स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में माइन स्वीपिंग: जापान की दिलचस्पी क्यों?
सारांश
Key Takeaways
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- जापान की माइन स्वीपिंग में रुचि उसके आर्थिक हितों का संरक्षण करती है।
- माइन स्वीपिंग प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
- इतिहास में माइन स्वीपिंग ऑपरेशनों का महत्व है।
- जापान की जेएमएसडीएफ विश्व में उन्नत माइन-स्वीपिंग क्षमताओं के लिए जानी जाती है।
टोक्यो/नई दिल्ली, २२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जापान के विदेश मंत्री तोषिमित्सु मोटेगी का हालिया बयान एक ऐसे सैन्य ऑपरेशन की ओर इशारा करता है, जो देखने में "सफाई" जैसा प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में यह अत्यधिक खतरनाक और तकनीकी रूप से जटिल है। यहाँ बात हो रही है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में "माइन स्वीपिंग" की — अर्थात् समुद्र में बिछाए गए बारूदी जाल की सफाई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहाँ से वैश्विक तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यहाँ माइंस बिछाई जाती हैं, तो यह केवल एक सैन्य खतरा नहीं होगा, बल्कि यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि जापान ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका-इजरायल व ईरान के बीच संघर्ष में युद्धविराम होता है, तो वह इस जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने के लिए अपने सैन्य संसाधनों से माइंस हटाने पर विचार करेगा।
अब सवाल यह है कि ये "माइन स्वीपिंग" वास्तव में क्या है? समुद्र में बिछाई गई माइंस किसी भी जहाज के लिए छिपे हुए बम की तरह होती हैं। ये कभी टकराने से, कभी जहाज़ के मैग्नेटिक फील्ड से, तो कभी उसकी आवाज से सक्रिय होती हैं। इन्हें हटाने के लिए विशेष जहाज, हेलीकॉप्टर और अब तो पानी के भीतर चलने वाले रोबोट का भी उपयोग किया जाता है।
कुछ मामलों में जहाज पानी में तार खींचते हुए चलते हैं, जो माइंस को पकड़कर उनकी पकड़ तोड़ देता है, जिससे वे सतह पर आ जाती हैं और फिर उन्हें दूर से नष्ट कर दिया जाता है। आधुनिक तकनीक में पहले सोनार से माइंस को खोजा जाता है और फिर रोबोट जाकर उन्हें निष्क्रिय करता है — एक तरह से यह समुद्र के अंदर बम निरोधक दस्ता कार्य करता है।
इतिहास यह दर्शाता है कि यह कोई नया विचार नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान समुद्रों में इतनी बड़ी संख्या में माइंस बिछाई गई थीं कि युद्ध खत्म होने के बाद भी कई वर्षों तक इन्हें हटाने का कार्य चलता रहा। इसी प्रकार, ऑपरेशन एंड स्वीप के तहत अमेरिका ने वियतनाम युद्ध के बाद समुद्री रास्तों को साफ किया था ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
जापान को नौसेना के माइन-स्वीपिंग में एक शीर्ष-स्तरीय विशेषज्ञ माना जाता है। इसकी क्षमताएं विश्व में सर्वोत्तम मानी जाती हैं। एक द्वीपीय राष्ट्र होने के नाते जापान ने एक अत्यंत विशिष्ट मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (जेएमएसडीएफ) का माइन-स्वीपिंग बेड़ा विकसित किया है, जिसे समुद्री मार्गों को खुला रखने के लिए डिजाइन किया गया है।
जापान के पास उन्नत माइन-स्वीपर जहाज हैं। इनमें अवाजी-श्रेणी गहरे पानी में संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, और मोगामी-श्रेणी के फ्रिगेट बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए उन्नत मानवरहित प्रणालियों से लैस हैं।
जापान का यह संकेत इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एक ऊर्जा-निर्भर देश है और उसका बड़ा तेल आयात इसी रास्ते से आता है। ऐसे में यदि यह मार्ग असुरक्षित होता है, तो इसका सीधा असर जापान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए उसका यह कदम केवल सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा भी है।