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मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू की सार्क पुनर्सक्रियता की अपील, 43 देशों के राजनयिकों के सामने रखा क्षेत्रीय सहयोग का एजेंडा

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मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू की सार्क पुनर्सक्रियता की अपील, 43 देशों के राजनयिकों के सामने रखा क्षेत्रीय सहयोग का एजेंडा

सारांश

मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने गणतंत्र दिवस पर 43 देशों के राजनयिकों के सामने सार्क को पुनर्जीवित करने की अपील की और मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव रखा। बांग्लादेश ने भी ठोस कदमों के साथ समर्थन जताया। लेकिन असली सवाल यह है कि भारत-पाकिस्तान गतिरोध के बिना सुलझे क्या सार्क वाकई लौट सकता है?

मुख्य बातें

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 27 जुलाई 2025 को माले में सार्क पुनर्सक्रियता की अपील की।
मुइज्जू ने सार्क के गतिरोध को समाप्त करने में मालदीव की मध्यस्थ भूमिका की पेशकश की।
समारोह में 43 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 113 राजनयिक उपस्थित थे।
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और मंत्रिपरिषद के विशेष सत्र का प्रस्ताव रखा।
सार्क में 8 सदस्य देश हैं; पाकिस्तान द्वारा सीमापार आतंकवाद के कारण संगठन वर्षों से निष्क्रिय है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 27 जुलाई 2025 को माले में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क/दक्षेस) को पुनः सक्रिय करने का आह्वान किया। उन्होंने सभी सदस्य देशों से क्षेत्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की। आजादी के 61 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस समारोह में 43 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 113 राजनयिक उपस्थित थे।

मुइज्जू का सार्क पर स्पष्ट संदेश

राष्ट्रपति मुइज्जू ने सार्क के भीतर मौजूदा गतिरोध का सीधा उल्लेख करते हुए कहा कि मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मालदीव इस गतिरोध को समाप्त करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सार्क का अंतिम शिखर सम्मेलन एक दशक से अधिक समय पहले आयोजित हुआ था।

बांग्लादेश का समर्थन और ठोस प्रस्ताव

जुलाई की शुरुआत में बांग्लादेश ने भी दक्षिण एशियाई सहयोग को गहरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई थी। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने सार्क को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम सुझाए। उन्होंने कहा, 'संगठन को मजबूत क्रियान्वयन क्षमता, अधिक वित्तीय सुदृढ़ता, अधिक प्रभावी विशेषीकृत तंत्र और अनुवर्ती कार्रवाई की व्यावहारिक संस्कृति की आवश्यकता है।' मंत्री ओबैद ने यह भी बताया कि बांग्लादेश वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाने और मंत्रिपरिषद के विशेष सत्र की संभावना पर विचार कर रहा है।

सार्क का गतिरोध: पृष्ठभूमि

सार्क एक क्षेत्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक संगठन है जिसमें आठ सदस्य देश शामिल हैं — भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका। संगठन का उद्देश्य पूरे दक्षिण एशिया में आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय एकीकरण और विकास को बढ़ावा देना है। हालाँकि, हाल के वर्षों में यह संगठन व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इसका प्रमुख कारण पाकिस्तान द्वारा सीमापार आतंकवाद को प्रश्रय देना रहा है, जिसके चलते भारत ने सार्क शिखर सम्मेलन में भाग लेने से इनकार कर दिया था।

विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संदेश

राष्ट्रपति मुइज्जू ने इस अवसर पर मालदीव की विदेश नीति के प्रमुख बिंदुओं को भी विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि विवादों को शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से सुलझाया जाए। गौरतलब है कि मुइज्जू सरकार ने सत्ता में आने के बाद से क्षेत्रीय संतुलन की नीति अपनाई है और विभिन्न देशों के साथ संबंध सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं।

आगे की राह

मालदीव और बांग्लादेश की ओर से आई इन पहलों ने दक्षिण एशियाई कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत-पाकिस्तान के बीच मूलभूत मतभेद नहीं सुलझते, सार्क की पुनर्सक्रियता व्यावहारिक रूप से कठिन बनी रहेगी। आने वाले महीनों में बांग्लादेश की प्रस्तावित वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बुनियादी गतिरोध को नज़रअंदाज़ करता है जो भारत-पाकिस्तान तनाव की देन है — एक ऐसी समस्या जिसे माले से हल नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश के ठोस प्रस्ताव प्रक्रियागत रूप से सही हैं, परंतु बिना भारत की सक्रिय भागीदारी के ये केवल कागज़ी पहल बनकर रह सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण तेज़ हो रहा है और चीन का प्रभाव दक्षिण एशिया में बढ़ रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि सार्क का पुनरुद्धार केवल इच्छाशक्ति का नहीं, बल्कि भारत-पाकिस्तान के बीच न्यूनतम विश्वास-निर्माण का मामला है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने सार्क पर क्या अपील की?
राष्ट्रपति मुइज्जू ने 27 जुलाई 2025 को माले में सार्क सदस्य देशों से वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की और मालदीव को इस गतिरोध में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार बताया। यह बयान आजादी के 61 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गणतंत्र दिवस समारोह में दिया गया।
सार्क (दक्षेस) क्यों निष्क्रिय हो गया है?
सार्क का अंतिम शिखर सम्मेलन एक दशक से अधिक समय पहले हुआ था। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा सीमापार आतंकवाद को प्रश्रय देने के कारण भारत ने सार्क शिखर सम्मेलन में भाग लेने से इनकार किया, जिससे संगठन व्यावहारिक रूप से ठप हो गया।
बांग्लादेश ने सार्क पुनर्सक्रियता के लिए क्या प्रस्ताव रखे?
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा कि संगठन को मजबूत क्रियान्वयन क्षमता, वित्तीय सुदृढ़ता और प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई संस्कृति की जरूरत है। बांग्लादेश वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और मंत्रिपरिषद के विशेष सत्र की संभावना पर विचार कर रहा है।
सार्क में कितने सदस्य देश हैं और इसका उद्देश्य क्या है?
सार्क में आठ सदस्य देश हैं — भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय एकीकरण और विकास को बढ़ावा देना है।
मुइज्जू के इस बयान का क्षेत्रीय कूटनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
मालदीव और बांग्लादेश की एकजुट पहल ने दक्षिण एशियाई कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू की है। हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत-पाकिस्तान के बीच मूलभूत मतभेद नहीं सुलझते, सार्क की वापसी व्यावहारिक रूप से कठिन बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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