31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मधेश हिंसा: PM बालेंद्र शाह ने विपक्षी नेताओं से मांगे सुझाव, तीन मौतों के बाद टूटी चुप्पी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मधेश हिंसा: PM बालेंद्र शाह ने विपक्षी नेताओं से मांगे सुझाव, तीन मौतों के बाद टूटी चुप्पी

सारांश

तीन मौतों और कई जिलों में कर्फ्यू के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मधेश-केंद्रित विपक्षी नेताओं से पहली बार सीधी बातचीत की। विपक्ष की तीखी आलोचनाओं के बीच यह कदम उनकी लंबे समय की चुप्पी टूटने का संकेत है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह संवाद जमीन पर शांति ला पाएगा।

मुख्य बातें

26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज में बोल बम जुलूस के दौरान हिंदू-मुस्लिम झड़प से मधेश हिंसा की शुरुआत हुई।
हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है; सिराहा, धनुषा और पर्सा जिलों में कर्फ्यू व निषेधाज्ञा लागू।
PM बालेंद्र शाह ने 31 जुलाई को डॉ.
सीके राउत, महंता ठाकुर, राजेंद्र महतो समेत मधेश के प्रमुख नेताओं से मुलाकात कर सुझाव माँगे।
जनमत पार्टी अध्यक्ष डॉ.
सीके राउत ने इसे 'पहली बार' मधेश दलों के साथ सीधी चर्चा बताया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि शाह ने संकट के समय समय पर देश को संबोधित नहीं किया और सर्वदलीय बैठक से अनुपस्थित रहे।
हिंदू-मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने संयुक्त अपील जारी कर भड़काऊ गतिविधियों से दूर रहने का आग्रह किया।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 31 जुलाई को दक्षिणी मधेश प्रांत में फैली सांप्रदायिक हिंसा के बीच क्षेत्र के राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों से मुलाकात की। 26 जुलाई से शुरू हुई इस हिंसा में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है और कई जिलों में कर्फ्यू लागू है। विपक्ष की लगातार आलोचनाओं के बाद शाह का यह कदम उनकी लंबे समय की चुप्पी टूटने का संकेत माना जा रहा है।

हिंसा की पृष्ठभूमि और शुरुआत

हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई को सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका-3 के कप्तानगंज इलाके में हुई। सावन माह के बोल बम उत्सव के दौरान हिंदू श्रद्धालु कोशी बैराज से पवित्र जल लेकर कप्तानगंज चौक की ओर जा रहे थे और तेज आवाज में डीजे बजा रहे थे। पुलिस के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने संगीत की तेज आवाज पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस और फिर हिंसक झड़प हो गई।

स्थिति नियंत्रित करने के दौरान ओम प्रकाश मेहता नामक युवक की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद सिराहा और धनुषा जिले के जनकपुरधाम समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और हिंसा फैल गई। प्रशासन ने सिराहा, धनुषा और भारत सीमा से लगे पर्सा जिले में कर्फ्यू व निषेधाज्ञा लागू की।

प्रधानमंत्री की बैठक और मुख्य घटनाक्रम

प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, शाह ने नेताओं को आमंत्रित कर उन तनावों पर चर्चा की जो पहले सुनसरी में उभरे और फिर मधेश के कई जिलों तक फैल गए। बैठक में हालात सामान्य करने और समुदायों के बीच भाईचारा फिर से कायम करने के उपायों पर बातचीत हुई। शाह ने नेताओं से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव माँगे।

बैठक में डॉ. सीके राउत, महंता ठाकुर, राजेंद्र महतो, लालबाबू राउत, शमीम मियां अंसारी, राम के शर्मा, प्रभु साह, अमरेश कुमार सिंह, शरत सिंह भंडारी, जयकांत राउत और अन्य नेता शामिल हुए। इनमें से अधिकांश ऐसे दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनकी प्रतिनिधि सभा में मौजूदगी नहीं है, लेकिन संकट-प्रभावित क्षेत्र में उनका व्यापक जनसमर्थन है।

