सऊदी अरामको के शायबह तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमले में नेपाली नागरिक की मौत, नेपाल ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के सऊदी अरामको के शायबह तेल क्षेत्र पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। बुधवार, 22 अक्टूबर 2026 को हुई इस घटना में सऊदी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा ड्रोन को हवा में नष्ट किए जाने के बाद गिरे मलबे से एक नेपाली नागरिक और एक फिलीपींस नागरिक की मौत हो गई, जबकि एक पाकिस्तानी और एक भारतीय नागरिक घायल हो गए। काठमांडू से जारी इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत लाखों प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं।
हमले का घटनाक्रम
बुधवार की सुबह सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने शायबह तेल क्षेत्र की एक सुविधा को निशाना बनाने जा रहे ड्रोन को मध्य हवा में ही रोक लिया। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन के नष्ट होने के बाद उसका मलबा तेल क्षेत्र में कार्यरत एक ठेकेदार के वाहन पर आ गिरा, जिससे आग भड़क उठी।
इस दुर्घटना में दो विदेशी नागरिक — एक नेपाली और एक फिलीपींस — मारे गए। घटनास्थल पर मौजूद एक पाकिस्तानी और एक भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी की है।
नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर जारी बयान में स्पष्ट किया कि नेपाल नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाकर किए जाने वाले सभी हमलों की कड़ी निंदा करता है। मंत्रालय ने दोहराया कि नेपाल विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, बातचीत, वार्ता और कूटनीतिक प्रयासों का पक्षधर है।
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'बुधवार को सऊदी अरामको के शायबह तेल क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले के मलबे से एक नेपाली नागरिक की दुखद मौत से हम बेहद दुखी हैं। हम शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।'
शायबह तेल क्षेत्र और क्षेत्रीय सुरक्षा संदर्भ
शायबह तेल क्षेत्र सऊदी अरामको द्वारा संचालित एक प्रमुख उत्पादन केंद्र है, जो रूब-अल-खाली (एम्प्टी क्वार्टर) रेगिस्तान में संयुक्त अरब अमीरात की सीमा के निकट स्थित है। यह सऊदी अरब के ऊर्जा ढाँचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और वैश्विक तेल आपूर्ति में भी अहम भूमिका निभाता है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सऊदी अरब में मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर सुरक्षा चिंताएँ पहले से बढ़ी हुई हैं। यमन के हूती विद्रोही, जो युद्धग्रस्त देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं, कई वर्षों से सऊदी समर्थित यमनी सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में हैं और इससे पहले भी हवाई अड्डों, सैन्य प्रतिष्ठानों तथा ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया जाता रहा है। हालाँकि इस ताज़ा हमले की ज़िम्मेदारी किसने ली, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
प्रवासी श्रमिकों पर असर
नेपाल के विदेश मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, खाड़ी देशों में लगभग 18 लाख नेपाली नागरिक रहते हैं, जिनमें अधिकांश प्रवासी श्रमिक हैं। नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इन्हीं श्रमिकों द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस पर निर्भर है, जो लाखों परिवारों की आजीविका और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए जीवनरेखा का काम करती है।
इस ताज़ा घटना ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा, निर्माण, सेवा और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत विदेशी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरी कर दी हैं। नेपाल लगातार सशस्त्र संघर्षों के दौरान नागरिकों और नागरिक ढाँचे की सुरक्षा की वकालत करता आया है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के पालन पर जोर देता रहा है।
आगे क्या होगा
नेपाल सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह सऊदी अरब में अपने राजनयिक मिशन के माध्यम से मृतक नेपाली नागरिक के परिवार को सहायता पहुँचाने के लिए कदम उठाएगी। यह घटना खाड़ी देशों में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़ी नीतियों की नए सिरे से समीक्षा की माँग को भी बल देती है।