इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ यूएन में उठाई आवाज, ईरान की भूमिका पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तेल अवीव, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच, इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से हिज्बुल्लाह के खिलाफ ठोस कार्रवाई की अपील की है। मंत्री गिदोन सार ने यूएनएससी के अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर लेबनान से होने वाले हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की और ईरान की ओर से हिज्बुल्लाह को मिल रहे समर्थन का विवरण साझा किया है। साथ ही, उन्होंने इस ईरान समर्थित संगठन को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 2 मार्च 2026 से हिज्बुल्लाह ने लेबनान से इजरायल के नागरिक क्षेत्रों पर समन्वित और निरंतर हमले किए हैं। आरोप है कि अब तक ३,५०० से अधिक रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन दागे जा चुके हैं, जिससे लाखों लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और उन्हें बंकरों में शरण लेनी पड़ी है। हाल ही में २७ वर्षीय नुरिएल डुबिन की मौत भी एक मिसाइल हमले में होने का दावा किया गया है।
इजरायल ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1701 (2006) और 1559 (2004) का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई नवंबर 2024 के संघर्षविराम समझौते की भावना के खिलाफ है।
पत्र में लेबनान सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह अपने क्षेत्र से हो रही इन गतिविधियों को रोकने में असफल रही है। इजरायल का कहना है कि हिज्बुल्लाह अब भी दक्षिण लेबनान में सक्रिय है और नागरिक इलाकों के बीच अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है, जिससे यूएनआईएफआईएल के कर्मियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
सार ने ईरान पर भी आरोप लगाया है कि वह हिज्बुल्लाह को वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है, जिसमें उन्नत हथियार और ड्रोन शामिल हैं। पत्र के अनुसार, संघर्षविराम के बाद से ईरान ने हिज्बुल्लाह को लगभग 1.2 अरब डॉलर की सहायता दी है।
इजरायल ने यूएनएससी को लिखे अपने पत्र में मांग की है कि वह हिज्बुल्लाह की स्पष्ट रूप से निंदा करे और उसे एक आतंकी संगठन घोषित करे। साथ ही, इस संगठन को ईरान समर्थित “प्रॉक्सी” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की गई है।
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए “सभी आवश्यक कदम” उठाता रहेगा। साथ ही, इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) द्वारा हिज्बुल्लाह के ठिकानों और कमांडरों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है।
अंत में, इजरायल ने सुरक्षा परिषद से तीन प्रमुख मांगें कीं: पहला, कि हिज्बुल्लाह की स्पष्ट निंदा कर उसे आतंकी संगठन घोषित किया जाए; दूसरा, लेबनान सरकार को सभी मिलिशिया को निरस्त्र करने के लिए बाध्य किया जाए; और तीसरा, ईरान की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा मानते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।