बलूचिस्तान में जज अब्दुल हकीम काकर की गोली मारकर हत्या, सुरक्षाकर्मी भी शहीद; मस्तुंग में कर्फ्यू
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 23 जुलाई को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल हकीम काकर की गोली मारकर हत्या कर दी। क्वेटा से मस्तुंग जा रहे उनके काफिले पर वली खान क्रॉसिंग के पास अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें उनका सुरक्षाकर्मी भी मारा गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तारिक लशारी सहित दो अन्य लोग इस हमले में घायल हुए हैं।
हमले का घटनाक्रम
बलूचिस्तान गृह विभाग के अधिकारी बाबर यूसुफजई ने बताया कि न्यायाधीश काकर और न्यायाधीश लशारी क्वेटा से मस्तुंग की ओर जा रहे थे, तभी वली खान क्रॉसिंग के निकट हमलावरों ने उनके काफिले को निशाना बनाया। जज काकर और उनके सुरक्षाकर्मी की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घायलों को तत्काल मस्तुंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
प्रमुख दैनिक डॉन ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से इस घटना की पुष्टि की है।
एक दिन पहले भी हुआ था हमला
यह हमला ऐसे समय में हुआ जब उससे मात्र एक दिन पहले मस्तुंग के खुद कोचा इलाके में कराची जा रही एक यात्री बस पर भी हमला किया गया था। उस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी और पाँच लोग घायल हुए थे। हमलावरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक पुल को भी बम से उड़ा दिया था। घटना के बाद प्रशासन ने बुधवार रात 9 बजे से खुद कोचा उप-तहसील में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई
ताज़ा हमला उस समय हुआ है जब पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इसी सप्ताह मस्तुंग में तीन कथित आतंकवादियों को मार गिराया था और दो आत्मघाती हमलावरों तथा उनके एक सहयोगी को गिरफ्तार किया था। इसके अतिरिक्त, सुराब जिले में भी सात कथित आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत से बलूचिस्तान में इस तरह के हमलों की आवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके बाद प्रांत भर में व्यापक आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाया जा रहा है।
कानून-व्यवस्था की स्थिति
बलूचिस्तान गृह विभाग ने खुद कोचा इलाके के संवेदनशील हालात को देखते हुए अनिश्चितकालीन कर्फ्यू का फैसला लिया। अधिकारियों के अनुसार, बिगड़ती कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए यह कदम आवश्यक था। न्यायपालिका को सीधे निशाना बनाया जाना इस संकट की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
आगे क्या होगा
न्यायाधीश की हत्या के बाद पाकिस्तान में न्यायिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ते हमलों के मद्देनज़र संघीय और प्रांतीय सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने का दबाव बढ़ेगा।