17 अगस्त 2026
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क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक नीलामी: 8वें दौर के 20 ब्लॉकों पर पटना में रोड शो, ग्रेफाइट-REE समेत 11 खनिज शामिल

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क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक नीलामी: 8वें दौर के 20 ब्लॉकों पर पटना में रोड शो, ग्रेफाइट-REE समेत 11 खनिज शामिल

सारांश

क्रिटिकल मिनरल की वैश्विक होड़ में भारत ने एक और कदम बढ़ाया — पटना में आयोजित रोड शो में 20 ब्लॉकों की नीलामी के 8वें दौर की जानकारी दी गई, जिसमें ग्रेफाइट, REE और गैलियम जैसे रणनीतिक खनिज शामिल हैं। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और क्लीन एनर्जी आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

मुख्य बातें

केंद्रीय खान मंत्रालय ने 16 अगस्त को पटना में क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक नीलामी के 8वें दौर पर रोड शो आयोजित किया।
नीलामी में 20 मिनरल ब्लॉक शामिल — 3 माइनिंग लीज और 17 कंपोजिट लाइसेंस ब्लॉक ।
ब्लॉकों में ग्रेफाइट, REE, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, टंगस्टन समेत 11 रणनीतिक खनिज शामिल।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने की; बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उपस्थित रहे।
NMEDT स्कीम के तहत कंपोजिट लाइसेंस धारकों को एक्सप्लोरेशन खर्च की आंशिक भरपाई का प्रावधान।
यह पहल आत्मनिर्भर भारत और क्लीन एनर्जी क्षेत्र के लिए घरेलू खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा।

केंद्रीय खान मंत्रालय ने सोमवार, 16 अगस्त को पटना में क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक नीलामी के 8वें दौर पर एक रोड शो और नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (NMEDT) पर एक वर्कशॉप आयोजित की। इस आयोजन का उद्देश्य संभावित निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को नीलामी प्रक्रिया, बोली की शर्तों और खनिज क्षेत्र में निवेश के अवसरों से अवगत कराना है।

नीलामी के 8वें दौर में क्या शामिल है

इस दौर में कुल 20 मिनरल ब्लॉक नीलामी के लिए रखे गए हैं — जिनमें 3 माइनिंग लीज और 17 कंपोजिट लाइसेंस ब्लॉक शामिल हैं। इन ब्लॉकों में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लौकोनाइट जैसे रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण खनिज हैं। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा और क्लीन एनर्जी उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।

मुख्य अतिथि और प्रतिभागी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने की। इस अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य के खान मंत्री प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहे। इसके अलावा जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) और मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (MECL) के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और संभावित निवेशक भी शामिल हुए।

रोड शो में क्या जानकारी दी गई

MECL ने खनिज ब्लॉकों की भूवैज्ञानिक संभावनाओं पर प्रस्तुति दी, जबकि SBICAPS ने नीलामी प्रक्रिया और टेंडर दस्तावेज़ों की जानकारी साझा की। MSTC ने ई-नीलामी की तकनीकी प्रक्रिया समझाई। इसके साथ ही NMEDT स्कीम पर एक विशेष प्रस्तुति हुई, जो कंपोजिट लाइसेंस धारकों को खोज (एक्सप्लोरेशन) खर्च की आंशिक भरपाई प्रदान करती है। कार्यक्रम के अंत में स्टेकहोल्डर्स के साथ ओपन-हाउस चर्चा भी आयोजित की गई।

वर्कशॉप: खनिज खोज पर तकनीकी सत्र

कार्यक्रम के दूसरे चरण में 'खनिज खोज: योजना, क्रियान्वयन और रिपोर्टिंग' विषय पर एक वर्कशॉप आयोजित की गई। इसमें नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी (NGDR) के उपयोग, एक्सप्लोरेशन ब्लॉकों की तैयारी और खनिज खोज रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। DSI के वरिष्ठ अधिकारियों ने तकनीकी सत्र का संचालन किया।

भारत की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

यह पहल खनिज खोज को प्रोत्साहित करने, क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों के विकास में तेज़ी लाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, यह 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न को भी आगे बढ़ाता है — विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकी, क्लीन एनर्जी और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए ज़रूरी खनिजों की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के संदर्भ में। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल की आपूर्ति श्रृंखला में चीन का दबदबा है, और ऐसे में भारत का यह कदम रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दौर में इन ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया की प्रगति और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रोड शो और वर्कशॉप आयोजित करना पर्याप्त नहीं है — असली कसौटी यह होगी कि इन ब्लॉकों पर कितने गंभीर निवेशक बोली लगाते हैं। पिछले दौरों में भी नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन खोज से उत्पादन तक की राह लंबी और जटिल रही है। NMEDT स्कीम के ज़रिए खर्च की आंशिक भरपाई एक सकारात्मक प्रोत्साहन है, पर बिना त्वरित पर्यावरणीय मंज़ूरी और ज़मीनी बुनियादी ढाँचे के, निवेशकों का भरोसा जीतना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक नीलामी का 8वां दौर क्या है?
यह केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा आयोजित नीलामी का 8वाँ चरण है, जिसमें 20 खनिज ब्लॉक — 3 माइनिंग लीज और 17 कंपोजिट लाइसेंस — निजी और सरकारी निवेशकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें ग्रेफाइट, REE, गैलियम और टंगस्टन जैसे रणनीतिक खनिज शामिल हैं।
पटना रोड शो में किन खनिजों की नीलामी पर चर्चा हुई?
रोड शो में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लौकोनाइट — कुल 11 प्रकार के खनिजों से जुड़े ब्लॉकों पर चर्चा की गई। ये सभी खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योग के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।
NMEDT स्कीम क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (NMEDT) एक केंद्रीय योजना है जो कंपोजिट लाइसेंस धारकों को खनिज खोज (एक्सप्लोरेशन) पर हुए खर्च की आंशिक भरपाई करती है। इससे निजी कंपनियों और खनन क्षेत्र में नए निवेशकों को प्रारंभिक लागत का जोखिम कम होता है।
इस रोड शो में कौन-कौन सी संस्थाएँ शामिल थीं?
कार्यक्रम में MECL, SBICAPS, MSTC, GSI और DSI के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तुतियाँ दीं। इसके अलावा बिहार सरकार के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि और संभावित निवेशक भी उपस्थित रहे।
यह पहल भारत की खनिज सुरक्षा के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल की आपूर्ति में चीन का वर्चस्व है, जिससे भारत जैसे देश आयात पर निर्भर हैं। घरेलू खोज और नीलामी को बढ़ावा देकर सरकार इस निर्भरता को कम करना चाहती है, जो क्लीन एनर्जी और उभरती प्रौद्योगिकी के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में ज़रूरी कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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