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मनीला एआरएफ बैठक में भारत का जोर: इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था और संवाद अनिवार्य

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मनीला एआरएफ बैठक में भारत का जोर: इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था और संवाद अनिवार्य

सारांश

मनीला में एआरएफ की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया — इंडो-पैसिफिक में स्थिरता के लिए संवाद और नियम-आधारित व्यवस्था ज़रूरी है, न कि गुटबंदी। भारत का यह लचीला रुख उसे दक्षिण-पूर्व एशिया में एक विश्वसनीय और स्वीकार्य भागीदार बनाता है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय (पूर्वी मामले) के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने 9 जून 2026 को मनीला में एआरएफ की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
बैठक में इंडो-पैसिफिक में 'ग्लोबल कॉमन्स' की सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने पर सहमति बनी।
भारत ने भू-राजनीतिक चुनौतियों के समाधान में बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
पूर्व राजनयिक रघु गुरुराज के अनुसार, भारत का समावेशी और गुट-निरपेक्ष दृष्टिकोण आसियान की रणनीतिक प्राथमिकताओं से मेल खाता है।
भारत ईस्ट एशिया समिट , एआरएफ और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस में नियमित रूप से सक्रिय भागीदार है।

विदेश मंत्रालय (पूर्वी मामले) के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने 9 जून 2026 को मनीला में आयोजित आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था की रक्षा और साझा वैश्विक हितों ('ग्लोबल कॉमन्स') को सुरक्षित रखने पर सहमति बनी। टंडन ने मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में एआरएफ की भूमिका को निर्णायक बताते हुए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

बैठक में क्या हुआ

मनीला में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागी देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि इंडो-पैसिफिक में स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुपक्षीय सहयोग और नियम-आधारित ढाँचे को मज़बूत करना आवश्यक है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह किसी एक गुट के बजाय समावेशी क्षेत्रीय व्यवस्था का समर्थक है।

भारत का आसियान के प्रति दृष्टिकोण

भारत लंबे समय से आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थक रहा है और गठबंधन-आधारित दृष्टिकोण से दूरी बनाए रखता है। भारत ईस्ट एशिया समिट, एआरएफ और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस जैसे मंचों पर नियमित रूप से सक्रिय भागीदारी निभाता आया है। यह जुड़ाव 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत भारत की व्यापक रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

पूर्व भारतीय राजनयिक रघु गुरुराज ने 'इंडियन नैरेटिव' में लिखा कि भारत का जुड़ाव तेज़ी से आसियान की उस पसंद के अनुरूप हो रहा है, जिसमें समावेशी और किसी खास गुट से न बंधे क्षेत्रीय ढाँचे को प्राथमिकता दी जाती है। गुरुराज के अनुसार, आसियान की रणनीतिक सोच में सख्त भू-राजनीतिक गुटों के बजाय संतुलन, आपसी संवाद और बहु-पक्षीय तालमेल को अहमियत दी जाती है।

गुरुराज ने यह भी कहा कि भारत का लचीला और किसी पर कुछ थोपने से बचने वाला रवैया उसे दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ स्वाभाविक रूप से जोड़ता है और बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न दुविधाओं की आशंका को भी समाप्त करता है।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच आसियान देश अपनी स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय, गैर-वर्चस्ववादी भागीदार के रूप में अपनी पहचान को और मज़बूत करना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह 'संवाद-केंद्रित' दृष्टिकोण दक्षिण चीन सागर जैसे ठोस विवादों में भी प्रभावी साबित होगा। आसियान देश स्वयं 'रणनीतिक अस्पष्टता' की नीति अपनाते हैं और बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना उनकी मजबूरी है। भारत का गुट-निरपेक्ष रुख उसे स्वीकार्य तो बनाता है, पर प्रभावशाली बनाने के लिए आर्थिक और सामरिक उपस्थिति में भी उतनी ही वृद्धि ज़रूरी है। बिना ठोस क्षेत्रीय निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के, कूटनीतिक सक्रियता केवल प्रतीकात्मक बनकर रह सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीला में एआरएफ की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारत ने क्या रुख अपनाया?
भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने और भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए बातचीत व कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने किया।
आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) क्या है और भारत इसमें क्यों भाग लेता है?
एआरएफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक प्रमुख बहुपक्षीय सुरक्षा संवाद मंच है, जहाँ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होती है। भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत इस मंच पर सक्रिय रहता है और आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है।
भारत का इंडो-पैसिफिक में दृष्टिकोण अन्य बड़ी शक्तियों से कैसे अलग है?
भारत गठबंधन-आधारित या किसी एक गुट के दृष्टिकोण के बजाय समावेशी और बहु-पक्षीय ढाँचे को प्राथमिकता देता है। पूर्व राजनयिक रघु गुरुराज के अनुसार, यह रवैया भारत को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ स्वाभाविक रूप से जोड़ता है।
इस बैठक में 'ग्लोबल कॉमन्स' पर क्या सहमति बनी?
बैठक में प्रतिभागी देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि इंडो-पैसिफिक में साझा वैश्विक हितों ('ग्लोबल कॉमन्स') की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।
भारत आसियान के किन-किन मंचों में सक्रिय रूप से भाग लेता है?
भारत ईस्ट एशिया समिट, आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस में नियमित रूप से सक्रिय भागीदारी निभाता है। ये सभी मंच भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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