नेपाल सांप्रदायिक हिंसा: तीन मौतों के बाद PM बालेन शाह ने माँगी शांति, दोषियों पर कार्रवाई का वादा
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 30 जुलाई को राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की, जब मधेश प्रदेश के कई जिलों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में तीन लोगों की जान जा चुकी थी। यह हिंसा 26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच हुए स्थानीय विवाद से भड़की थी, जो देखते-देखते पूरे दक्षिण-पूर्वी नेपाल में फैल गई।
हिंसा का मूल कारण और घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, हिंसा की शुरुआत श्रावण महीने के बोलबम पर्व के दौरान हुई। कोशी बैराज से पवित्र जल लेकर लौट रहे हिंदू श्रद्धालु कप्तानगंज चौक की ओर जा रहे थे और तेज डीजे संगीत बजा रहे थे। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद बहस शुरू हुई और विवाद तेजी से हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों समुदायों के लोग लाठियों, पत्थरों, बाँस के डंडों और लोहे की रॉड के साथ इकट्ठा हो गए, और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी दौरान ओम प्रकाश मेहता नामक युवक की पुलिस की गोली से मौत हो गई।
मृतकों का विवरण और हिंसा का विस्तार
हिंसा में तीन लोगों की जान गई। जय प्रकाश मेहता की मौत रविवार को सुनसरी में लगी चोटों के कारण हुई। ओम प्रकाश मेहता भी उसी दिन सुनसरी की हिंसा में मारे गए। गणेश यादव, एक किशोर, की मौत सिराहा में हुई झड़पों के दौरान गोली लगने से हुई। विरोध प्रदर्शन सिराहा के गोलबाजार और लहान, तथा धनुषा जिले के जनकपुरधाम तक फैल गए। सिराहा में आगजनी की घटनाएँ भी सामने आईं और पुलिस के कई जवान घायल हुए। हालात काबू करने के लिए प्रशासन ने सिराहा के कई इलाकों, जनकपुरधाम और भारत सीमा से लगे पर्सा जिले में कर्फ्यू व निषेधाज्ञा लागू की।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और सरकार के कदम
प्रधानमंत्री शाह ने तीनों मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'मैं सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि जाँच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। सरकार सभी दोषियों को, चाहे वे कोई भी हों, कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।' उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने घटनाओं की जाँच के लिए एक समिति पहले ही गठित कर दी है और घायलों के तत्काल उपचार के निर्देश दिए गए हैं। शाह ने नागरिकों से सोशल मीडिया पर अफवाहें और अपुष्ट सामग्री न फैलाने की अपील भी की।
गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठक प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई, जिसमें समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, परिषद ने सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। इसी दिन शाह ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से भी मुलाकात की।
विपक्ष की आलोचना और राजनीतिक दबाव
विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री पर संकट के दौरान निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया। आलोचकों का कहना है कि शाह ने न तो सर्वदलीय बैठक बुलाई और न ही राष्ट्रपति को समय पर स्थिति से अवगत कराया। यह भी उजागर किया गया कि बुधवार को राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री शामिल हुए — एक चूक जिसे विपक्ष ने नेतृत्व की विफलता बताया।
आगे की राह
गुरुवार को मधेश प्रदेश के कई जिलों में तनाव बना रहा। सरकार की जाँच समिति की रिपोर्ट और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई ही तय करेगी कि प्रधानमंत्री शाह का जवाबदेही का वादा कितना ठोस साबित होता है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में सांप्रदायिक सद्भाव की परीक्षा हो रही है और सरकार पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।