10 अगस्त 2026
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उत्तर कोरिया ने 5,000 टन का विध्वंसक 'चोए ह्योन' नौसेना में किया शामिल, किम ने कहा — लड़ाकू क्षमता होगी 'कल्पना से परे'

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उत्तर कोरिया ने 5,000 टन का विध्वंसक 'चोए ह्योन' नौसेना में किया शामिल, किम ने कहा — लड़ाकू क्षमता होगी 'कल्पना से परे'

सारांश

उत्तर कोरिया का 5,000 टन का विध्वंसक 'चोए ह्योन' सिर्फ एक जहाज नहीं — यह किम जोंग-उन की नौसेना को परमाणु-सक्षम 'पूर्ण सेवा' में बदलने की महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। हर साल दो बड़े युद्धपोत और 10,000 टन के क्रूजर की योजना बताती है कि प्योंगयांग अब समुद्री मोर्चे पर भी दाँव बढ़ा रहा है।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने 24 जून 2026 को 5,000 टन क्षमता वाले विध्वंसक 'चोए ह्योन' को नौसेना में शामिल किया।
किम जोंग-उन ने कहा कि इससे नौसेना की लड़ाकू क्षमता 'कल्पना से परे प्रशंसनीय' स्तर तक पहुँचेगी।
युद्धपोत को पश्चिमी सागर बेड़े में तैनात किया जाएगा; इसे परमाणु प्रतिरोधक क्षमता से जोड़ा गया है।
किम ने हर वर्ष दो या अधिक युद्धपोत बनाने का आह्वान किया, जिसमें 10,000 टन के क्रूजर भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्धपोत का हथियार प्रणाली रूस की पैंत्सिर-एमई से मिलती-जुलती है, जो कथित रूसी सहायता का संकेत देती है।
अगला विध्वंसक 'कांग कोन' जल्द संचालन में आने की उम्मीद; पाँच वर्षीय रक्षा विकास योजना जारी।

उत्तर कोरिया ने 24 जून 2026 को 5,000 टन क्षमता वाले नए बहु-मिशन विध्वंसक युद्धपोत 'चोए ह्योन' को अपनी नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने कमीशनिंग समारोह में दावा किया कि इस कदम से उत्तर कोरियाई नौसेना की लड़ाकू क्षमता 'कल्पना से परे प्रशंसनीय' स्तर तक पहुँचेगी। राज्य मीडिया कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने यह जानकारी बुधवार को प्रसारित की।

कमीशनिंग समारोह और किम के बयान

यह समारोह नामपो के पश्चिमी बंदरगाह पर आयोजित किया गया। अपने बधाई संबोधन में किम जोंग-उन ने 'चोए ह्योन' को 'सबसे परिपूर्ण, जटिल संचालन और लड़ाकू क्षमता' से लैस बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरियाई नौसेना को लंबे समय से तीनों सेनाओं में कमज़ोर कड़ी माना जाता था, लेकिन अब 'हालात स्पष्ट रूप से बदल गए हैं।'

किम ने इस युद्धपोत की तैनाती को 'रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम' करार दिया और कहा कि इससे देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और मज़बूत होगी तथा परमाणु बलों के अधिक विविध एवं प्रभावी संचालन में सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना अब 'रणनीतिक साधनों से लैस एक पूर्ण सेवा' के रूप में उभर रही है।

युद्धपोत की विशेषताएँ और तैनाती

रिपोर्टों के अनुसार, 'चोए ह्योन' को पश्चिमी सागर बेड़े में तैनात किया जाएगा, जहाँ वह पश्चिमी सागर की रक्षा और युद्ध-निरोधक मिशन सँभालेगा। उत्तर कोरिया ने पिछले वर्ष अप्रैल में इस युद्धपोत का अनावरण किया था और कमीशनिंग से पहले इससे हथियार परीक्षण भी किए गए थे।

इस विध्वंसक का नाम चोए ह्योन के नाम पर रखा गया है — जो जापान-विरोधी क्रांतिकारी योद्धा और उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग के करीबी सहयोगी थे। वे चोए रयोंग-हाए के पिता भी थे, जो देश की संसद की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।

नौसेना विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना

किम जोंग-उन ने कमीशनिंग के अवसर पर आगे की योजनाओं का भी खुलासा किया। उन्होंने हर वर्ष दो चोए ह्योन श्रेणी या उससे बड़े युद्धपोत बनाने का आह्वान किया, जिसमें 10,000 टन क्षमता वाले क्रूजर भी शामिल होंगे। यह देश की पाँच वर्षीय रक्षा विकास योजना का अभिन्न हिस्सा है।

उन्होंने कहा, 'चोए ह्योन के बाद हम जल्द ही 'कांग कोन' विध्वंसक को भी संचालन में लाएंगे। इसके बाद हम एक-एक कर 10,000 टन के रणनीतिक युद्धपोत लॉन्च करेंगे।' इसके अलावा एस्कॉर्ट जहाजों, विशेष उद्देश्य वाले पोतों और पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाली हथियार प्रणालियों के विकास पर भी बल दिया गया।

विशेषज्ञों का विश्लेषण

विश्लेषकों का मानना है कि यह तैनाती दक्षिण कोरिया पर सैन्य दबाव बढ़ाने की प्योंगयांग की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ शोधकर्ता हांग मिन के अनुसार, यह कदम पीला सागर क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से हो सकता है, जहाँ दक्षिण कोरिया की सैन्य और वाणिज्यिक गतिविधियाँ केंद्रित हैं।

कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के महासचिव शिन जोंग-वू ने बताया कि इस युद्धपोत के डिज़ाइन में पिछले वर्ष लॉन्च के बाद बदलाव किए गए प्रतीत होते हैं। उनके अनुसार, 'शुरुआत में इसे कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए डिज़ाइन किया गया लगता था, लेकिन बाद में परीक्षण के दौरान दिखे छोटे वर्टिकल लॉन्च सिस्टम से संकेत मिलता है कि इसमें क्रूज़ मिसाइलें हो सकती हैं।'

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने इस जहाज को स्वदेशी तकनीक से निर्मित बताया है, परंतु कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इसके क्लोज़-इन वेपन सिस्टम की समानता रूस की पैंत्सिर-एमई नौसैनिक वायु रक्षा प्रणाली से मिलती-जुलती है, जिससे कथित तौर पर रूसी सहायता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह ऐसे समय में आया है जब प्योंगयांग और मॉस्को के बीच रक्षा सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नौसेना को पहली बार परमाणु रणनीति के केंद्र में रखा जा रहा है। हर साल दो बड़े युद्धपोत बनाने की योजना और 10,000 टन के क्रूजर का वादा बताता है कि प्योंगयांग की महत्वाकांक्षा केवल कागज़ी नहीं है। रूसी पैंत्सिर-एमई से मिलती-जुलती हथियार प्रणाली पर विशेषज्ञों की चिंता इस सवाल को और गहरा करती है कि क्या यह 'स्वदेशी' निर्माण वास्तव में मॉस्को की छाया से मुक्त है। दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगियों के लिए असली परीक्षा यह है कि पीले सागर में बदलते समीकरण के जवाब में उनकी रणनीति कितनी तेज़ी से अनुकूलित होती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर कोरिया का विध्वंसक 'चोए ह्योन' क्या है?
'चोए ह्योन' उत्तर कोरिया का 5,000 टन क्षमता वाला नया बहु-मिशन विध्वंसक युद्धपोत है, जिसे 24 जून 2026 को नामपो बंदरगाह पर आयोजित समारोह में नौसेना में शामिल किया गया। इसे पश्चिमी सागर बेड़े में तैनात किया जाएगा और इसे परमाणु प्रतिरोधक क्षमता से जोड़ा गया है।
किम जोंग-उन ने इस युद्धपोत के बारे में क्या कहा?
किम जोंग-उन ने कमीशनिंग समारोह में कहा कि 'चोए ह्योन' 'सबसे परिपूर्ण, जटिल संचालन और लड़ाकू क्षमता' से लैस है और इससे नौसेना की शक्ति 'कल्पना से परे प्रशंसनीय' स्तर तक पहुँचेगी। उन्होंने इसे देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मज़बूत करने वाला 'रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम' बताया।
उत्तर कोरिया की नौसेना विस्तार योजना क्या है?
किम जोंग-उन ने हर वर्ष दो चोए ह्योन श्रेणी या उससे बड़े युद्धपोत बनाने का आह्वान किया है, जिसमें 10,000 टन के क्रूजर भी शामिल हैं। यह पाँच वर्षीय रक्षा विकास योजना का हिस्सा है; अगला विध्वंसक 'कांग कोन' जल्द संचालन में आने की उम्मीद है।
क्या 'चोए ह्योन' में रूसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है?
उत्तर कोरिया ने इसे स्वदेशी तकनीक से निर्मित बताया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इसका क्लोज़-इन वेपन सिस्टम रूस की पैंत्सिर-एमई नौसैनिक वायु रक्षा प्रणाली से मिलता-जुलता है। इससे कथित तौर पर रूसी सहायता की संभावना जताई जा रही है, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस तैनाती का दक्षिण कोरिया पर क्या असर होगा?
विश्लेषकों के अनुसार, यह तैनाती दक्षिण कोरिया पर सैन्य दबाव बढ़ाने की प्योंगयांग की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ शोधकर्ता हांग मिन के अनुसार, यह पीला सागर क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने का प्रयास है, जहाँ दक्षिण कोरिया की सैन्य और वाणिज्यिक गतिविधियाँ केंद्रित हैं।
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