लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन वाशिंगटन पहुंचे, ट्रंप से हिज्बुल्लाह निरस्त्रीकरण और इजरायली वापसी पर होगी बात
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के राष्ट्रपति जनरल जोसेफ आउन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के औपचारिक निमंत्रण पर 19 जुलाई 2026 को वाशिंगटन पहुंचे। यह यात्रा लगभग 20 वर्षों में किसी लेबनानी राष्ट्राध्यक्ष की पहली व्हाइट हाउस यात्रा है। दोनों नेताओं के बीच हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनान से इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करने की रूपरेखा पर केंद्रित वार्ता होनी है।
वाशिंगटन आगमन और स्वागत समारोह
लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा की कि राष्ट्रपति जोसेफ आउन और फर्स्ट लेडी नायमा आउन एंड्रयूज एयर फोर्स बेस पर उतरे, जहाँ अमेरिकी अधिकारियों ने उनका औपचारिक स्वागत किया। स्वागत करने वालों में अमेरिकी राज्य विभाग की प्रोटोकॉल प्रमुख, बेस कमांडर, अमेरिका में लेबनान की राजदूत नाडा हरदिनी मालूफ, संयुक्त राष्ट्र में लेबनानी मिशन के प्रमुख राजदूत अहमद अराफा, मिलिट्री अटैची ब्रिगेडियर जनरल ओलिवियर हकमेह, कॉन्सुल वासिम बुट्रोस और वाशिंगटन मिडिल ईस्ट स्टेशन चीफ अदीब अल-कोसी शामिल थे।
आगमन के बाद राष्ट्रपति आउन और उनके प्रतिनिधिमंडल ने आधिकारिक आवास पर विश्राम किया। वहाँ उन्होंने दूतावास के राजनयिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की और अमेरिका में रह रहे लेबनानी समुदाय की स्थिति तथा यात्रा से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
मुख्य बैठकों का कार्यक्रम
राष्ट्रपति आउन की आधिकारिक बैठकों की शुरुआत सोमवार (स्थानीय समय) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ होगी। इसके बाद मंगलवार दोपहर से पहले व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनका औपचारिक स्वागत करेंगे — यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। इसके अलावा, आउन अमेरिकी सीनेट के कई सदस्यों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी अलग-अलग बैठकें करेंगे।
वार्ता का केंद्र: हिज्बुल्लाह और इजरायली वापसी
इस दौरे का सबसे अहम एजेंडा हिज्बुल्लाह के हथियार डालने और दक्षिण लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की ठोस योजना तैयार करना है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में युद्धविराम की स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि लेबनान और इजरायल के बीच नवंबर 2024 में युद्धविराम हुआ था, लेकिन ज़मीन पर उसके क्रियान्वयन को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है।
राष्ट्रपति आउन की पृष्ठभूमि भी इस वार्ता को विशेष महत्व देती है — वे राष्ट्रपति चुने जाने से पहले लेबनानी सशस्त्र बलों के कमांडर रह चुके हैं, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। इससे उनकी वाशिंगटन में विश्वसनीयता और वार्ता की गहराई दोनों बढ़ती हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
यह यात्रा इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि लगभग दो दशकों बाद कोई लेबनानी राष्ट्राध्यक्ष व्हाइट हाउस पहुंचा है। लेबनान लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और हिज्बुल्लाह के प्रभाव से जूझता रहा है। आउन की यह यात्रा लेबनान की नई सरकार के अमेरिका के साथ संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरे के नतीजे मध्य-पूर्व की व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। यदि हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और इजरायली वापसी पर कोई ठोस रूपरेखा बनती है, तो यह लेबनान की संप्रभुता बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। दौरे के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान पर सभी की नज़रें टिकी हैं।