केन्या: नारोक सोने की खदान ढही, 5 खनिकों की मौत; किलिमापेसा में बचाव अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
नारोक काउंटी (दक्षिण-पश्चिमी केन्या) में 22 जुलाई 2026 को किलिमापेसा स्थित एक सोने की खदान की सुरंग ढह जाने से कम से कम पाँच खनिकों की मौत हो गई। अधिकारियों ने मृतकों की पुष्टि की है और कई अन्य खनिकों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
हादसे का कारण और मुख्य घटनाक्रम
नारोक काउंटी के पुलिस कमांडर पैट्रिक लोबोलिया ने बताया कि भारी बारिश के बाद खदान की सुरंग अचानक ढह गई, जिससे कई खनिक भूमिगत हो गए। उन्होंने कहा, "बचाव दल मौके पर मौजूद हैं और उन लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके अभी भी अंदर फंसे होने की संभावना है।" कुछ खनिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और उन्हें नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए भेजा गया है।
बचाव अभियान में बाधाएँ
लोबोलिया ने बताया कि विशेष भूमिगत खोज उपकरणों और कैमरों की कमी के चलते बचाव कार्य धीमी गति से चल रहा है। किलिमापेसा क्षेत्र में तलाशी एवं राहत अभियान जारी है, लेकिन विशेषज्ञ खनन उपकरणों के अभाव में टीमें मुश्किलों का सामना कर रही हैं। किलिमापेसा, नारोक शहर से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और यहाँ केन्या की सबसे बड़ी व्यावसायिक सोने की खदान संचालित होती है।
केन्या के खनन क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताएँ
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब केन्या के सोना खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में खदानों में हुई दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की जान जा चुकी है। खनन क्षेत्र से जुड़े संगठनों और स्थानीय निवासियों ने सरकार से सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने और बेहतर मानक अपनाने की माँग की है।
आम जनता और खनिकों पर असर
केन्या में हज़ारों छोटे स्तर के खनिक सोने की खुदाई पर आजीविका के लिए निर्भर हैं। सोना-उत्पादक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अनियमित और असुरक्षित खनन प्रचलित है, जो इस तरह की दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बनता है। आलोचकों का कहना है कि नियामक निगरानी की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता खनिकों की जान को लगातार खतरे में डालती है।
आगे क्या
बचाव अभियान अभी जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार विशेष उपकरण मँगाने की कोशिश की जा रही है। इस घटना के बाद केन्या सरकार पर खनन सुरक्षा नीति की समीक्षा का दबाव और बढ़ने की संभावना है।