अफगान तालिबान के खिलाफ पाकिस्तान की पुरानी प्रॉक्सी रणनीति: खलीलजाद ने जताई चिंता, उल्टा पड़ सकता है दांव
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान अफगान तालिबान के खिलाफ एक बार फिर अपनी दशकों पुरानी प्रॉक्सी रणनीति की ओर लौटता दिख रहा है। साउथ एशिया प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना कथित तौर पर अफगान गुटों को भर्ती कर उन्हें हथियार मुहैया करा रही है, ताकि इस्लामाबाद विरोधी विद्रोही समूहों — विशेषकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) — से मुकाबला किया जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।
खलीलजाद की चेतावनी
अफगानिस्तान में अमेरिका के पूर्व विशेष दूत जलमय खलीलजाद ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने उन खबरों का हवाला दिया जिनमें कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना ने TTP से मुकाबले के लिए अफगानों को हथियार देना शुरू कर दिया है।
खलीलजाद ने चेतावनी दी, 'मौजूदा परिस्थितियों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध और भी खराब होने की आशंका है।' उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर पहले से ही कम तीव्रता वाला सशस्त्र संघर्ष जारी है।
पाकिस्तान का इनकार और पृष्ठभूमि
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इन आरोपों को 'निराधार और भ्रामक' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। इसके बावजूद विश्लेषकों का कहना है कि यह कथित कदम इस्लामाबाद के सुरक्षा प्रतिष्ठान की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक सोच को ही दर्शाता है।
गौरतलब है कि इस्लामाबाद करीब चार दशकों तक अफगान तालिबान को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करता रहा — भारत को अफगानिस्तान में पैर जमाने से रोकने और काबुल में अपने अनुकूल सरकार सुनिश्चित करने के लिए। लेकिन अब दोनों के संबंधों में कड़वाहट आ चुकी है।
TTP विवाद और सीमा संघर्ष
पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में TTP को शरण दे रहा है। काबुल पर TTP के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाने के बावजूद इस्लामाबाद को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, 'काबुल के अपने वैचारिक सहयोगियों पर लगाम लगाने से इनकार करने से निराश इस्लामाबाद अपनी ऐतिहासिक रणनीति पर लौटता दिखाई दे रहा है — यानी प्रॉक्सी के मुकाबले प्रॉक्सी का इस्तेमाल।' रिपोर्ट में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले में हाल ही में पाकिस्तानी बलों और अफगान तालिबान के बीच भारी तोपखाने से हुई गोलीबारी का भी उल्लेख है, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि तालिबान की सीमा चौकियाँ नष्ट कर दी गईं।
रणनीति का जोखिम
रिपोर्ट ने इस रणनीति को अत्यंत जोखिम भरा करार दिया है। पाकिस्तान का अतीत इस बात का गवाह है कि विदेशों में हितों के लिए सशस्त्र गुटों का इस्तेमाल करने की नीति कई बार उसी के खिलाफ पलट गई। जिन समूहों को दूसरे देशों में लड़ने के लिए हथियार और समर्थन दिया गया, बाद में उन्होंने पाकिस्तान को ही निशाना बनाया।
रिपोर्ट के अनुसार, नए अफगान गुटों को कथित तौर पर हथियार मुहैया कराने से अनियंत्रित स्थानीय मिलिशिया के उभरने का खतरा है, जो पहले से अस्थिर सीमा क्षेत्र में हिंसा और बढ़ा सकती है।
आगे क्या हो सकता है
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि नए अफगान गुटों को हथियार देने संबंधी खबरों की पुष्टि होती है, तो यह परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान की ओर से उठाया गया एक अत्यंत जोखिम भरा कदम होगा। आलोचकों का कहना है कि अतीत में पैदा किए गए खतरों पर काबू पाने की कोशिश में पाकिस्तान भविष्य के लिए नए और संभावित रूप से अधिक खतरनाक विरोधियों को तैयार कर सकता है।