कतर ने ईरान के समुद्री खतरों की आलोचना की, आईएमओ बैठक में उठाई आवाज़
सारांश
Key Takeaways
- कतर ने ईरान के समुद्री खतरों की निंदा की।
- आईएमओ बैठक में अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन उठाया गया।
- समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी और बुनियादी ढांचों पर हमलों और धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार देते हुए ईरान की कड़ी निंदा की।
आईएमओ परिषद के 36वें असाधारण सत्र को यूनाइटेड किंगडम में कतर के राजदूत और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) में स्थायी प्रतिनिधि, शेख अब्दुल्ला बिन मोहम्मद बिन सऊद अल-थानी ने संबोधित किया।
यह सत्र खाड़ी देशों के खिलाफ खुली आक्रामकता और समुद्री नौवहन पर इसके प्रभावों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित बंद होने के खतरों पर केंद्रित था।
इस दौरान मोहम्मद बिन सऊद अल-थानी ने ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजरानी और समुद्री बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों और धमकियों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन बताया।
उन्होंने कतर के क्षेत्र पर हुए हमलों के साथ-साथ खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों और जॉर्डन के हाशमाइट साम्राज्य पर हुए हमलों की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाइयाँ राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का हनन करती हैं।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का भी स्वागत किया, जिसमें इन हमलों की निंदा की गई थी। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के महत्व पर जोर दिया।
राजदूत ने कहा कि ये हमले सीधे तौर पर समुद्री नौवहन की सुरक्षा को प्रभावित करते हैं, निर्दोष नाविकों के जीवन को खतरे में डालते हैं और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक की स्थिरता को खतरे में डालते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने आगे नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा तथा नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है। उन्होंने समुद्री मार्ग में बाधा डालने वाले किसी भी कार्य या खतरे को अस्वीकार कर दिया और समुद्री सुरक्षा तथा संरक्षा को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन और उसके सदस्य देशों के प्रयासों के प्रति कतर के समर्थन की पुष्टि की।