4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर पाक सेना की टिप्पणी हताशा का प्रमाण: विदेश मंत्रालय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर पाक सेना की टिप्पणी हताशा का प्रमाण: विदेश मंत्रालय

सारांश

भारत-अफगानिस्तान की बढ़ती नज़दीकी पाकिस्तान को रास नहीं आ रही। पाक सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ की 'मालिक-गुलाम' वाली टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने पलटवार करते हुए इसे इस्लामाबाद की असुरक्षा और हताशा का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त को पाक सेना की टिप्पणी को पाकिस्तान की हताशा और असुरक्षा का प्रमाण बताया।
पाक सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने भारत-तालिबान संबंधों को 'मालिक और गुलाम' जैसा करार दिया था।
विवाद की जड़ अफगान कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी का वह बयान है जिसमें उन्होंने भारत-अफगानिस्तान के लोगों का डीएनए एक जैसा बताया था।
पिछले कुछ महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
पाक-अफगान सीमा तनाव के बीच यह घटनाक्रम क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान के बढ़ते अलगाव को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त को स्पष्ट किया कि भारत-अफगानिस्तान के बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों पर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की विवादित टिप्पणी इस्लामाबाद की गहरी असुरक्षा और हताशा को उजागर करती है। मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जायसवाल ने कहा, 'पाकिस्तानी प्रवक्ता की टिप्पणी भारत-अफगानिस्तान के सकारात्मक रिश्तों को लेकर पाकिस्तानी सरकार की असुरक्षा और हताशा को दिखाते हैं।'

पाक सेना प्रवक्ता का विवादित बयान

रावलपिंडी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने भारत और अफगानिस्तान के बढ़ते रिश्तों पर खुलकर आपत्ति जताई। उन्होंने भारत और तालिबान के संबंधों को 'मालिक और गुलाम' जैसा करार दिया और धार्मिक आयतों का हवाला देते हुए भड़काऊ बयानबाज़ी की। इसके अलावा, उन्होंने तालिबान सरकार पर भारत के इशारों पर काम करने का आरोप भी लगाया।

विवाद की जड़: अफगान मंत्री का 'डीएनए' वाला बयान

यह विवाद तब उभरा जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी ने हाल ही में भारत का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों का डीएनए एक ही है — यह बात उन्होंने दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ में कही थी। इसी बयान ने पाकिस्तान को भड़काया।

पाक सेना प्रवक्ता ने कुरान की एक आयत का उल्लेख करते हुए कहा, 'हम शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने (अफगान) यह बात मान ली। मैं आम अफगान लोगों की नहीं, तालिबान सरकार की बात कर रहा हूँ। आम अफगान जनता इस सरकार के जुल्म से परेशान है, इसलिए दोनों का डीएनए एक जैसा नहीं हो सकता।' उन्होंने तालिबान सरकार पर महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार और 'बैठे-बैठे फतवे जारी करने' का भी आरोप लगाया।

भारत-अफगानिस्तान संबंधों में हालिया सुधार

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क सीमित रहा था, लेकिन कृषि मंत्री उमरी की नई दिल्ली यात्रा इस बदलाव का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद और तनाव चरम पर है।

क्षेत्रीय कूटनीति पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अफगानिस्तान की नज़दीकी पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से असुविधाजनक है, क्योंकि इस्लामाबाद पारंपरिक रूप से काबुल पर अपना प्रभाव मानता रहा है। पाक सेना की इस तीखी प्रतिक्रिया को विश्लेषक इस बदलते समीकरण से उपजी बेचैनी के रूप में देख रहे हैं। भारत का रुख स्पष्ट है — वह अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के अधिकार को किसी तीसरे देश की आपत्ति से नहीं रोकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि भारत बिना किसी शोर-शराबे के अफगान सरकार से व्यावहारिक संबंध बना रहा है। भारत की यह चुप्पी और संयमित प्रतिक्रिया उसकी कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है। असली सवाल यह है कि क्या तालिबान, जो पाकिस्तान के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में माना जाता था, अब नई दिल्ली की ओर झुक रहा है — और यही बात इस्लामाबाद को सबसे ज़्यादा परेशान कर रही है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान ने भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर क्या विवादित बयान दिया?
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने रावलपिंडी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और तालिबान के संबंधों को 'मालिक और गुलाम' जैसा बताया और धार्मिक आयतों का हवाला देते हुए भड़काऊ बयानबाज़ी की। उन्होंने तालिबान सरकार पर भारत के इशारों पर काम करने का आरोप भी लगाया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के बयान पर क्या कहा?
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त को कहा कि पाकिस्तानी प्रवक्ता की टिप्पणी भारत-अफगानिस्तान के सकारात्मक रिश्तों को लेकर पाकिस्तानी सरकार की असुरक्षा और हताशा को दर्शाती है। भारत ने इसे पड़ोसी देश की बेचैनी का प्रमाण बताया।
अफगान मंत्री के 'डीएनए' वाले बयान से यह विवाद कैसे शुरू हुआ?
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी ने भारत यात्रा के दौरान कहा था कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों का डीएनए एक ही है। यह बयान दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ में दिया गया था, जिसने पाकिस्तान को भड़काया।
हाल के महीनों में भारत-अफगानिस्तान संबंध कैसे बदले हैं?
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ा है। तालिबान के कृषि मंत्री की नई दिल्ली यात्रा इस सुधार का ताज़ा उदाहरण है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद और तनाव बना हुआ है।
पाकिस्तान भारत-अफगानिस्तान की नज़दीकी से इतना परेशान क्यों है?
पाकिस्तान पारंपरिक रूप से अफगानिस्तान को अपने प्रभाव क्षेत्र में मानता रहा है। भारत और तालिबान सरकार के बीच बढ़ता संपर्क इस्लामाबाद की उस रणनीतिक स्थिति को कमज़ोर करता है। आलोचकों का कहना है कि पाक सेना की यह आक्रामक प्रतिक्रिया उसी बेचैनी की अभिव्यक्ति है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले