30 जून 2026
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रो खन्ना का USISPF समिट में बड़ा बयान: भारत-अमेरिका संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिके होने चाहिए

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रो खन्ना का USISPF समिट में बड़ा बयान: भारत-अमेरिका संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिके होने चाहिए

सारांश

USISPF मंच पर रो खन्ना ने साफ़ कहा — भारत-अमेरिका रिश्ता सिर्फ रक्षा सौदों और व्यापार का खेल नहीं हो सकता। ट्रंप की नीतियों पर तीखे हमले के साथ उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को इस साझेदारी की असली बुनियाद बताया।

मुख्य बातें

रो खन्ना ने 30 जून 2026 को USISPF लीडरशिप समिट, वाशिंगटन में भारत-अमेरिका संबंध पर अपना विज़न रखा।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी रक्षा और व्यापार से आगे बढ़कर साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश और इमिग्रेशन नीतियों को अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता के लिए खतरा बताया।
शीर्ष एआई शोधकर्ताओं में 38% चीनी मूल के और 72% के पास विदेशी डिग्री — इमिग्रेशन प्रतिबंधों को तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए नुकसानदेह बताया।
खन्ना ने दावा किया कि डेमोक्रेट्स 2026 और 2028 के चुनाव जीतेंगे।
खन्ना 2017 से कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

डेमोक्रेटिक कांग्रेसमैन रो खन्ना ने 30 जून 2026 को वाशिंगटन में आयोजित अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को केवल रक्षा सौदों और व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं रहना चाहिए — इसकी नींव दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर होनी चाहिए। कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले खन्ना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति और इमिग्रेशन नीति की कड़ी आलोचना करते हुए यह संदेश दिया।

ट्रंप नीति पर सीधा हमला

खन्ना ने अपने संबोधन का बड़ा हिस्सा ट्रंप प्रशासन के एकतरफा व्यापार निर्णयों और इमिग्रेशन प्रतिबंधों की आलोचना में लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों ने वैश्विक मंच पर अमेरिका की विश्वसनीयता को कमज़ोर किया है। उन्होंने कहा, "हमें दुनिया भर में अपने संबंध फिर से बनाने होंगे। अमेरिकी नेताओं की अगली पीढ़ी को विदेश में देश की विश्वसनीयता वापस लानी होगी।"

खन्ना ने राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट की मूल्य-आधारित विदेश नीति की तुलना ट्रंप के ट्रांजैक्शनल दृष्टिकोण से की और तर्क दिया कि अमेरिका की असली पहचान डीकोलोनाइज़ेशन, आज़ादी और मानवाधिकार के समर्थन में रही है।

भारत-अमेरिका संबंध का खन्ना का विज़न

आलोचना के साथ-साथ खन्ना ने भारत-अमेरिका संबंध के लिए अपना दीर्घकालिक विज़न भी रखा। उन्होंने कहा, "एक भारतीय-अमेरिकी के तौर पर मेरी उम्मीद है कि जब हम अमेरिका-भारत संबंध के बारे में बात करते हैं, तो हम रक्षा, आर्थिक और निवेश संबंधों से आगे बढ़कर बात करें। आइए बात करते हैं कि हमारे सबसे ऊंचे मूल्यों — यहाँ और दुनिया भर में मानवीय स्वतंत्रता को फलते-फूलते देखने के मूल्यों — के हिसाब से संबंध को कैसा होना चाहिए।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह किसी अंध गठबंधन का समर्थन नहीं, बल्कि उन साझेदारों के साथ जुड़ाव है जो सभ्यता और मानवता के साझा मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग गहरा कर रहे हैं।

इमिग्रेशन नीति और तकनीकी प्रतिस्पर्धा

खन्ना ने ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों को अमेरिका की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि शीर्ष एआई शोधकर्ताओं में से 38 फीसदी चीनी मूल के हैं और 72 फीसदी के पास विदेशी डिग्री है। उनके अनुसार, "यह एक ऐसे राष्ट्रपति हैं जो यह नहीं समझते कि हमें प्रतिभाशाली लोगों को नियुक्त करने की ज़रूरत है, टैलेंट को दूर करने की नहीं।"

