बलूचिस्तान में क्रिकेट खेलते दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या, ISKP पर संदेह; क्वेटा-कराची हाईवे जाम
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मस्तुंग जिले में शुक्रवार, 17 जुलाई को मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने शाम को क्रिकेट खेल रहे दो ईसाई युवकों — 21 वर्षीय आयुष मसीह और 24 वर्षीय डोमनिक मसीह — को गोली मारकर मौके पर ही मार डाला। अल्पसंख्यक अधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने इस हत्याकांड पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान लगातार खतरे में है।
हमले का घटनाक्रम
वीओपीएम के अनुसार, यह वारदात शमसाबाद इलाके में हुई, जो स्थानीय ईसाई बस्ती से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों युवक अपने दोस्तों के साथ शाम को क्रिकेट खेल रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर सवार हमलावर वहाँ पहुँचे और उन पर गोलियाँ चला दीं। आयुष मसीह और डोमनिक मसीह दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
ISKP पर संदेह
वीओपीएम ने उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रोविंस (ISKP) का हाथ होने की आशंका है। यह इस्लामिक स्टेट का स्थानीय संगठन है, जो बलूचिस्तान के कुछ इलाकों में कथित तौर पर सक्रिय है और पहले भी अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बना चुका है। हालाँकि अधिकारियों की ओर से किसी समूह की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
समुदाय का आक्रोश और हाईवे जाम
वीओपीएम के मुताबिक, इस हत्याकांड से स्थानीय ईसाई समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश फैल गया। परिवार और दोस्त एकत्र हुए और कई लोगों ने खुद को असहाय और भयभीत महसूस किया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने दोनों युवकों के शव एंबुलेंस में रखकर क्वेटा-कराची हाईवे को जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हिंसा का इतिहास
वीओपीएम ने स्पष्ट किया कि आयुष और डोमनिक की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। संगठन के अनुसार, पिछले दस वर्षों में बलूचिस्तान में कम से कम 18 ईसाइयों की हत्या की जा चुकी है — कुछ चर्चों पर हुए बम हमलों में, और कुछ को उनकी धार्मिक या जातीय पहचान के कारण सीधे निशाना बनाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे पाकिस्तान में ईसाई समुदाय झूठे ईशनिंदा के आरोपों, भीड़ द्वारा हिंसा और व्यापक भेदभाव का सामना कर रहा है।
व्यापक संदर्भ और आगे की स्थिति
वीओपीएम ने कराची और पंजाब की हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि सांप्रदायिक तनाव किस तरह तेज़ी से घरों और परिवारों पर हमलों में बदल सकता है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। गौरतलब है कि इस हत्याकांड के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र भी बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर टिकी है।