दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमले: टायर, मरजायून और बिंत जबील में तबाही, युद्धविराम फिर टूटा
सारांश
मुख्य बातें
इजरायली सेना ने 3 अगस्त को दक्षिणी लेबनान के कई शहरों और गांवों पर व्यापक हमले किए, जिनमें टायर, मरजायून और बिंत जबील प्रमुख रूप से निशाने पर रहे। इन हमलों के साथ 16 अप्रैल को हुए युद्धविराम समझौते का एक बार फिर उल्लंघन हुआ है, और क्षेत्र में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली ड्रोन ने नबातियेह के अली अल-ताहर पहाड़ी क्षेत्र पर विस्फोटक और आग लगाने वाले हथियार गिराए। टायर के निकट स्थित चामा गांव में इजरायली सेना ने तोपों से गोलाबारी की। तैयबे और यारून गांवों में सैनिकों ने जैतून के बागों में आग लगा दी, जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान हुआ।
यह ताजा हिंसा उस घटनाक्रम के बाद सामने आई जब रविवार को हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए। हिज्बुल्लाह का कहना था कि ये कार्रवाइयाँ लेबनान पर लगभग प्रतिदिन हो रहे इजरायली हमलों के जवाब में की गई थीं।
युद्धविराम की पृष्ठभूमि
16 अप्रैल को इजरायल और लेबनान सरकार के बीच एक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य इजरायली प्रशासन और हिज्बुल्लाह के बीच चल रही लड़ाई को विराम देना था। हालाँकि, इस समझौते का कई बार उल्लंघन हो चुका है।
गौरतलब है कि 2 मार्च को दोनों पक्षों के बीच पुनः संघर्ष शुरू हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की हत्या के बाद इजरायल ने जमीनी सैन्य अभियान छेड़ा और दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया।
वॉशिंगटन समझौता और उसकी सीमाएँ
26 जून को दोनों पक्षों ने वॉशिंगटन में अमेरिकी मध्यस्थता में एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत इजरायली सैनिकों को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटना था और उनकी जगह लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती तय की गई थी।
हालाँकि, हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने इस समझौते को इजरायल के सामने 'आत्मसमर्पण' करार दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी लेबनान में इजरायली छिटपुट हमले युद्धविराम के बावजूद जारी रहे हैं।
आम जनता पर असर
टायर, मरजायून और बिंत जबील जैसे शहरों के आसपास के गांवों में रहने वाली आम जनता इन हमलों की सबसे बड़ी शिकार है। जैतून के बागों में लगाई गई आग से कृषि को दीर्घकालिक नुकसान की आशंका है। विस्थापन और बुनियादी ढाँचे की क्षति के कारण मानवीय संकट गहराने की संभावना है।
क्या होगा आगे
विश्लेषकों के अनुसार, वॉशिंगटन समझौते की विश्वसनीयता अब दाँव पर है। यदि इजरायली सेना की वापसी और लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती समयबद्ध तरीके से नहीं हुई, तो क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और अमेरिकी मध्यस्थता की अगली कड़ी पर सभी की निगाहें टिकी हैं।