ईपीएफओ के 74वें स्थापना दिवस पर मांडविया ने लॉन्च की व्हाट्सएप सेवा, 1 लाख निष्क्रिय खातों का होगा स्वत: निपटारा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 74वें स्थापना दिवस समारोह में दो अहम डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ किया। इनमें पहली, सदस्यों के लिए ईपीएफओ की सत्यापित व्हाट्सएप सेवा है, और दूसरी, ₹1,000 तक की राशि वाले आधार-सत्यापित निष्क्रिय खातों का स्वत: निपटारा — जिससे लगभग 1 लाख खाताधारकों के खातों में करीब ₹5 करोड़ पहुँचने की उम्मीद है।
नई सेवाएँ: क्या मिलेगा सदस्यों को
ईपीएफओ की नई व्हाट्सएप सेवा के ज़रिए सदस्य अब अपना पीएफ बैलेंस, हाल की लेनदेन जानकारी और पासबुक संबंधी विवरण सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त कर सकेंगे। यह सेवा ईपीएफओ के सत्यापित आधिकारिक चैनल के माध्यम से उपलब्ध होगी, जिससे सूचना की प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सकेगी।
दूसरी पहल के तहत, जिन निष्क्रिय ईपीएफ खातों में ₹1,000 तक की राशि है और जो आधार से सत्यापित हैं, उनका स्वत: निपटारा किया जाएगा। संगठन के अनुसार इससे 1 लाख खाताधारकों को सीधा लाभ मिलेगा और लगभग ₹5 करोड़ की राशि उनके खातों तक पहुँचेगी।
मांडविया का संबोधन: श्रमिक हैं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला
समारोह में डॉ. मांडविया ने कहा कि ईपीएफओ पिछले 74 वर्षों में एक साधारण भविष्य निधि संस्था से विकसित होकर देश की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा संस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि संगठन पर करोड़ों श्रमिकों और पेंशनभोगियों का भरोसा इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
मांडविया ने विशेष जोर देते हुए कहा कि सामाजिक सुरक्षा केवल प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से संचालित होनी चाहिए। उनके अनुसार, 'हर श्रमिक की समस्या को सहानुभूति और सम्मान के साथ हल करना ज़रूरी है क्योंकि श्रमिक ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं।' उन्होंने अधिकारियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'पंच प्रण' से प्रेरणा लेकर विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान भी किया।
ईपीएफओ की मौजूदा ताकत: आँकड़ों में
मांडविया ने बताया कि ईपीएफओ आज 8 करोड़ से अधिक अंशधारक सदस्यों और 85 लाख पेंशनभोगियों से जुड़ा हुआ है, तथा लगभग ₹32 लाख करोड़ के रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब संगठन की तकनीकी पहल सीटीज 2.0 ने दावों के निपटारे का औसत समय घटाकर 2.57 दिन कर दिया है — जो सेवा-वितरण में उल्लेखनीय सुधार का संकेत है।
गौरतलब है कि यह आँकड़ा अक्टूबर 2026 का है और संगठन के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में दावा प्रसंस्करण में यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
प्रकाशन, पुरस्कार और असंगठित क्षेत्र की बात
समारोह के दौरान ईपीएफओ ने सात महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया, जिनमें सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार, न्यायिक निर्णयों, हिंदी साहित्य और संवेदनशील प्रशासन से जुड़े विषय शामिल हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रीय कार्यालयों, अधिकारियों और कर्मचारियों को भविष्य निधि पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और श्रम सुधारों का लाभ केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए — यह असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक भी पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और संस्थाओं को समय के साथ खुद को लगातार बदलते रहना होगा।
आगे की राह: 75वें वर्ष की तैयारी
मांडविया ने ईपीएफओ को निर्देश दिया कि 75वें स्थापना दिवस की ओर बढ़ते हुए श्रमिक-केंद्रित नवाचारों पर और अधिक ध्यान देना होगा। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने भी कहा कि संगठन की सफलता केवल आँकड़ों से नहीं, बल्कि हर उस दावे, पेंशन और सहायता से मापी जानी चाहिए जो सही समय पर लाभार्थियों तक पहुँचती है। आने वाले वर्ष में ईपीएफओ के डिजिटल विस्तार और सदस्य-सेवाओं में और सुधार की उम्मीद की जा रही है।