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उत्तर कोरिया बिना सूचना छोड़ता है बांध का पानी, दक्षिण कोरिया ने कहा— 'अब हम तैयार हैं'

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उत्तर कोरिया बिना सूचना छोड़ता है बांध का पानी, दक्षिण कोरिया ने कहा— 'अब हम तैयार हैं'

सारांश

उत्तर कोरिया ने 2014 के बाद से बांध से पानी छोड़ने की पूर्व-सूचना देना बंद कर दिया है। मानसून की भारी बारिश के बीच दक्षिण कोरिया ने कहा है कि उपग्रह निगरानी और छह घंटे की प्राकृतिक चेतावनी-खिड़की से वह अब किसी भी अचानक बाढ़ के लिए तैयार है।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने 2014 के बाद से बांध से पानी छोड़ने से पहले दक्षिण कोरिया को सूचित करने का समझौता नहीं निभाया है।
पिछले सप्ताह ह्वांगगांग बांध से पानी छोड़े जाने से इमजिन नदी के ज़रिए सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हुआ।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा— उपग्रह दिन में तीन से चार बार निगरानी करते हैं; आपात स्थिति में रियल-टाइम इस्तेमाल होते हैं।
उत्तर कोरिया से छोड़ा गया पानी दक्षिण कोरिया के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचने में लगभग छह घंटे लगते हैं — जो बचाव के लिए पर्याप्त समय है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि वह अब उत्तर कोरिया की अग्रिम सूचना पर निर्भर नहीं है।

दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल ने 28 जुलाई को घोषणा की कि उत्तर कोरिया द्वारा सीमा के निकट स्थित बांधों से बिना पूर्व सूचना पानी छोड़े जाने की स्थिति से निपटने के लिए उसकी तैयारियाँ पूरी तरह पुख्ता हैं। मानसून के मौसम में भारी वर्षा के बीच यह आशंका प्रबल है कि प्योंगयांग एक बार फिर बिना किसी पूर्व-सूचना के पानी छोड़ सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के पास ठोस और प्रभावी योजनाएँ मौजूद हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया, "सरकार के पास सीमा क्षेत्रों के निवासियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय तैयार हैं।"

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच हुए एक पुराने समझौते के तहत उत्तर कोरिया को बांध से पानी छोड़ने से पहले दक्षिण कोरिया को सूचित करना आवश्यक था। परंतु प्योंगयांग ने 2014 के बाद से इस प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया है।

तकनीकी निगरानी: नया भरोसा

अधिकारी के अनुसार, पहले उत्तर कोरिया की ओर से पानी छोड़े जाने की स्थिति पर नज़र रखने के साधन बेहद सीमित थे। अब उपग्रह तस्वीरों, बांध के गेट की रियल-टाइम निगरानी और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय से पानी के प्रवाह और संभावित खतरे का आकलन किया जा रहा है।

सामान्य परिस्थितियों में उपग्रह दिन में तीन से चार बार संबंधित क्षेत्रों की तस्वीरें लेते हैं, जबकि आपात स्थिति में इन्हें वास्तविक समय की निगरानी के लिए तैनात किया जाता है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद उसे दक्षिण कोरिया के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचने में लगभग छह घंटे लगते हैं — जो सरकार को बाढ़ से बचाव की तैयारी के लिए पर्याप्त समय देता है।

ह्वांगगांग बांध: ताज़ा घटना

पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया ने इमजिन नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित ह्वांगगांग बांध से पानी छोड़ा था। यह नदी सैन्य सीमा रेखा को पार करते हुए दक्षिण कोरिया में प्रवेश करती है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया था। यह ऐसी पहली घटना नहीं है — मानसून के दौरान उत्तर कोरिया की ओर से अचानक पानी छोड़े जाने की घटनाएँ दक्षिण कोरिया में बाढ़ का कारण बनती रही हैं।

आम जनता पर असर

सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे नागरिक हर मानसून में इस खतरे की आशंका के साथ जीते हैं। बिना पूर्व सूचना के बांध का पानी छोड़े जाने से अचानक बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जिससे जान-माल दोनों को नुकसान पहुँच सकता है। दक्षिण कोरिया सरकार का कहना है कि अब वह केवल उत्तर कोरिया की अग्रिम सूचना पर निर्भर नहीं है।

क्या होगा आगे

दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव को देखते हुए निकट भविष्य में उत्तर कोरिया द्वारा सूचना-साझाकरण समझौते को पुनः लागू किए जाने की संभावना कम है। दक्षिण कोरिया की सरकार ने संकेत दिया है कि वह तकनीकी निगरानी और अंतर-एजेंसी समन्वय को और मज़बूत करती रहेगी, ताकि किसी भी अचानक स्थिति में नागरिकों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित दबाव-नीति का हिस्सा लगता है — 2014 के बाद से हर मानसून में यही पैटर्न दोहराया जाता है। दक्षिण कोरिया की उपग्रह-आधारित निगरानी प्रणाली तकनीकी रूप से सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि छह घंटे की चेतावनी-खिड़की में सीमावर्ती गाँवों को वास्तव में कितनी तेज़ी से खाली कराया जा सकता है। द्विपक्षीय समझौते की निरर्थकता यह भी दर्शाती है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर विश्वास-निर्माण के तंत्र किस हद तक ध्वस्त हो चुके हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर कोरिया बिना सूचना बांध से पानी क्यों छोड़ता है?
उत्तर कोरिया ने 2014 के बाद से दोनों देशों के बीच हुए उस समझौते का पालन बंद कर दिया है जिसके तहत बांध से पानी छोड़ने से पहले दक्षिण कोरिया को सूचित करना ज़रूरी था। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को इसकी प्रमुख वजह माना जाता है।
ह्वांगगांग बांध से पानी छोड़ने का दक्षिण कोरिया पर क्या असर पड़ता है?
ह्वांगगांग बांध इमजिन नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित है, जो सैन्य सीमा रेखा पार कर दक्षिण कोरिया में प्रवेश करती है। अचानक पानी छोड़े जाने से सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जिससे वहाँ रहने वाले नागरिकों की जान-माल को खतरा होता है।
दक्षिण कोरिया अब बाढ़ की चेतावनी कैसे देता है?
दक्षिण कोरिया अब उपग्रह तस्वीरों, बांध के गेट की रियल-टाइम निगरानी और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय के ज़रिए खतरे का आकलन करता है। सामान्य स्थिति में उपग्रह दिन में तीन से चार बार तस्वीरें लेते हैं, जबकि आपात स्थिति में इन्हें वास्तविक समय की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
उत्तर कोरिया से छोड़े गए पानी को दक्षिण कोरिया पहुँचने में कितना समय लगता है?
अधिकारियों के अनुसार, उत्तर कोरिया की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद उसे दक्षिण कोरिया के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचने में लगभग छह घंटे लगते हैं। यह समय सरकार को बाढ़ से बचाव की तैयारी और नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
क्या उत्तर-दक्षिण कोरिया के बीच बांध-सूचना समझौता फिर लागू हो सकता है?
फिलहाल दोनों देशों के बीच संबंधों में गहरा तनाव है और 2014 के बाद से उत्तर कोरिया ने इस समझौते का पालन नहीं किया है। निकट भविष्य में इसके बहाल होने की संभावना कम दिखती है, यही कारण है कि दक्षिण कोरिया ने स्वतंत्र तकनीकी निगरानी प्रणाली विकसित की है।
राष्ट्र प्रेस
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