मोदी-ताकाइची शिखर वार्ता: चीन की आक्रामकता और उत्तर कोरिया पर भारत-जापान की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता के बाद पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में बढ़ती आक्रामक गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई। दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में स्पष्ट किया कि वे किसी भी एकतरफा कदम का कड़ा विरोध करते हैं जो समुद्री एवं हवाई आवाजाही की स्वतंत्रता को खतरे में डाले या बल-प्रयोग से यथास्थिति बदलने की कोशिश करे।
मुख्य घटनाक्रम
नई दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने विवादित समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते सैन्यीकरण पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बयान में कहा गया कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से और यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) के प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव के नए केंद्र उभर रहे हैं और प्रमुख लोकतांत्रिक देश अपनी समन्वित स्थिति स्पष्ट करने पर बल दे रहे हैं।
उत्तर कोरिया और परमाणु निरस्त्रीकरण
दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर भी कड़ी चिंता जताई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुसार उत्तर कोरिया को पूर्ण परमाणु-मुक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों — जिनमें उत्तर कोरिया को हथियार भेजने या वहाँ से खरीदने पर रोक शामिल है — का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। अपहरण मामलों के शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
म्यांमार और मध्य पूर्व पर साझा रुख
मोदी और ताकाइची ने म्यांमार की बिगड़ती स्थिति और उसके क्षेत्रीय प्रभावों पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और समावेशी संवाद का वातावरण बनाने की अपील की। दोनों ने स्पष्ट किया कि किसी भी समाधान का नेतृत्व म्यांमार की जनता को करना चाहिए।
मध्य पूर्व के संदर्भ में दोनों नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की निर्बाध आवाजाही, ऊर्जा आपूर्ति शृंखला की स्थिरता और UNCLOS के पालन को अनिवार्य बताया। उन्होंने गाजा के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना और द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
यूक्रेन पर साझा स्थिति
दोनों प्रधानमंत्रियों ने यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप न्यायपूर्ण एवं स्थायी शांति का समर्थन किया। उन्होंने विभिन्न देशों द्वारा जारी कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता लाने में सहायता मिलेगी। गौरतलब है कि भारत और जापान दोनों ही इस संघर्ष में संतुलित कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश करते रहे हैं।
आगे की राह
यह शिखर वार्ता भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को नई गहराई देती है — विशेषकर ऐसे समय में जब इंडो-पैसिफिक में शक्ति-संतुलन तेजी से बदल रहा है। दोनों देशों के बीच आगे भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक समन्वय जारी रहने की उम्मीद है।