19 सितंबर 2026 का पंचांग: राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत का शुभ संयोग, जानें मुहूर्त और राहुकाल
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 19 सितंबर 2026 (शनिवार) का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। उदयातिथि के अनुसार एक साथ दो बड़े धार्मिक पर्व — राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत — का संयोग बन रहा है।
राधा अष्टमी: प्राकट्य दिवस का महत्व
राधा अष्टमी को श्री राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के जानकारों के अनुसार इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से राधा-कृष्ण की आराधना करने से जीवन में प्रेम, सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन विशेष रूप से राधा रानी को सोलह श्रृंगार अर्पित करते हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं।
महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत
इसी शनिवार से 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हो रही है, जो 3 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा। मान्यता के अनुसार इस दिन कलश स्थापना कर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का आगमन होता है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएँ परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं।
सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर सूर्योदय और शाम 6 बजकर 23 मिनट पर सूर्यास्त होगा। चंद्रोदय दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर और चंद्रास्त रात 12 बजकर 11 मिनट पर होगा। इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में रहेगा।
शुभ मुहूर्त और योग
शनिवार को दोपहर लगभग 2 बजकर 29 मिनट तक आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा, इसके पश्चात सौभाग्य योग आरंभ होगा। दिन का सर्वाधिक शुभ समय माने जाने वाला अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अमृत काल शाम 6 बजकर 23 मिनट से रात 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा — यह समय किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है।
राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड — कब बचें
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 20 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 49 मिनट तक, और यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इन अवधियों में नए कार्यों का शुभारंभ वर्जित माना जाता है। इसके अलावा, ज्योतिष के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा — यदि पूर्व दिशा में यात्रा अनिवार्य हो तो विशेष ज्योतिषीय उपाय कर प्रस्थान की सलाह दी जाती है। आने वाले दिनों में भाद्रपद शुक्ल पक्ष आगे बढ़ने के साथ महोत्सव का क्रम जारी रहेगा।