नेपाल में बाढ़ भूस्खलन से 27 की मौत, 1,065 परिवार प्रभावित; बिजली संकट गहराया
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 24 सितंबर से 28 सितंबर 2026 के बीच लगातार मूसलाधार बारिश से उत्पन्न बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, तेज़ हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं में नेपाल में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 7 लोग घायल हुए। 4 लोग अभी भी लापता हैं और खोज अभियान जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री सचिवालय के बयान के अनुसार, मॉनसून से जुड़ी कुल 513 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनसे 1,065 परिवार सीधे प्रभावित हुए। इन आपदाओं में 225 घर पूरी तरह और 137 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा 27 पशुशालाएँ और 114 मवेशी भी नुकसान की चपेट में आए।
देश भर में बाढ़ और भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर 147 स्थानों को नुकसान पहुँचा। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक इनमें से 125 स्थानों की मरम्मत पूरी कर यातायात बहाल कर दिया गया है, जबकि शेष पर काम जारी है।
कालीगंडकी कॉरिडोर पर यातायात बाधित
पश्चिमी नेपाल के बेनी जोमसोम, पाल्पा, बाग्लुंग और नवलपरासी जिलों में भूस्खलन, सड़क धंसने और पुल के एप्रोच को क्षति पहुँचने के कारण कालीगंडकी कॉरिडोर पर आवाजाही रुक गई है। अधिकारियों के अनुमान के अनुसार इस मार्ग को पूरी तरह बहाल होने में तीन दिन से अधिक का समय लग सकता है।
गौरतलब है कि यह वही कॉरिडोर है जो पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय अन्नपूर्णा सर्किट से जुड़ता है और इसके बंद रहने से स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो रही है।
बिजली आपूर्ति पर असर
बाढ़ की मार से कालीगंडकी, मार्स्यांगडी और सेती माडी नदी कॉरिडोर में राष्ट्रीय ट्रांसमिशन तंत्र के ज़रिए कुल 1,013.2 मेगावाट बिजली की आपूर्ति बाधित हुई। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर पर लगभग एक दर्जन पनबिजली परियोजनाएँ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। उस बाढ़ में 1,400 से अधिक लोगों की जान गई थी और करीब 5,000 लोग लापता हो गए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में सर्दियों के दौरान घरेलू बिजली उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है, क्योंकि 'रन ऑफ द रिवर' पनबिजली संयंत्र कम जलप्रवाह में सीमित उत्पादन कर पाते हैं।
भारत से बिजली आयात की योजना
सरकारी विद्युत कंपनी नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) ने आगामी सर्दियों में भारत से 1,100 मेगावाट से अधिक बिजली आयात करने की योजना की घोषणा की है। NEA के प्रबंध निदेशक दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ ने कहा, "इसीलिए हमने बिजली सप्लाई को मैनेज करने के लिए आने वाले सूखे मौसम में भारत से 1,155 मेगावाट बिजली इंपोर्ट करने का प्लान बनाया है।"
NEA के अनुसार जनवरी के बाद घरेलू उत्पादन लगभग 1,218 मेगावाट रहने की उम्मीद है, जबकि माँग 2,293 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है — यानी लगभग 1,075 मेगावाट का अंतर जिसे आयात से भरना होगा।
सरकार की राहत और पुनर्वास कोशिशें
नेपाल सरकार ने बयान में कहा कि बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों में तेज़ी लाई गई है और सभी संबंधित एजेंसियाँ क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में जुटी हैं। यह लगातार दूसरा बड़ा मॉनसून संकट है — अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब सितंबर के अंत में फिर जान माल का भारी नुकसान हुआ है, जो नेपाल की आपदा प्रबंधन क्षमता पर गंभीर सवाल उठाता है।
आने वाले हफ्तों में मॉनसून की विदाई के साथ राहत कार्य और तेज़ होने की उम्मीद है, लेकिन बिजली संकट सर्दियों तक बना रहने की आशंका है।