सिलिकॉन वैली का प्रतिनिधित्व करने वाले खन्ना 2017 से अमेरिकी कांग्रेस के सबसे प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सदस्यों में गिने जाते हैं और नवाचार तथा उच्च प्रौद्योगिकी में भारत-अमेरिका सहयोग के मुखर समर्थक रहे हैं।

व्यक्तिगत प्रेरणा और डेमोक्रेटिक पार्टी का भविष्य

खन्ना ने अपनी जड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें अपने दादा से प्रेरणा मिली, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लोकतांत्रिक आदर्शों ने ही उनके माता-पिता सहित अप्रवासियों की अनेक पीढ़ियों को इस देश में घर बनाने के लिए प्रेरित किया।

राजनीतिक भविष्यवाणी करते हुए खन्ना ने दावा किया, "डेमोक्रेट्स 2026 में पक्के तौर पर जीतेंगे और हम 2028 में जीतेंगे।" उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका ने बार-बार उथल-पुथल के बाद खुद को पुनर्स्थापित किया है और उसकी नियति दुनिया का पहला एकजुट, बहु-नस्लीय लोकतंत्र बनना है।

आगे की राह

खन्ना के इस भाषण ने USISPF मंच पर भारत-अमेरिका संबंध की दिशा पर एक नई बहस छेड़ दी है। उनका मुख्य संदेश यह था कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की मज़बूती अंततः स्वतंत्रता, बहुलवाद और आत्मनिर्णय के प्रति प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी — न कि केवल रणनीतिक या आर्थिक गणनाओं पर।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि 'साझा मूल्यों' की परिभाषा दोनों देश एक-दूसरे के लिए कितनी अलग-अलग रखते हैं।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रो खन्ना ने USISPF समिट में भारत-अमेरिका संबंध पर क्या कहा?
रो खन्ना ने 30 जून 2026 को वाशिंगटन में USISPF लीडरशिप समिट में कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को रक्षा, व्यापार और निवेश से आगे बढ़कर साझा लोकतांत्रिक मूल्यों — स्वतंत्रता, बहुलवाद और आत्मनिर्णय — पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने इसे किसी अंध गठबंधन का नहीं, बल्कि मूल्य-प्रतिबद्ध साझेदारी का मामला बताया।
रो खन्ना ने ट्रंप की किन नीतियों की आलोचना की?
खन्ना ने ट्रंप प्रशासन की एकतरफा व्यापार नीतियों और इमिग्रेशन प्रतिबंधों की आलोचना की। उनका कहना था कि इन नीतियों ने वैश्विक मंच पर अमेरिका की विश्वसनीयता को कमज़ोर किया है और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में शीर्ष विदेशी प्रतिभाओं को अमेरिका से दूर किया है।
रो खन्ना कौन हैं और भारत से उनका क्या संबंध है?
रो खन्ना 2017 से कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट (सिलिकॉन वैली) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अमेरिकी कांग्रेस के सबसे प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सदस्यों में गिने जाते हैं। वे हिंदू धर्म का पालन करते हैं और उनके दादा ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था।
इमिग्रेशन नीति और एआई प्रतिस्पर्धा पर खन्ना का क्या तर्क था?
खन्ना ने कहा कि शीर्ष एआई शोधकर्ताओं में 38 फीसदी चीनी मूल के हैं और 72 फीसदी के पास विदेशी डिग्री है। उनके अनुसार ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियाँ ऐसे समय में वैश्विक प्रतिभाओं को अमेरिका से दूर कर रही हैं जब तकनीक के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा सबसे तीव्र है।
खन्ना ने 2026 और 2028 के अमेरिकी चुनावों के बारे में क्या दावा किया?
खन्ना ने दावा किया कि डेमोक्रेट्स 2026 के मध्यावधि चुनाव और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव जीतेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बार-बार राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के बाद खुद को पुनर्स्थापित किया है और उसकी नियति दुनिया का पहला एकजुट, बहु-नस्लीय लोकतंत्र बनना है।
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