उत्तर कोरिया बिना सूचना छोड़ता है बांध का पानी, दक्षिण कोरिया ने कहा— 'अब हम तैयार हैं'
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल ने 28 जुलाई को घोषणा की कि उत्तर कोरिया द्वारा सीमा के निकट स्थित बांधों से बिना पूर्व सूचना पानी छोड़े जाने की स्थिति से निपटने के लिए उसकी तैयारियाँ पूरी तरह पुख्ता हैं। मानसून के मौसम में भारी वर्षा के बीच यह आशंका प्रबल है कि प्योंगयांग एक बार फिर बिना किसी पूर्व-सूचना के पानी छोड़ सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के पास ठोस और प्रभावी योजनाएँ मौजूद हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया, "सरकार के पास सीमा क्षेत्रों के निवासियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय तैयार हैं।"
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच हुए एक पुराने समझौते के तहत उत्तर कोरिया को बांध से पानी छोड़ने से पहले दक्षिण कोरिया को सूचित करना आवश्यक था। परंतु प्योंगयांग ने 2014 के बाद से इस प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया है।
तकनीकी निगरानी: नया भरोसा
अधिकारी के अनुसार, पहले उत्तर कोरिया की ओर से पानी छोड़े जाने की स्थिति पर नज़र रखने के साधन बेहद सीमित थे। अब उपग्रह तस्वीरों, बांध के गेट की रियल-टाइम निगरानी और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय से पानी के प्रवाह और संभावित खतरे का आकलन किया जा रहा है।
सामान्य परिस्थितियों में उपग्रह दिन में तीन से चार बार संबंधित क्षेत्रों की तस्वीरें लेते हैं, जबकि आपात स्थिति में इन्हें वास्तविक समय की निगरानी के लिए तैनात किया जाता है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद उसे दक्षिण कोरिया के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचने में लगभग छह घंटे लगते हैं — जो सरकार को बाढ़ से बचाव की तैयारी के लिए पर्याप्त समय देता है।
ह्वांगगांग बांध: ताज़ा घटना
पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया ने इमजिन नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित ह्वांगगांग बांध से पानी छोड़ा था। यह नदी सैन्य सीमा रेखा को पार करते हुए दक्षिण कोरिया में प्रवेश करती है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया था। यह ऐसी पहली घटना नहीं है — मानसून के दौरान उत्तर कोरिया की ओर से अचानक पानी छोड़े जाने की घटनाएँ दक्षिण कोरिया में बाढ़ का कारण बनती रही हैं।
आम जनता पर असर
सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे नागरिक हर मानसून में इस खतरे की आशंका के साथ जीते हैं। बिना पूर्व सूचना के बांध का पानी छोड़े जाने से अचानक बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जिससे जान-माल दोनों को नुकसान पहुँच सकता है। दक्षिण कोरिया सरकार का कहना है कि अब वह केवल उत्तर कोरिया की अग्रिम सूचना पर निर्भर नहीं है।
क्या होगा आगे
दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव को देखते हुए निकट भविष्य में उत्तर कोरिया द्वारा सूचना-साझाकरण समझौते को पुनः लागू किए जाने की संभावना कम है। दक्षिण कोरिया की सरकार ने संकेत दिया है कि वह तकनीकी निगरानी और अंतर-एजेंसी समन्वय को और मज़बूत करती रहेगी, ताकि किसी भी अचानक स्थिति में नागरिकों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।