भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर पाक सेना की टिप्पणी हताशा का प्रमाण: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 4 अगस्त को स्पष्ट किया कि भारत-अफगानिस्तान के बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों पर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की विवादित टिप्पणी इस्लामाबाद की गहरी असुरक्षा और हताशा को उजागर करती है। मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जायसवाल ने कहा, 'पाकिस्तानी प्रवक्ता की टिप्पणी भारत-अफगानिस्तान के सकारात्मक रिश्तों को लेकर पाकिस्तानी सरकार की असुरक्षा और हताशा को दिखाते हैं।'
पाक सेना प्रवक्ता का विवादित बयान
रावलपिंडी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने भारत और अफगानिस्तान के बढ़ते रिश्तों पर खुलकर आपत्ति जताई। उन्होंने भारत और तालिबान के संबंधों को 'मालिक और गुलाम' जैसा करार दिया और धार्मिक आयतों का हवाला देते हुए भड़काऊ बयानबाज़ी की। इसके अलावा, उन्होंने तालिबान सरकार पर भारत के इशारों पर काम करने का आरोप भी लगाया।
विवाद की जड़: अफगान मंत्री का 'डीएनए' वाला बयान
यह विवाद तब उभरा जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी ने हाल ही में भारत का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों का डीएनए एक ही है — यह बात उन्होंने दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ में कही थी। इसी बयान ने पाकिस्तान को भड़काया।
पाक सेना प्रवक्ता ने कुरान की एक आयत का उल्लेख करते हुए कहा, 'हम शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने (अफगान) यह बात मान ली। मैं आम अफगान लोगों की नहीं, तालिबान सरकार की बात कर रहा हूँ। आम अफगान जनता इस सरकार के जुल्म से परेशान है, इसलिए दोनों का डीएनए एक जैसा नहीं हो सकता।' उन्होंने तालिबान सरकार पर महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार और 'बैठे-बैठे फतवे जारी करने' का भी आरोप लगाया।
भारत-अफगानिस्तान संबंधों में हालिया सुधार
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क सीमित रहा था, लेकिन कृषि मंत्री उमरी की नई दिल्ली यात्रा इस बदलाव का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद और तनाव चरम पर है।
क्षेत्रीय कूटनीति पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अफगानिस्तान की नज़दीकी पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से असुविधाजनक है, क्योंकि इस्लामाबाद पारंपरिक रूप से काबुल पर अपना प्रभाव मानता रहा है। पाक सेना की इस तीखी प्रतिक्रिया को विश्लेषक इस बदलते समीकरण से उपजी बेचैनी के रूप में देख रहे हैं। भारत का रुख स्पष्ट है — वह अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के अधिकार को किसी तीसरे देश की आपत्ति से नहीं रोकेगा।