विश्व शहरी दिवस 2026: फूचो में पाँच शहरों को मिला चौथा शांगहाई सतत विकास पुरस्कार
सारांश
मुख्य बातें
फूचो (फूच्येन प्रांत, चीन) में 1 नवंबर 2026 को विश्व शहरी दिवस के वैश्विक मुख्य कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर चौथे वैश्विक सतत विकास शहरी पुरस्कार — जिसे शांगहाई पुरस्कार के नाम से भी जाना जाता है — से दुनिया के पाँच शहरों को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन शहरों को दिया जाता है जिन्होंने सतत शहरी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है।
पुरस्कृत शहर और उनकी विशेषताएँ
इस वर्ष पाँच शहरों को शांगहाई पुरस्कार के लिए चुना गया: इथियोपिया की राजधानी अदिस अबाबा, कोलंबिया का सैंटियागो डे कैली, तुर्किये का इस्तांबुल, चीन का चिंगतेचन और पोलैंड का काटोवाइस। ये सभी शहर विभिन्न महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते हैं और सतत शहरी नीतियों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुके हैं।
शांगहाई पुरस्कार का उद्देश्य
इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडा और नए शहरी एजेंडे को स्थानीय स्तर पर लागू करने को प्रोत्साहित करना है। आयोजकों के अनुसार, यह पुरस्कार शहरों को वैश्विक मंच पर उनके बेहतर प्रशासन और नवाचार के लिए मान्यता दिलाता है।
इस अवसर पर पुरस्कार से संबंधित एक विशेष वीडियो और 'शांगहाई हैंडबुक: 21वीं सदी में सतत शहरी विकास के लिए मार्गदर्शिका' का 2026 संस्करण भी जारी किया गया। इस पुस्तिका में विश्व के विभिन्न शहरों के सफल अनुभव और श्रेष्ठ कार्यप्रणाली के उदाहरण साझा किए गए हैं।
कार्यक्रम का आयोजन और विषय
इस वर्ष के कार्यक्रम का विषय रखा गया — 'नवीनीकरण से सशक्तीकरण, रहने योग्य शहरों का सपना।' कार्यक्रम का आयोजन चीन के आवास एवं शहरी-ग्रामीण विकास मंत्रालय, संयुक्त राष्ट्र मानव बस्ती कार्यक्रम (यूएन-हैबिटेट) और फूच्येन प्रांतीय सरकार ने संयुक्त रूप से किया। मेजबानी फूचो नगर सरकार और प्रांतीय आवास एवं शहरी-ग्रामीण विकास विभाग ने की।
विश्व शहरी दिवस की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिसंबर 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर वर्ष 31 अक्टूबर को विश्व शहरी दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। तब से 2014 में इसकी शुरुआत हुई और यह प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है। यह चीनी सरकार की पहल पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित पहला अंतरराष्ट्रीय दिवस है — एक तथ्य जो वैश्विक शहरी विमर्श में चीन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
वैश्विक महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया की आधी से अधिक आबादी शहरों में रह रही है और 2050 तक यह अनुपात 70% तक पहुँचने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि सतत शहरी नियोजन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक समता और आर्थिक लचीलेपन की भी कसौटी बन चुका है। शांगहाई पुरस्कार जैसी पहलें वैश्विक शहरों के बीच सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करती हैं।