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि इजरायल कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सोमालीलैंड के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है।
विदेश मंत्री सार की प्रतिक्रिया और एक्स पोस्ट
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी हाजी से मुलाकात की और सोमालीलैंड के स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें बधाई दी। सार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैं सोमालीलैंड के साथ संबंधों को और मजबूत करता रहूंगा।' इससे पहले 15 अप्रैल को सार ने माइकल लोटेम को सोमालीलैंड के लिए इजरायल का पहला राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की थी, जिसे 26 अप्रैल को इजरायली कैबिनेट ने औपचारिक मंजूरी दी।
मुस्लिम देशों की निंदा और अंतरराष्ट्रीय विरोध
इजरायल के इस कदम की कई मुस्लिम-बहुल देशों ने कड़ी आलोचना की है। सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, बांग्लादेश, पाकिस्तान और इंडोनेशिया सहित कई देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इसे सोमालिया की संप्रभुता का 'स्पष्ट उल्लंघन' बताया। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायल पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दबाव में है।
आगे क्या
दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की इस औपचारिक शुरुआत के बाद अब नजरें सहयोग के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर होंगी — खासकर सुरक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में। सोमालीलैंड की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की राह अभी भी संकरी है, लेकिन इजरायल के साथ यह गठजोड़ उसके कूटनीतिक मानचित्र पर एक नई रेखा खींचता है।