विपक्ष की आलोचना और दबाव

आलोचकों का कहना है कि बालेंद्र शाह लंबे समय से विपक्षी दलों से बातचीत करने से बचते रहे हैं — जो नेपाल की संसदीय लोकतांत्रिक परंपरा से अलग है। मधेश प्रांत में कथित निष्क्रियता को लेकर विपक्षी दलों ने संसद और प्रेस बयानों के जरिए शाह पर निशाना साधा। उनका आरोप था कि संकट के समय प्रधानमंत्री देश के अभिभावक की भूमिका निभाने में विफल रहे।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री शामिल हुए — इस पर विपक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई। बढ़ते दबाव के बाद शाह ने गुरुवार को देश को संबोधित किया और शांति तथा सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

धार्मिक नेताओं की संयुक्त अपील

RSP अध्यक्ष लामिछाने ने हिंदू और मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें शांति बहाल करने के उपायों पर चर्चा हुई। इसके बाद विभिन्न धार्मिक संगठनों ने संयुक्त अपील जारी कर लोगों से शांत रहने और भड़काऊ या नफरत फैलाने वाली गतिविधियों से दूर रहने का आग्रह किया। देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक सौहार्द की अपील के साथ रैलियाँ भी निकाली गईं।

नेताओं की प्रतिक्रिया और आगे की राह

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नेताओं ने कहा कि इस तरह का संवाद संकट का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जनमत पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सीके राउत ने इसे बहुत सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि 'पहली बार प्रधानमंत्री शाह ने मधेश-केंद्रित राजनीतिक दलों के साथ सीधे चर्चा की है।' शाह ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से भी मुलाकात कर मधेश की स्थिति की जानकारी दी और उपराष्ट्रपति से फोन पर बात की। इस संकट से प्रभावित जिलों में स्थिरता बहाल होने तक कर्फ्यू जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विलंबित कदम है — यह ऐसे समय में आया जब हिंसा पहले ही कई जिलों में फैल चुकी थी और तीन जानें जा चुकी थीं। नेपाल की संसदीय परंपरा में संकट के समय सर्वदलीय सहमति की अपेक्षा होती है, लेकिन शाह का सर्वदलीय बैठक से अनुपस्थित रहना और फिर दबाव में संवाद शुरू करना उनकी प्रतिक्रियात्मक राजनीति को उजागर करता है। गौरतलब है कि मधेश क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव की जड़ें पुरानी हैं और बार-बार भड़कती रही हैं — केवल बैठकें और अपीलें दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस संवाद से ठोस नीतिगत कदम उठाए जाते हैं या यह केवल दबाव-प्रबंधन तक सीमित रहता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल के मधेश प्रांत में हिंसा कैसे शुरू हुई?
हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज में बोल बम उत्सव के दौरान हुई, जब हिंदू श्रद्धालुओं के जुलूस में तेज आवाज में डीजे बजाने पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। पुलिस के अनुसार बहस हिंसक झड़प में बदल गई और स्थिति नियंत्रित करने के दौरान ओम प्रकाश मेहता नामक युवक की पुलिस की गोली से मौत हो गई।
मधेश हिंसा में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है और कहाँ कर्फ्यू लगा है?
हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। सिराहा, धनुषा जिले के जनकपुरधाम के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू और भारत सीमा से लगे पर्सा जिले में निषेधाज्ञा लागू की गई है। 31 जुलाई को भी इन जिलों में कर्फ्यू जारी रहा।
PM बालेंद्र शाह ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात क्यों की?
मधेश प्रांत में बढ़ती हिंसा और विपक्ष की लगातार आलोचनाओं के बाद शाह ने 31 जुलाई को क्षेत्र के नेताओं से मुलाकात की। आलोचकों का कहना है कि शाह लंबे समय से विपक्ष से संवाद से बचते रहे थे, लेकिन संकट की गंभीरता ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
बैठक में कौन-से नेता शामिल हुए और उनकी क्या भूमिका है?
बैठक में डॉ. सीके राउत, महंता ठाकुर, राजेंद्र महतो, लालबाबू राउत, शमीम मियां अंसारी समेत कई नेता शामिल हुए। इनमें से अधिकांश ऐसे दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो प्रतिनिधि सभा में नहीं हैं, लेकिन मधेश क्षेत्र में उनका व्यापक जनसमर्थन है।
विपक्ष ने PM शाह पर क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि शाह ने संकट के समय देश को समय पर संबोधित नहीं किया और RSP अध्यक्ष रवि लामिछाने द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में न तो वे और न ही गृह मंत्री शामिल हुए। विपक्ष का कहना था कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय संकट में अभिभावक की भूमिका निभाने में विफल रहे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 18 घंटे पहले
  3. कल
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले