3 अगस्त 2026
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दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमले: टायर, मरजायून और बिंत जबील में तबाही, युद्धविराम फिर टूटा

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दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमले: टायर, मरजायून और बिंत जबील में तबाही, युद्धविराम फिर टूटा

सारांश

युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के टायर, मरजायून और बिंत जबील पर हमले किए — ड्रोन बमबारी, तोपखाने की गोलाबारी और जैतून के बागों में आगजनी। 26 जून का वॉशिंगटन समझौता खतरे में, हिज्बुल्लाह ने पहले ही इसे 'आत्मसमर्पण' कहा था।

मुख्य बातें

इजरायली सेना ने 3 अगस्त को दक्षिणी लेबनान के टायर , मरजायून और बिंत जबील पर हमले किए।
इजरायली ड्रोन ने नबातियेह के अली अल-ताहर पहाड़ी क्षेत्र पर विस्फोटक और आग लगाने वाले हथियार गिराए।
चामा गांव में तोपखाने से गोलाबारी; तैयबे और यारून में जैतून के बाग जलाए गए।
16 अप्रैल के युद्धविराम समझौते का बार-बार उल्लंघन हो रहा है; 26 जून का वॉशिंगटन रूपरेखा समझौता भी दबाव में।
हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने वॉशिंगटन समझौते को 'आत्मसमर्पण' करार दिया था।

इजरायली सेना ने 3 अगस्त को दक्षिणी लेबनान के कई शहरों और गांवों पर व्यापक हमले किए, जिनमें टायर, मरजायून और बिंत जबील प्रमुख रूप से निशाने पर रहे। इन हमलों के साथ 16 अप्रैल को हुए युद्धविराम समझौते का एक बार फिर उल्लंघन हुआ है, और क्षेत्र में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली ड्रोन ने नबातियेह के अली अल-ताहर पहाड़ी क्षेत्र पर विस्फोटक और आग लगाने वाले हथियार गिराए। टायर के निकट स्थित चामा गांव में इजरायली सेना ने तोपों से गोलाबारी की। तैयबे और यारून गांवों में सैनिकों ने जैतून के बागों में आग लगा दी, जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान हुआ।

यह ताजा हिंसा उस घटनाक्रम के बाद सामने आई जब रविवार को हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए। हिज्बुल्लाह का कहना था कि ये कार्रवाइयाँ लेबनान पर लगभग प्रतिदिन हो रहे इजरायली हमलों के जवाब में की गई थीं।

युद्धविराम की पृष्ठभूमि

16 अप्रैल को इजरायल और लेबनान सरकार के बीच एक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य इजरायली प्रशासन और हिज्बुल्लाह के बीच चल रही लड़ाई को विराम देना था। हालाँकि, इस समझौते का कई बार उल्लंघन हो चुका है।

गौरतलब है कि 2 मार्च को दोनों पक्षों के बीच पुनः संघर्ष शुरू हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की हत्या के बाद इजरायल ने जमीनी सैन्य अभियान छेड़ा और दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया।

वॉशिंगटन समझौता और उसकी सीमाएँ

26 जून को दोनों पक्षों ने वॉशिंगटन में अमेरिकी मध्यस्थता में एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत इजरायली सैनिकों को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटना था और उनकी जगह लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती तय की गई थी।

हालाँकि, हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने इस समझौते को इजरायल के सामने 'आत्मसमर्पण' करार दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी लेबनान में इजरायली छिटपुट हमले युद्धविराम के बावजूद जारी रहे हैं।

आम जनता पर असर

टायर, मरजायून और बिंत जबील जैसे शहरों के आसपास के गांवों में रहने वाली आम जनता इन हमलों की सबसे बड़ी शिकार है। जैतून के बागों में लगाई गई आग से कृषि को दीर्घकालिक नुकसान की आशंका है। विस्थापन और बुनियादी ढाँचे की क्षति के कारण मानवीय संकट गहराने की संभावना है।

क्या होगा आगे

विश्लेषकों के अनुसार, वॉशिंगटन समझौते की विश्वसनीयता अब दाँव पर है। यदि इजरायली सेना की वापसी और लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती समयबद्ध तरीके से नहीं हुई, तो क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और अमेरिकी मध्यस्थता की अगली कड़ी पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर लागू नहीं हो पाती। इजरायल का दक्षिणी लेबनान से सैनिक वापसी का वादा और लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती अब तक अधूरी है, जबकि हिज्बुल्लाह ने समझौते को शुरू से ही अस्वीकार किया था। जैतून के बागों को जलाना और गांवों पर आग लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल आर्थिक विनाश की उस रणनीति की ओर इशारा करता है जो सैन्य लक्ष्यों से परे है। मुख्यधारा की कवरेज युद्धविराम उल्लंघनों की गिनती करती है, लेकिन यह नहीं पूछती कि अमेरिकी मध्यस्थता की जवाबदेही तंत्र कहाँ है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के किन इलाकों पर हमले किए?
इजरायली सेना ने टायर, मरजायून और बिंत जबील शहरों के साथ-साथ आसपास के गांवों को निशाना बनाया। नबातियेह के अली अल-ताहर पहाड़ी क्षेत्र पर ड्रोन से बमबारी की गई और चामा गांव में तोपखाने से गोले दागे गए।
इजरायल-लेबनान युद्धविराम समझौता कब हुआ था और क्यों टूट रहा है?
16 अप्रैल को इजरायल और लेबनान सरकार के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था। हालाँकि, इस समझौते का कई बार उल्लंघन हो चुका है क्योंकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में छिटपुट हमले जारी रखे और हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की।
26 जून का वॉशिंगटन समझौता क्या था?
26 जून को दोनों पक्षों ने वॉशिंगटन में अमेरिकी मध्यस्थता में एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत इजरायली सैनिकों को दक्षिणी लेबनान से हटना था और उनकी जगह लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती होनी थी। हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने इसे इजरायल के सामने 'आत्मसमर्पण' बताया था।
हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमले क्यों किए?
हिज्बुल्लाह ने कहा कि रविवार को किए गए उसके हमले लेबनान पर लगभग प्रतिदिन हो रहे इजरायली हमलों के जवाब में थे। संगठन का तर्क है कि युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने हमले बंद नहीं किए।
दक्षिणी लेबनान में आम नागरिकों पर क्या असर पड़ रहा है?
टायर, मरजायून और बिंत जबील के आसपास के गांवों में रहने वाले नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हैं। तैयबे और यारून गांवों में जैतून के बागों को जलाए जाने से किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान हुआ है और विस्थापन की आशंका बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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