अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली बसने वालों की घुसपैठ पर कतर की कड़ी निंदा, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया
सारांश
मुख्य बातें
कतर के विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 1 जून 2026 को अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली बसने वालों के प्रवेश और उकसाने वाली गतिविधियों की कड़ी निंदा की, इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनियाभर के मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं पर आघात करार दिया। दोहा से जारी आधिकारिक बयान में कतर ने इसे पूर्वी यरुशलम की ऐतिहासिक एवं कानूनी स्थिति को एकतरफा बदलने की खतरनाक कोशिश भी बताया।
घटनाक्रम: क्या हुआ अल-अक्सा में
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ इजरायली बसने वाले अल-मघराबा गेट से मस्जिद परिसर में दाखिल हुए — यह प्रवेश द्वार पूरी तरह इजरायली अधिकारियों के नियंत्रण में है। इन लोगों ने 'डोम ऑफ द रॉक' की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस की सुरक्षा में इजरायल का राष्ट्रगान गाया। गौरतलब है कि जून 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद से अल-अक्सा परिसर में इस तरह की झड़पें और बसने वालों के छापे बार-बार दर्ज होते रहे हैं।
कतर का आधिकारिक बयान
कतर के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'कतर अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने और कब्जा करने वाली सेना की सुरक्षा में की गई उनकी उकसाने वाली गतिविधियों की निंदा करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है, दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली अस्वीकार्य हरकत है, और कब्जे वाले यरुशलम तथा उसके इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों में नई स्थिति थोपने की खतरनाक कोशिश है।'
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अल-अक्सा मस्जिद केवल मुसलमानों का इबादत स्थल है और यरुशलम तथा उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक एवं कानूनी स्थिति बदलने के लिए उठाए गए सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर चेतावनी
कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह के उल्लंघन और बार-बार होने वाली उकसाने वाली घटनाएं क्षेत्र में हिंसा और तनाव को और बढ़ा सकती हैं। बयान में कहा गया, 'इस तरह के उल्लंघनों और लगातार हो रही उकसाने वाली कार्रवाइयों से क्षेत्र में और अधिक हिंसा तथा तनाव पैदा हो सकता है। इससे तनाव कम करने और स्थिरता लाने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी।'
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की और इजरायल को — एक कब्जा करने वाली शक्ति के रूप में — फिलिस्तीनी लोगों और उनके पवित्र स्थलों के खिलाफ जारी उल्लंघन रोकने तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का पालन करने के लिए बाध्य करने की माँग की। मंत्रालय ने दोहराया कि कतर फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में दृढ़ता से खड़ा है और 1967 की सीमाओं पर आधारित, पूर्वी यरुशलम को राजधानी मानकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को अनिवार्य मानता है।
जॉर्डन की भूमिका और प्रशासनिक स्थिति
अल-अक्सा मस्जिद परिसर का प्रशासन जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है, जिसके पास इस क्षेत्र के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का कानूनी अधिकार है। जॉर्डन ने भी आगाह किया है कि कोई भी ऐसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी जो इस ऐतिहासिक स्थल को समय या क्षेत्र के आधार पर विभाजित करने वाली नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश करे। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा संघर्ष की पृष्ठभूमि में यरुशलम के पवित्र स्थलों पर तनाव पहले से ही चरम पर है।