पाकिस्तान रेलवे की सुरक्षा पर सवाल: शालीमार एक्सप्रेस हादसे के बाद खामियों का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षा खामियां: जांच में कई कोचों में गंभीर तकनीकी खामियां पाई गईं।
- जिम्मेदारी: ड्राइवर को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
- सिस्टम में सुधार: रेलवे को खामियों को दूर करने की आवश्यकता है।
- यात्री सुरक्षा: यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
- प्रतिष्ठा में गिरावट: सुरक्षा चूक से रेलवे की छवि प्रभावित हो सकती है।
नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में पाकिस्तान में शालीमार एक्सप्रेस से जुड़ी एक ट्रेन दुर्घटना ने रेलवे सुरक्षा और जवाबदेही पर गहरी चिंता जताई है। यह भी सवाल उठता है कि क्या रेलवे के संचालन में मौजूद खामियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुक्कुर में की गई एक आंतरिक जांच में ट्रेन के लगभग 60 प्रतिशत कोच में गंभीर खामियां पाई गईं।
18 कोचों में से 10 में गंभीर तकनीकी समस्या обнаружित हुई, जिसमें से नौ के ब्रेक सिलेंडर सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे। यह इस बात का संकेत है कि ट्रेन रवाना होने से पहले ही खतरनाक स्थिति में थी।
रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि इतनी खामियों के बावजूद शुरुआती जांच में मुख्य रूप से ड्राइवर और सहायक को जिम्मेदार ठहराने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने परिचालन संबंधी खामियों को उजागर किया, जैसे कि लाल सिग्नल को पार करना और ट्रेन को सही तरीके से नियंत्रित न कर पाना।
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही ये संभावित कारण हो सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि खराब ब्रेकिंग सिस्टम वाली ट्रेन को चलने की अनुमति देना उचित नहीं है।
इस घटना ने पाकिस्तान रेलवे के भीतर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेलवे का संचालन केवल एक टीम का कार्य नहीं होता। इसमें रखरखाव टीमों से लेकर निरीक्षण अधिकारी और ट्रेन के कर्मचारी सभी शामिल होते हैं।
जब ब्रेक जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम ठीक से कार्य नहीं करते, तो गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है, जिससे ड्राइवरों के लिए आपात स्थितियों को संभालना कठिन हो जाता है।
निरीक्षण रिपोर्ट में कुछ कोचों को "डमी कोच" भी कहा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खराब उपकरणों के साथ ट्रेन चलाना कोई अकेली घटना नहीं है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह रखरखाव के तरीकों में संभावित कमियों और ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय उन्हें चालू रखने को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
ट्रेन ड्राइवरों ने पहले भी इसी तरह की शिकायतें की हैं और कहा है कि खराब उपकरणों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना गलत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल की यह घटना उन चिंताओं को सही साबित करती है और सुरक्षा मानकों पर एक नई बहस को जन्म देती है।
निरीक्षण और नियामक जांच सहित निगरानी तंत्रों की कार्यकुशलता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
यह तथ्य कि इतनी गंभीर खामियों वाली ट्रेन इन प्रक्रियाओं से गुजर गई, यह दर्शाता है कि या तो नियमों का पालन सख्ती से नहीं हो रहा है या फिर सिस्टम में जोखिम स्वीकार करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है।
यह घटना तब हुई है जब पाकिस्तान रेलवे अपनी छवि सुधारने और जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकार की सुरक्षा चूक उसकी प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुँचा सकती है और यात्रियों में संदेह उत्पन्न कर सकती है।