बन्नू मुठभेड़: पुलिस-बंदूकधारी संघर्ष में 13 की मौत, 4 पुलिसकर्मी घायल
सारांश
मुख्य बातें
खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में 23 मई 2026 को पुलिस और हथियारबंद बंदूकधारियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में 13 लोगों की मौत हो गई और 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह संघर्ष मिरयान तहसील के बराकजई अखुंदखेल इलाके में शनिवार को पुलिस पीस कमिटी और हथियारबंदों के बीच छिड़ा।
मुठभेड़ का घटनाक्रम
जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) यासिर अफरीदी ने बताया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान 12 बंदूकधारियों को मार गिराया गया। इसके अलावा एक पूर्व पुलिसकर्मी भी इस गोलीबारी में मारा गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दल के पुलिस स्टेशन पहुँचने से पहले ही हमलावरों ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी थीं।
बन्नू मेडिकल टीचिंग इंस्टीट्यूशन के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि मृत पूर्व पुलिसकर्मी को जिला मुख्यालय अस्पताल लाया गया था और उसकी पहचान फेडरल कॉन्स्टेबुलरी के सेवानिवृत्त कर्मी के रूप में हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बराकजई इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बराकजई इलाके में बड़ी संख्या में हथियारबंद सक्रिय हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान सरकार इन हमलों के लिए कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को ज़िम्मेदार ठहराती रही है।
गौरतलब है कि इस घटना से एक दिन पहले खैबर जिले की बारा तहसील में अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में एक पुलिस अधिकारी घायल हुआ था।
हाल के हमलों की पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में आई है जब खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। 10 मई को बन्नू के फतेह खेल पुलिस पोस्ट पर हुए आत्मघाती हमले में 15 पुलिसकर्मियों की जान गई थी, जिसके बाद इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान को कड़ा विरोध पत्र जारी किया था।
12 मई को लक्की मरवत इलाके में हुए बम धमाके में 2 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों सहित 9 लोगों की मौत हुई और 33 घायल हुए। इसी सप्ताह लोअर साउथ वजीरिस्तान के वाना क्षेत्र में विस्फोट में एक कबायली प्रमुख सहित 3 लोगों की जान गई।
व्यापक विद्रोह की स्थिति
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पिछले कई वर्षों से सशस्त्र विद्रोह की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। बलोच आबादी पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ विभिन्न मंचों से आवाज़ उठाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों पर बढ़ते हमले इस क्षेत्र में राज्य की पकड़ को कमज़ोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
बन्नू में ताज़ा मुठभेड़ इस बात का संकेत है कि खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा संकट अभी थमा नहीं है और आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं।