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बलूचिस्तान में क्रिकेट खेलते दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या, ISKP पर संदेह; क्वेटा-कराची हाईवे जाम

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बलूचिस्तान में क्रिकेट खेलते दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या, ISKP पर संदेह; क्वेटा-कराची हाईवे जाम

सारांश

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में शाम को क्रिकेट खेलते दो ईसाई युवकों को मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी। ISKP पर संदेह है। गुस्साए समुदाय ने शव रखकर क्वेटा-कराची हाईवे जाम किया। दस साल में बलूचिस्तान में कम से कम 18 ईसाई मारे जा चुके हैं।

मुख्य बातें

17 जुलाई को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के शमसाबाद इलाके में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या की।
मृतक आयुष मसीह (21 वर्ष) और डोमनिक मसीह (24 वर्ष) शाम को दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रोविंस (ISKP) का हाथ होने की आशंका है; आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने शव एंबुलेंस में रखकर क्वेटा-कराची हाईवे को कई घंटों के लिए जाम किया।
वीओपीएम के अनुसार पिछले दस वर्षों में बलूचिस्तान में कम से कम 18 ईसाइयों की हत्या हो चुकी है।
पाकिस्तान में ईसाई समुदाय झूठे ईशनिंदा के आरोपों, भीड़ हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मस्तुंग जिले में शुक्रवार, 17 जुलाई को मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने शाम को क्रिकेट खेल रहे दो ईसाई युवकों — 21 वर्षीय आयुष मसीह और 24 वर्षीय डोमनिक मसीह — को गोली मारकर मौके पर ही मार डाला। अल्पसंख्यक अधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने इस हत्याकांड पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान लगातार खतरे में है।

हमले का घटनाक्रम

वीओपीएम के अनुसार, यह वारदात शमसाबाद इलाके में हुई, जो स्थानीय ईसाई बस्ती से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों युवक अपने दोस्तों के साथ शाम को क्रिकेट खेल रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर सवार हमलावर वहाँ पहुँचे और उन पर गोलियाँ चला दीं। आयुष मसीह और डोमनिक मसीह दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

ISKP पर संदेह

वीओपीएम ने उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रोविंस (ISKP) का हाथ होने की आशंका है। यह इस्लामिक स्टेट का स्थानीय संगठन है, जो बलूचिस्तान के कुछ इलाकों में कथित तौर पर सक्रिय है और पहले भी अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बना चुका है। हालाँकि अधिकारियों की ओर से किसी समूह की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

समुदाय का आक्रोश और हाईवे जाम

वीओपीएम के मुताबिक, इस हत्याकांड से स्थानीय ईसाई समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश फैल गया। परिवार और दोस्त एकत्र हुए और कई लोगों ने खुद को असहाय और भयभीत महसूस किया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने दोनों युवकों के शव एंबुलेंस में रखकर क्वेटा-कराची हाईवे को जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।

बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हिंसा का इतिहास

वीओपीएम ने स्पष्ट किया कि आयुष और डोमनिक की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। संगठन के अनुसार, पिछले दस वर्षों में बलूचिस्तान में कम से कम 18 ईसाइयों की हत्या की जा चुकी है — कुछ चर्चों पर हुए बम हमलों में, और कुछ को उनकी धार्मिक या जातीय पहचान के कारण सीधे निशाना बनाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे पाकिस्तान में ईसाई समुदाय झूठे ईशनिंदा के आरोपों, भीड़ द्वारा हिंसा और व्यापक भेदभाव का सामना कर रहा है।

व्यापक संदर्भ और आगे की स्थिति

वीओपीएम ने कराची और पंजाब की हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि सांप्रदायिक तनाव किस तरह तेज़ी से घरों और परिवारों पर हमलों में बदल सकता है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। गौरतलब है कि इस हत्याकांड के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र भी बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत उदासीनता का प्रमाण है। ISKP पर संदेह चिंताजनक है, क्योंकि यह संगठन पहले भी अल्पसंख्यकों को निशाना बना चुका है और राज्य की जवाबदेही का अभाव इसे और साहसी बनाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन घटनाओं को अलग-थलग दिखाती है, जबकि असल तस्वीर यह है कि ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग, भीड़ न्याय और सशस्त्र हमले — ये तीनों मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जिसमें अल्पसंख्यकों का जीना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में किन दो ईसाई युवकों की हत्या हुई?
मस्तुंग जिले के शमसाबाद इलाके में आयुष मसीह (21 वर्ष) और डोमनिक मसीह (24 वर्ष) की मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। दोनों युवक शाम को दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे जब यह हमला हुआ।
इस हमले के पीछे किसका हाथ बताया जा रहा है?
वीओपीएम ने उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर कहा है कि इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रोविंस (ISKP) का हाथ होने की आशंका है। हालाँकि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अभी तक किसी संगठन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्वेटा-कराची हाईवे क्यों जाम किया गया?
हत्याकांड से आक्रोशित स्थानीय ईसाई समुदाय के लोगों ने दोनों युवकों के शव एंबुलेंस में रखकर क्वेटा-कराची हाईवे को जाम कर दिया। यह विरोध-प्रदर्शन कई घंटों तक चला, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
पाकिस्तान में ईसाई अल्पसंख्यकों की स्थिति कैसी है?
वीओपीएम के अनुसार पिछले दस वर्षों में बलूचिस्तान में कम से कम 18 ईसाइयों की हत्या हो चुकी है। पूरे पाकिस्तान में ईसाई समुदाय झूठे ईशनिंदा के आरोपों, भीड़ द्वारा हिंसा और लगातार भेदभाव का सामना कर रहा है।
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने क्या माँग की है?
वीओपीएम ने पाकिस्तानी अधिकारियों से दोषियों को तत्काल न्याय के कटघरे में लाने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। संगठन ने इस हत्याकांड को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की एक कड़ी बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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