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कासिम की यूएन में अपील से पाकिस्तान में खलबली, मंत्री का तंज - 'बच्चे ने पढ़ा हुआ सुनाया'

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कासिम की यूएन में अपील से पाकिस्तान में खलबली, मंत्री का तंज - 'बच्चे ने पढ़ा हुआ सुनाया'

सारांश

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के बेटे कासिम की यूएनएचआरसी में की गई अपील ने पाकिस्तान के हुक्मरानों में खलबली मचा दी है। कासिम की बातों को 'बच्चे की गुहार' कहकर खारिज किया जा रहा है। जानिए इस विवाद की गहराई।

मुख्य बातें

कासिम की अपील ने पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल पैदा की है।
हुक्मरान इसे तौहीन मान रहे हैं।
जीएसपी+ फ्रेमवर्क का उल्लेख महत्वपूर्ण है।

इस्लामाबाद, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलवाने की अपील उनके बेटे कासिम ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के मंच से की। उनकी इस मांग ने पाकिस्तान के हुक्मरानों को परेशान कर दिया है। वे इसे अपने देश की तौहीन मान रहे हैं, वहीं कासिम की टिप्पणियों को 'बच्चे की गुहार' बताया जा रहा है।

गुरुवार को सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने पीटीआई पर आरोप लगाया कि राजनीतिक असहमति के बहाने देश की इज्जत को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ये कोशिशें नामंजूर हैं।

कासिम ने बुधवार को कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री के साथ जो बर्ताव किया गया, वह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों और जीएसपी+ फ्रेमवर्क (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज) के तहत किए गए वादों का उल्लंघन है।

असल में, जीएसपी+ फ्रेमवर्क एक विशेष यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार नीति है, जो विकासशील देशों को सतत विकास, मानवाधिकारों और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता के बदले ईयू बाजार में लगभग 66 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की सुविधा प्रदान करती है। कासिम ने इसका जिक्र किया और इसी पर झल्लाहट व्यक्त की जा रही है।

प्रमुख मीडिया आउटलेट डॉन ने बताया कि गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, मंत्री ने कहा कि “हालांकि हर राजनीतिक पार्टी को आलोचना का अधिकार है, लेकिन देश की इज्जत को दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए।”

तरार ने कहा, “कोई भी राजनीतिक नेता पाकिस्तान से बड़ा नहीं है,” उन्होंने पीटीआई पर देश हित को पहले न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “विरोधियों द्वारा देश का मजाक उड़ाना मंजूर नहीं है।”

तरार ने यह भी याद दिलाया कि पीटीआई ने पहले भी ऐसे कार्य किए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीटीआई ने “इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) को खत लिखकर यह अपील की थी कि पाकिस्तान को 2022 में बेलआउट पैकेज न दिया जाए।”

कासिम के भाषण का जिक्र करते हुए, मंत्री ने कहा कि “यह कोई एक बार की घटना नहीं थी — काश उसने बिना कागज के ऐसा किया होता, लेकिन कोई बात नहीं, वो बच्चा है। किसी ने उसके लिए यह लिखकर दिया होगा।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति को भी उजागर करता है। हुक्मरानों का बौखलाना एक संकेत है कि देश में असहमति की आवाजें अब और भी मुखर हो रही हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कासिम ने यूएन में क्या कहा?
कासिम ने अपने पिता इमरान खान से मुलाकात कराने की गुहार लगाई और बताया कि उनके साथ किया गया बर्ताव मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
पाकिस्तान के मंत्री ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मंत्री अताउल्लाह तरार ने इसे 'बच्चे की गुहार' कहते हुए खारिज किया और पीटीआई पर देश की इज्जत को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
जीएसपी+ फ्रेमवर्क क्या है?
जीएसपी+ एक विशेष यूरोपीय संघ व्यापार नीति है, जो विकासशील देशों को मानवाधिकारों और सुशासन के लिए शून्य टैरिफ की सुविधा देती है।
राष्ट्र प्रेस
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