17 जुलाई 2026
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अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली बसने वालों की घुसपैठ पर कतर की कड़ी निंदा, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया

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अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली बसने वालों की घुसपैठ पर कतर की कड़ी निंदा, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया

सारांश

कतर ने अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली बसने वालों की घुसपैठ को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की माँग की है। यह घटना गाजा संघर्ष के बीच यरुशलम के पवित्र स्थलों पर बढ़ते तनाव की ताज़ा कड़ी है।

मुख्य बातें

कतर के विदेश मंत्रालय ने 1 जून 2026 को अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली बसने वालों के प्रवेश की कड़ी निंदा की।
बसने वालों ने डोम ऑफ द रॉक की सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस सुरक्षा में राष्ट्रगान गाया।
कतर ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और पूर्वी यरुशलम की कानूनी स्थिति बदलने की कोशिश बताया।
मस्जिद परिसर का प्रशासनिक अधिकार जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है; जॉर्डन ने भी विभाजन की किसी भी कोशिश के विरुद्ध चेतावनी दी।
कतर ने 1967 की सीमाओं पर आधारित स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य और पूर्वी यरुशलम को उसकी राजधानी बनाने की माँग दोहराई।

कतर के विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 1 जून 2026 को अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली बसने वालों के प्रवेश और उकसाने वाली गतिविधियों की कड़ी निंदा की, इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनियाभर के मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं पर आघात करार दिया। दोहा से जारी आधिकारिक बयान में कतर ने इसे पूर्वी यरुशलम की ऐतिहासिक एवं कानूनी स्थिति को एकतरफा बदलने की खतरनाक कोशिश भी बताया।

घटनाक्रम: क्या हुआ अल-अक्सा में

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ इजरायली बसने वाले अल-मघराबा गेट से मस्जिद परिसर में दाखिल हुए — यह प्रवेश द्वार पूरी तरह इजरायली अधिकारियों के नियंत्रण में है। इन लोगों ने 'डोम ऑफ द रॉक' की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस की सुरक्षा में इजरायल का राष्ट्रगान गाया। गौरतलब है कि जून 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद से अल-अक्सा परिसर में इस तरह की झड़पें और बसने वालों के छापे बार-बार दर्ज होते रहे हैं।

कतर का आधिकारिक बयान

कतर के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'कतर अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने और कब्जा करने वाली सेना की सुरक्षा में की गई उनकी उकसाने वाली गतिविधियों की निंदा करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है, दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली अस्वीकार्य हरकत है, और कब्जे वाले यरुशलम तथा उसके इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों में नई स्थिति थोपने की खतरनाक कोशिश है।'

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अल-अक्सा मस्जिद केवल मुसलमानों का इबादत स्थल है और यरुशलम तथा उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक एवं कानूनी स्थिति बदलने के लिए उठाए गए सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

क्षेत्रीय स्थिरता पर चेतावनी

कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह के उल्लंघन और बार-बार होने वाली उकसाने वाली घटनाएं क्षेत्र में हिंसा और तनाव को और बढ़ा सकती हैं। बयान में कहा गया, 'इस तरह के उल्लंघनों और लगातार हो रही उकसाने वाली कार्रवाइयों से क्षेत्र में और अधिक हिंसा तथा तनाव पैदा हो सकता है। इससे तनाव कम करने और स्थिरता लाने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी।'

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की और इजरायल को — एक कब्जा करने वाली शक्ति के रूप में — फिलिस्तीनी लोगों और उनके पवित्र स्थलों के खिलाफ जारी उल्लंघन रोकने तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का पालन करने के लिए बाध्य करने की माँग की। मंत्रालय ने दोहराया कि कतर फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में दृढ़ता से खड़ा है और 1967 की सीमाओं पर आधारित, पूर्वी यरुशलम को राजधानी मानकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को अनिवार्य मानता है।

जॉर्डन की भूमिका और प्रशासनिक स्थिति

अल-अक्सा मस्जिद परिसर का प्रशासन जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है, जिसके पास इस क्षेत्र के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का कानूनी अधिकार है। जॉर्डन ने भी आगाह किया है कि कोई भी ऐसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी जो इस ऐतिहासिक स्थल को समय या क्षेत्र के आधार पर विभाजित करने वाली नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश करे। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा संघर्ष की पृष्ठभूमि में यरुशलम के पवित्र स्थलों पर तनाव पहले से ही चरम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बयान आते हैं और फिर यथास्थिति बनी रहती है। कतर का बयान कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की 'तत्काल कार्रवाई' की अपीलें ठोस दबाव में कब तब्दील होंगी। गाजा संघर्ष की पृष्ठभूमि में यरुशलम के पवित्र स्थलों पर तनाव का यह नया प्रकरण क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर सकता है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर अलग-थलग घटना के रूप में देखती है जबकि यह एक व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष की कड़ी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल-अक्सा मस्जिद में 1 जून को क्या हुआ?
इजरायली बसने वाले अल-मघराबा गेट से अल-अक्सा मस्जिद परिसर में दाखिल हुए और डोम ऑफ द रॉक की सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए तथा पुलिस सुरक्षा में राष्ट्रगान गाया। यह घटना कतर सहित कई देशों की तीखी प्रतिक्रिया का कारण बनी।
कतर ने इस घटना पर क्या कहा?
कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन, मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली अस्वीकार्य हरकत और पूर्वी यरुशलम की ऐतिहासिक स्थिति बदलने की खतरनाक कोशिश बताया। कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बनाने की अपील भी की।
अल-अक्सा मस्जिद का प्रशासन किसके पास है?
अल-अक्सा मस्जिद परिसर का प्रशासन जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है, जिसके पास इस क्षेत्र के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का कानूनी अधिकार है। जॉर्डन ने भी स्थल को विभाजित करने की किसी भी कोशिश के विरुद्ध चेतावनी दी है।
कतर फिलिस्तीन मुद्दे पर क्या रुख रखता है?
कतर 1967 की सीमाओं पर आधारित एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थक है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो। कतर का मानना है कि इजरायली कब्जे का अंत होना चाहिए और फिलिस्तीनी जनता को उनके वैध अधिकार मिलने चाहिए।
अल-अक्सा परिसर में तनाव का इतिहास क्या है?
जून 1967 में पूर्वी यरुशलम पर इजरायली कब्जे के बाद से अल-अक्सा मस्जिद परिसर में बार-बार झड़पें होती रही हैं, जिनमें इजरायली बसने वालों के छापे और मुस्लिम श्रद्धालुओं पर लगाए गए प्रतिबंध शामिल हैं। यह घटना उसी दीर्घकालिक तनाव की ताज़ा कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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