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मोदी का इंडोनेशिया दौरा: 20 समझौते, ब्रह्मोस विस्तार और भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का नया अध्याय

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मोदी का इंडोनेशिया दौरा: 20 समझौते, ब्रह्मोस विस्तार और भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का नया अध्याय

सारांश

मोदी की जकार्ता यात्रा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी — यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक पुनर्स्थापना थी। ब्रह्मोस विस्तार, अस्त्र मिसाइल सौदा और सबांग बंदरगाह समझौते के साथ, भारत-इंडोनेशिया की 2018 की व्यापक साझेदारी अब ठोस रक्षा और समुद्री आयाम ले रही है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 8 जुलाई 2026 को जकार्ता राजकीय यात्रा के दौरान 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खेप बढ़ाने और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने पर सहमति जताई।
रणनीतिक सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास के लिए समझौता अंतिम रूप दिया गया।
भारत इंडोनेशिया के 2029 चुनावों के लिए कस्टम EVM विकसित करने में सहायता करेगा।
दोनों देशों ने ION डिजिटल नेटवर्क लॉन्च करने की घोषणा की।
मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 जुलाई 2026 को अपनी जकार्ता राजकीय यात्रा के मुख्य क्षणों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया और भारत-इंडोनेशिया संबंधों को 'मजबूत और जीवंत' बताया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 20 व्यापक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें रक्षा, डिजिटल तकनीक और बंदरगाह विकास जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं।

यात्रा के प्रमुख क्षण

मोदी द्वारा साझा किए गए 5 मिनट 13 सेकंड के वीडियो में उनका औपचारिक स्वागत, इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान ग्रहण करने का दृश्य, इंडोनेशिया की संसद में उनका संबोधन और भारतीय समुदाय की ओर से मिला उत्साहपूर्ण स्वागत शामिल था। वीडियो की शुरुआत में बच्चे एक साथ 'वेलकम मोदी जी' कहते दिखे।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, 'भारत-इंडोनेशिया की दोस्ती मजबूत और जीवंत है।' उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो का आभार व्यक्त करते हुए कहा, 'मैं इस गर्वजोशी भरे स्वागत के लिए अपने मित्र राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मुझे विश्वास है कि आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा।'

रक्षा सहयोग में बड़ा विस्तार

रक्षा क्षेत्र में इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। इंडोनेशिया ने भारत में निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की अपनी खेप बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त, जकार्ता ने भारत की स्वदेशी अस्त्र बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का निर्णय लिया, जिसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा इंडोनेशिया के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों में एकीकृत किया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा निर्यात क्षमता को तेज़ी से बढ़ा रहा है और दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक उपस्थिति को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि 2018 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित हुई थी, और यह यात्रा उस ढाँचे को नई ऊँचाई पर ले जाती है।

बंदरगाह विकास और डिजिटल साझेदारी

दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया। हिंद महासागर के प्रवेश द्वार पर स्थित यह बंदरगाह भारत के समुद्री हितों के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने ION (India-Indonesia Online Network) के शुभारंभ की घोषणा की। इसके साथ ही, भारत इंडोनेशिया के 2029 के आम चुनावों के लिए वहाँ की ज़रूरत के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में इंडोनेशिया के चुनाव आयोग की सहायता करेगा।

साझेदारी का व्यापक संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा, 'मुझे बहुत स्नेह और आदर के साथ इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। यह सम्मान कोटि-कोटि भारतवासियों, इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं और भारत-इंडोनेशिया के ऐतिहासिक व आत्मीय संबंधों का है।' उन्होंने यह भी कहा कि जब दोनों देश साथ खड़े होते हैं, तो दुनिया का लोकतंत्र में विश्वास और मज़बूत होता है।

मोदी ने 'सबका साथ-सबका विकास' के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपने साझेदारों के साथ मिलकर नए अवसर बनाता है। इस यात्रा के साथ भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय संबंध रक्षा, डिजिटल और समुद्री क्षेत्रों में एक नए स्तर पर पहुँच गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रक्षा आपूर्तिकर्ता की भूमिका में आना चाहता है — यह 'मेक इन इंडिया' की असली परीक्षा है। सबांग बंदरगाह समझौता हिंद-प्रशांत में भारत की समुद्री रणनीति का अहम हिस्सा है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर उपस्थिति सुनिश्चित करता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे बड़े रक्षा सौदों की वास्तविक डिलीवरी टाइमलाइन और वित्तीय ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। EVM सहयोग एक नई और दिलचस्प पहल है जो भारत की लोकतांत्रिक तकनीक को वैश्विक मंच पर ले जाने की कोशिश को दर्शाती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की इंडोनेशिया यात्रा में कौन-कौन से प्रमुख समझौते हुए?
इस यात्रा में भारत और इंडोनेशिया ने 20 व्यापक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल विस्तार, अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल खरीद, सबांग बंदरगाह का संयुक्त विकास और ION डिजिटल नेटवर्क लॉन्च शामिल हैं। भारत इंडोनेशिया के 2029 चुनावों के लिए EVM विकसित करने में भी सहायता करेगा।
इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल और अस्त्र मिसाइल क्यों खरीद रहा है?
इंडोनेशिया ने अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए भारत निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खेप बढ़ाने और अस्त्र बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का निर्णय लिया है। अस्त्र मिसाइलों को भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा इंडोनेशिया के सुखोई-30 विमानों में लगाया जाएगा।
सबांग बंदरगाह समझौता भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
सबांग बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके संयुक्त विकास से भारत को इस समुद्री मार्ग पर उपस्थिति मिलेगी, जो उसकी इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए अहम है।
भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी कब बनी थी?
भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी 2018 में स्थापित हुई थी। PM मोदी की 8 जुलाई 2026 की जकार्ता यात्रा ने इस साझेदारी को रक्षा, डिजिटल और समुद्री क्षेत्रों में नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।
मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान क्यों दिया गया?
इंडोनेशिया ने PM मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया, जो दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को मान्यता देता है। मोदी ने इसे 'कोटि-कोटि भारतवासियों और इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं का सम्मान' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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