1 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिनेश वी. गणवीर बने जीएसआई के 55वें महानिदेशक, खनिज सुरक्षा और तकनीकी आधुनिकीकरण पर फोकस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिनेश वी. गणवीर बने जीएसआई के 55वें महानिदेशक, खनिज सुरक्षा और तकनीकी आधुनिकीकरण पर फोकस

सारांश

दिनेश वी. गणवीर ने जीएसआई के 55वें महानिदेशक के रूप में कमान संभाली है — ऐसे समय में जब भारत महत्त्वपूर्ण खनिजों की आयात-निर्भरता से उबरने की कोशिश कर रहा है। उनके नेतृत्व में 202 खनिज ब्लॉकों में से 40 की नीलामी हो चुकी है, और अब लक्ष्य अन्वेषण को और तेज़ करना है।

मुख्य बातें

दिनेश विट्ठलराव गणवीर ने 1 नवंबर 2026 को जीएसआई के 55वें महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया।
उनके पास भूवैज्ञानिक अन्वेषण और संस्थागत नेतृत्व में 32 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
उनके पिछले कार्यकाल में महत्त्वपूर्ण खनिजों की जाँच में पाँच गुना वृद्धि और 359 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार हुईं।
202 महत्त्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों में से 40 की सफल नीलामी हो चुकी है; ईएल व्यवस्था के तहत 56 में से 11 ब्लॉकों की नीलामी हुई।
प्राथमिकताओं में उन्नत तकनीक का उपयोग, प्रयोगशाला उन्नयन, अपतटीय अन्वेषण और विकसित भारत 2047 में योगदान शामिल हैं।

दिनेश विट्ठलराव गणवीर ने 1 नवंबर 2026 को जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के 55वें महानिदेशक का पदभार संभाला। खान मंत्रालय, भारत सरकार के इस संलग्न कार्यालय में वे भूवैज्ञानिक अन्वेषण, खनिज सर्वेक्षण, इंजीनियरिंग जियोलॉजी और संस्थागत नेतृत्व में तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ आए हैं। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की घरेलू आपूर्ति को लेकर तेज़ी से सक्रिय हो रहा है।

करियर और पृष्ठभूमि

जुलाई 1994 में जीएसआई से जुड़े गणवीर ने आरटीएमएनयू विश्वविद्यालय, नागपुर से भूविज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। 32 वर्षों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने जीएसआई के मध्य क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और उत्तरी क्षेत्र में अनेक वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर काम किया।

महानिदेशक का पदभार संभालने से ठीक पहले वे सेंट्रल रीजन, नागपुर में अतिरिक्त महानिदेशक और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, साथ ही उनके पास राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-दो का अतिरिक्त प्रभार भी था।

प्रमुख वैज्ञानिक योगदान

गणवीर के कार्यक्षेत्र में भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग जियोलॉजी और बहु-विषयक भू-वैज्ञानिक अध्ययन शामिल रहे हैं। उनके उल्लेखनीय कार्यों में पश्चिमी बस्तर क्रेटन में विषयगत मानचित्रण, महाराष्ट्र के साकोली फोल्ड बेल्ट में सोने और हीरे की खोज, तथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों — भीमबेटका रॉक शेल्टर्स और एलोरा गुफाओं — के संरक्षण से जुड़े भू-वैज्ञानिक अध्ययन शामिल हैं।

उन्होंने इंडिया-पेरू संयुक्त कार्यकारी समूह, रूस-भारत खनन उपसमूह और ऑस्ट्रेलिया में आईएमएआरसी 2022 सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जीएसआई का प्रतिनिधित्व किया है।

खनिज अन्वेषण में उपलब्धियाँ

राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-दो के रूप में उनके नेतृत्व में महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की जाँच में पाँच गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस कार्यकाल में 359 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और 377 भूवैज्ञानिक ज्ञापन तैयार कर सौंपे गए।

इनमें से 202 ब्लॉक महत्त्वपूर्ण खनिजों से संबंधित थे, जिनमें से 40 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। इसके अलावा अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) व्यवस्था के तहत 56 ब्लॉक सौंपे गए, जिनमें से 11 की नीलामी ट्रांच वन और टू के अंतर्गत हो चुकी है।

नई प्राथमिकताएँ और दिशा

पदभार ग्रहण करते हुए गणवीर ने जीएसआई की वैज्ञानिक गहराई, प्रासंगिकता और राष्ट्रीय प्रभाव को बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने एकीकृत भू-वैज्ञानिक जाँच, उन्नत खनिज संभाव्यता मानचित्रण और नीलामी-योग्य खनिज ब्लॉकों की व्यवस्थित तैयारी को प्रमुख लक्ष्य बताया।

उन्होंने नई तकनीक और उन्नत डेटा विश्लेषण को फील्ड-आधारित जाँच के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रयोगशाला अवसंरचना को मज़बूत बनाना, विश्लेषणात्मक क्षमताओं का उन्नयन और अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण भी उनके फोकस के प्रमुख क्षेत्र होंगे।

व्यापक संस्थागत लक्ष्य

खनिज अन्वेषण के अलावा, जीएसआई भूस्खलन पूर्व-चेतावनी, हिमनद और क्रायोस्फेरिक अध्ययन, बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में सहयोग और आपदा जोखिम आकलन में भी अपनी भूमिका को सुदृढ़ करता रहेगा। गणवीर ने संस्थान के वैज्ञानिक मानव संसाधन को सशक्त बनाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय मिशन, क्षेत्रीय कार्यालयों तथा राज्य इकाइयों के बीच समन्वय को मज़बूत करने का संकल्प व्यक्त किया। उनके नेतृत्व में जीएसआई का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विज़न में ठोस योगदान देना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों पर — वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तनावों के बीच एक रणनीतिक कमज़ोरी बन चुकी है। 40 ब्लॉकों की नीलामी आंकड़े में प्रगति दिखती है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये ब्लॉक उत्पादन तक कब और कैसे पहुँचते हैं — अन्वेषण से उत्पादन तक की यात्रा भारत में ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है। जीएसआई की विरासत समृद्ध है, परंतु डिजिटल और एआई-संचालित भू-वैज्ञानिक उपकरणों की दौड़ में वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ने का जोखिम भी वास्तविक है। गणवीर के सामने चुनौती केवल अन्वेषण की गति बढ़ाने की नहीं, बल्कि जीएसआई को एक डेटा-संचालित, परिणाम-उन्मुख संस्थान में बदलने की है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिनेश वी. गणवीर कौन हैं और जीएसआई में उनकी नई भूमिका क्या है?
दिनेश विट्ठलराव गणवीर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के 55वें महानिदेशक हैं, जिन्होंने 1 नवंबर 2026 को पदभार संभाला। भूवैज्ञानिक अन्वेषण और संस्थागत नेतृत्व में 32 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ वे खान मंत्रालय के इस प्रमुख कार्यालय की कमान संभाल रहे हैं।
जीएसआई महानिदेशक के रूप में गणवीर की प्रमुख प्राथमिकताएँ क्या हैं?
उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज में तेज़ी, उन्नत तकनीक और डेटा विश्लेषण का उपयोग, प्रयोगशाला अवसंरचना का उन्नयन और अपतटीय अन्वेषण शामिल हैं। इसके साथ ही वे भूस्खलन पूर्व-चेतावनी और आपदा जोखिम आकलन में जीएसआई की भूमिका को भी सुदृढ़ करना चाहते हैं।
महत्त्वपूर्ण खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में जीएसआई की अब तक की उपलब्धियाँ क्या हैं?
गणवीर के राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-दो के कार्यकाल में महत्त्वपूर्ण खनिजों की जाँच में पाँच गुना बढ़ोतरी हुई। 202 महत्त्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों में से 40 की सफल नीलामी हो चुकी है और अन्वेषण लाइसेंस व्यवस्था के तहत 56 में से 11 ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है।
जीएसआई भारत के आत्मनिर्भरता लक्ष्य में कैसे योगदान देता है?
जीएसआई घरेलू खनिज संसाधनों की पहचान और नीलामी-योग्य ब्लॉक तैयार करके आयात-निर्भरता कम करने में सहयोग देता है। महत्त्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करना आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के विज़न का एक अहम हिस्सा है।
गणवीर का खनिज अन्वेषण के अलावा और किन क्षेत्रों में योगदान रहा है?
उन्होंने भीमबेटका रॉक शेल्टर्स और एलोरा गुफाओं जैसी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण से जुड़े भू-वैज्ञानिक अध्ययन किए हैं। इसके अलावा उन्होंने इंडिया-पेरू, रूस-भारत खनन उपसमूह और आईएमएआरसी 2022 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जीएसआई का प्रतिनिधित्व भी किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले