18 अगस्त 2026
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ऑस्ट्रेलिया-जापान रक्षा डील: जापान करेगा हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण ऑस्ट्रेलियाई रेंज में

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ऑस्ट्रेलिया-जापान रक्षा डील: जापान करेगा हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण ऑस्ट्रेलियाई रेंज में

सारांश

ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच रक्षा सहयोग एक नए मोड़ पर है — जापान अब ऑस्ट्रेलियाई मिसाइल रेंज में हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण कर सकेगा। चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह समझौता हिंद-प्रशांत के सामरिक समीकरणों को नई दिशा दे सकता है।

मुख्य बातें

ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 18 अगस्त 2026 को कैनबरा में द्विपक्षीय बैठक की।
प्रस्तावित समझौते के तहत जापान आने वाले दशक में ऑस्ट्रेलिया की मिसाइल परीक्षण रेंज का उपयोग हाइपरसोनिक मिसाइलों सहित विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण के लिए कर सकेगा।
जापानी रक्षा मंत्री कोइजुमी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में स्टैंडऑफ मिसाइल परीक्षण 'बहुत बड़ी घटना' होगी और वार्ता तेज की जाएगी।
जापान से ऑस्ट्रेलिया को पहली मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट इस दशक के भीतर मिलने की उम्मीद है।
यह समझौता चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की पृष्ठभूमि में हिंद-प्रशांत सुरक्षा सहयोग को नया आयाम देता है।

ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच 18 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग समझौते की रूपरेखा सामने आई, जिसके तहत जापान आने वाले दशक में ऑस्ट्रेलिया की मिसाइल परीक्षण रेंज का उपयोग अपने हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम सहित विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण के लिए कर सकेगा। कैनबरा में हुई यह घोषणा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी को एक नए और निर्णायक आयाम तक ले जाती है।

मुख्य घटनाक्रम

ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कैनबरा में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद यह जानकारी साझा की। मार्ल्स ने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत जापान को विभिन्न प्रकार की मिसाइल क्षमताओं के परीक्षण हेतु ऑस्ट्रेलिया की रेंज उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें जापान का हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम विशेष रूप से शामिल है। दोनों पक्ष इस दिशा में एक विस्तारित और औपचारिक व्यवस्था पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं।

जापान की प्रतिक्रिया

जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने इस प्रस्ताव का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'अगर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्स ऑस्ट्रेलिया में हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी स्टैंडऑफ मिसाइलों का टेस्ट लॉन्च कर पाती है, तो यह एक बहुत बड़ी घटना होगी। यही वजह है कि हम इस मकसद को पूरा करने के लिए बातचीत तेज करेंगे।' यह बयान स्पष्ट करता है कि टोक्यो इस समझौते को रणनीतिक दृष्टि से कितना अहम मानता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को तेज़ी से सुदृढ़ कर रहा है। क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में टोक्यो लंबी दूरी की मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियार प्रणालियों पर विशेष ज़ोर दे रहा है। गौरतलब है कि जापान ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 'काउंटर-स्ट्राइक' क्षमता हासिल करने का निर्णय लिया है।

नौसैनिक सहयोग का विस्तार

रक्षा मंत्री मार्ल्स ने यह भी बताया कि जापान से ऑस्ट्रेलिया द्वारा हासिल की जा रही पहली मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट के इस दशक के दौरान सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। यह नौसैनिक अधिग्रहण दोनों देशों के बीच रक्षा-औद्योगिक सहयोग की गहराती जड़ों को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया पहले से ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने रक्षा साझेदारों — विशेषकर अमेरिका और ब्रिटेन के साथ AUKUS ढाँचे के तहत — सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है।

आगे की राह

प्रस्तावित मिसाइल परीक्षण व्यवस्था अभी बातचीत के चरण में है और इसे औपचारिक रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रहेगी। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया-जापान सुरक्षा साझेदारी को केवल समुद्री सहयोग से आगे बढ़ाकर उन्नत मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियार तकनीक के क्षेत्र तक विस्तार देगा — जो हिंद-प्रशांत के सामरिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके सामरिक निहितार्थ कहीं गहरे हैं — जापान दशकों की 'शांतिवादी' रक्षा नीति से बाहर निकलकर आक्रामक मिसाइल क्षमता की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है, और ऑस्ट्रेलिया उसका परीक्षण-स्थल बनने को तैयार है। यह AUKUS और Quad के बाद हिंद-प्रशांत में पश्चिमी-सहयोगी देशों के सैन्य एकीकरण की अगली कड़ी है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्थाएँ क्षेत्र में हथियारों की होड़ को और तेज़ कर सकती हैं, जबकि समर्थक इसे चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के विरुद्ध आवश्यक प्रतिरोध मानते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह सहयोग एक स्थिर सुरक्षा ढाँचा बनाएगा या क्षेत्रीय तनाव को नई ऊँचाई पर ले जाएगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच मिसाइल परीक्षण समझौता क्या है?
यह एक प्रस्तावित रक्षा व्यवस्था है जिसके तहत जापान आने वाले दशक में ऑस्ट्रेलिया की मिसाइल परीक्षण रेंज का उपयोग अपने हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम सहित विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण के लिए कर सकेगा। इसकी घोषणा 18 अगस्त 2026 को कैनबरा में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद की गई।
जापान हाइपरसोनिक मिसाइल क्यों विकसित कर रहा है?
जापान चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम के मद्देनज़र अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बना रहा है। टोक्यो ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए लंबी दूरी की 'काउंटर-स्ट्राइक' क्षमता विकसित करने का निर्णय लिया है।
इस समझौते से ऑस्ट्रेलिया को क्या फ़ायदा होगा?
ऑस्ट्रेलिया को इस व्यवस्था से जापान के साथ उन्नत सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियों में सहयोग का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, जापान से मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट का अधिग्रहण भी इस दशक में होने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के नौसैनिक सहयोग को और मज़बूत करेगा।
मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट क्या है और यह कब मिलेगी?
मोगामी श्रेणी जापान की आधुनिक बहु-भूमिका युद्धपोत श्रृंखला है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के अनुसार, जापान से हासिल की जा रही पहली मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट के इस दशक के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है।
यह समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करेगा?
यह समझौता हिंद-प्रशांत में पश्चिमी-सहयोगी देशों के बढ़ते सैन्य एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आलोचकों का कहना है कि इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ तेज़ हो सकती है, जबकि दोनों देशों की सरकारें इसे चीन और उत्तर कोरिया से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों के विरुद्ध आवश्यक प्रतिरोध मानती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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