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भारत के खनिज मिशन को बड़ी सफलता: 56 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक नीलाम, 63% से अधिक नीलामी दर

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भारत के खनिज मिशन को बड़ी सफलता: 56 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक नीलाम, 63% से अधिक नीलामी दर

सारांश

भारत के खनिज मिशन ने बड़ी छलाँग लगाई — सातवीं किश्त में 10 नए ब्लॉक नीलाम होने से कुल संख्या 56 पहुँची। गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में पहली बार नीलामी, साथ ही अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉकों की संख्या 11 हुई। आयात निर्भरता घटाने की दिशा में यह ठोस कदम है।

मुख्य बातें

खान मंत्रालय ने सातवीं किश्त में 10 खनिज ब्लॉक नीलाम किए, कुल नीलाम ब्लॉकों की संख्या 56 हुई।
केंद्र सरकार के 88 ब्लॉकों में से 56 नीलाम — 63% से अधिक सफल नीलामी दर।
पहली बार गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई।
इस किश्त में ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम समेत कई खनिज शामिल।
अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) नीलामी के दूसरे चरण के साथ कुल ईएल ब्लॉकों की संख्या 11 हुई; पहली बार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में विस्तार।
नीलामी 23 मार्च 2026 को जारी एनआईटी के तहत शुरू हुई थी।

खान मंत्रालय ने 23 जून 2026 को घोषणा की कि सातवीं किश्त के तहत 10 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी के साथ देश में अब तक नीलाम किए गए ऐसे ब्लॉकों की कुल संख्या 56 हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा नीलामी के लिए रखे गए 88 अद्वितीय ब्लॉकों में से 56 ब्लॉक नीलाम होना 63 प्रतिशत से अधिक की सफल नीलामी दर को दर्शाता है — जो भारत के महत्वपूर्ण खनिज मिशन की दिशा में एक ठोस प्रगति है।

सातवीं किश्त में क्या शामिल था

नीलामी का यह चरण 23 मार्च 2026 को जारी निविदा आमंत्रण सूचना (एनआईटी) के माध्यम से शुरू हुआ था, जिसमें 19 खनिज ब्लॉक पेशकश पर रखे गए थे। इस किश्त में ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लौकोनाइट, रॉक फॉस्फेट और संबंधित खनिज शामिल थे। गौरतलब है कि इस बार केंद्र सरकार ने पहली बार गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की, जिससे देश में खनिज अन्वेषण का भौगोलिक दायरा और विस्तृत हुआ।

नीलामी खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के प्रावधानों के तहत आयोजित की गई।

अन्वेषण लाइसेंस ढाँचे का विस्तार

महत्वपूर्ण खनिज नीलामी के समानांतर, मंत्रालय ने अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) नीलामी के दूसरे चरण को भी सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस चरण के साथ सफलतापूर्वक नीलाम किए गए अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉकों की कुल संख्या 11 हो गई है। पहली बार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में अन्वेषण लाइसेंस ढाँचे का विस्तार किया गया, जिससे गहरे भंडारों में स्थित खनिजों के अन्वेषण के नए अवसर खुले हैं।

यह ढाँचा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की भागीदारी को सुगम बनाकर व्यवस्थित अन्वेषण को सक्षम बनाता है।

रणनीतिक क्षेत्रों पर असर

ये नीलामियाँ ऐसे समय में आई हैं जब भारत स्वच्छ ऊर्जा, विद्युत गतिशीलता (EV), नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में तेज़ी से विस्तार कर रहा है — ये सभी क्षेत्र महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर हैं। घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने से आयात पर निर्भरता कम होगी, जो अब तक चीन और अन्य देशों से होती रही है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और बैटरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।

सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की राह

खान मंत्रालय ने नीलामी कार्यक्रम में सहयोग के लिए सभी बोलीदाताओं, राज्य सरकारों, तकनीकी एजेंसियों और हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और एक पारदर्शी व निवेशक-अनुकूल खनिज पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। आने वाले चरणों में और अधिक राज्यों को इस ढाँचे में शामिल किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये ब्लॉक अन्वेषण से उत्पादन तक कितनी तेज़ी से पहुँचते हैं — एक ऐसी यात्रा जो भारत में ऐतिहासिक रूप से वर्षों नहीं, दशकों में तय हुई है। गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना जैसे नए राज्यों को शामिल करना भौगोलिक विविधता के लिहाज़ से सकारात्मक है, परंतु इन राज्यों में खनन अवसंरचना और पर्यावरणीय मंज़ूरी की गति एक अलग चुनौती है। वैश्विक स्तर पर चीन की दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर पकड़ को देखते हुए भारत की यह पहल रणनीतिक रूप से सही दिशा में है, लेकिन नीलामी से वास्तविक खनन उत्पादन तक की खाई पाटना ही इस मिशन की वास्तविक परीक्षा होगी।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में अब तक कितने महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक नीलाम हो चुके हैं?
केंद्र सरकार द्वारा अब तक कुल 56 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके हैं। यह संख्या नीलामी के लिए रखे गए 88 अद्वितीय ब्लॉकों में से है, जो 63% से अधिक की सफल नीलामी दर दर्शाती है।
सातवीं किश्त की नीलामी में कौन-से खनिज और राज्य शामिल थे?
सातवीं किश्त में ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लौकोनाइट और रॉक फॉस्फेट जैसे खनिज शामिल थे। इस चरण में पहली बार गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई।
अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) नीलामी में क्या नया हुआ?
अन्वेषण लाइसेंस नीलामी के दूसरे चरण के सफल समापन के साथ केंद्र सरकार द्वारा नीलाम किए गए कुल ईएल ब्लॉकों की संख्या 11 हो गई है। पहली बार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में अन्वेषण लाइसेंस ढाँचे का विस्तार किया गया है।
महत्वपूर्ण खनिज नीलामी से भारत को क्या फायदा होगा?
इन नीलामियों से भारत की घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत होगी और EV, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स व रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए ज़रूरी खनिजों के आयात पर निर्भरता कम होगी। यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में अहम कदम है।
सातवीं किश्त की नीलामी प्रक्रिया किस कानूनी ढाँचे के तहत हुई?
नीलामी खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के प्रावधानों के तहत आयोजित की गई। इस चरण की शुरुआत 23 मार्च 2026 को जारी निविदा आमंत्रण सूचना (एनआईटी) से हुई थी, जिसमें 19 ब्लॉक पेशकश पर थे।
राष्ट्र प्रेस
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