एनएसडब्ल्यू में आईआरजीसी और हिज्ब उत-तहरीर के प्रतीकों पर बैन, दो साल की जेल का प्रावधान
सारांश
Key Takeaways
- न्यू साउथ वेल्स में आईआरजीसी और हिज्ब उत-तहरीर के प्रतीकों पर बैन का प्रस्ताव।
- उग्रवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकल्प।
- दो साल की जेल या भारी जुर्माना का प्रावधान।
- सामाजिक सुरक्षा और सद्भाव बनाए रखने का उद्देश्य।
- सभी प्रतिबंधित संगठनों के प्रतीकों पर रोक।
सिडनी, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) सरकार ने कट्टरपंथ और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किए गए नए विधेयक के तहत इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और हिज्ब उत-तहरीर जैसे संगठनों के प्रतीकों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगेगा।
एनएसडब्ल्यू सरकार ने इस संदर्भ में एक बयान जारी किया है। इस प्रस्तावित कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इन संगठनों के झंडे दिखाता है, उनके प्रतीक वाले कपड़े पहनता है, या किसी भी प्रकार से सार्वजनिक समर्थन व्यक्त करता है, तो उसे अधिकतम दो साल की जेल, 22,000 डॉलर110,000 डॉलर तक लगाया जा सकता है।
यह कानून पहले से लागू आतंकवादी प्रतीकों पर प्रतिबंध को और व्यापक बनाता है। पहले केवल घोषित आतंकवादी संगठनों के प्रतीकों पर रोक थी, लेकिन नए संशोधन के बाद सभी प्रतिबंधित संगठनों के प्रतीकों को इसके दायरे में लाया जाएगा।
एनएसडब्ल्यू के अटॉर्नी-जनरल माइकल डेले ने कहा कि यह विधेयक लेबर सरकार द्वारा तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य राज्य में नफरत और उग्रवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू करना है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह कदम संघीय सरकार की नीतियों के अनुरूप है और इससे कानून-व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आईआरजीसी ईरान की एक शक्तिशाली सैन्य इकाई है, जिसे कई पश्चिमी देशों में विवादास्पद माना जाता है। वहीं, हिज्ब उत-तहरीर एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिस्ट संगठन है, जिसे कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है क्योंकि उस पर कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के आरोप हैं।
ऑस्ट्रेलिया में हाल के वर्षों में उग्रवाद और नफरत फैलाने वाले प्रतीकों को लेकर बहस तेज हुई है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रतीक समाज में डर और विभाजन उत्पन्न करते हैं। इसलिए इन पर सख्ती जरूरी है। सिडनी बोंडी बीच पर हुए मास शूटिंग के बाद इसे लेकर बहस और भी तेज हो गई है।
इस विधेयक के माध्यम से सरकार यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि राज्य में किसी भी प्रकार के उग्रवादी या नफरत फैलाने वाले व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो एनएसडब्ल्यू उन क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा जहाँ उग्रवादी संगठनों के प्रतीकों पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं।