स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर 22 देशों का एकजुट बयान: ईरान से यूएन सुरक्षा परिषद के नियमों का पालन करने की अपील

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर 22 देशों का एकजुट बयान: ईरान से यूएन सुरक्षा परिषद के नियमों का पालन करने की अपील

सारांश

संयुक्त अरब अमीरात सहित 22 देशों ने ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमलों की निंदा की है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का आग्रह किया है।

Key Takeaways

  • 22 देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की है।
  • अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया है।
  • ईरान से यूएन सुरक्षा परिषद के नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान है।
  • शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

अबू धाबी, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विश्व के 22 देशों ने, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है। साथ ही ईरान से आग्रह किया गया है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्ताव 2817 का पालन करे।

19 मार्च को जारी इस बयान को यूएई विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक्स पर साझा किया। इस बयान में संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूज़ीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन, लिथुआनिया, और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं का संयुक्त बयान शामिल है।

इसमें कमर्शियल जहाजों पर हमले की व्यापक निंदा की गई है। बयान में कहा गया, "हम खाड़ी में बिना हथियार के कमर्शियल जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों, तेल और गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने और ईरानी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं।"

ईरान से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा गया कि वह कमर्शियल शिपिंग के लिए स्ट्रेट को रोकने की अपनी "धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों" को तुरंत खत्म करे। साथ ही, उसने यूएनएससी के "रेजोल्यूशन 2817 का पालन" करने का भी आग्रह किया। जहाजों के आवागमन की स्वतंत्रता अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें 'यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी' भी शामिल है।

यूएनएससी रेजोल्यूशन 2817 के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में हमले और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इस संदर्भ में, हम तेल और गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले रोकने का आग्रह करते हैं।

यूएई विदेश विभाग के इस बयान में आगे कहा गया, "हम स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को समन्वित रिलीज़ को मंजूरी देने के इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के निर्णय का स्वागत करते हैं। हम ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अन्य कदम उठाएंगे, जिसमें कुछ उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाना शामिल है।

शांति और स्थिरता की गुहार लगाते हुए इस बयान का समापन किया गया है। लिखा गया, "हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय खुशहाली और सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखने की अपील करते हैं।"

Point of View

जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

संयुक्त बयान में किन देशों ने भाग लिया?
इस बयान में संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अन्य 22 देशों ने भाग लिया।
ईरान से क्या अपेक्षा की गई है?
ईरान से अपेक्षा की गई है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करे और कमर्शियल जहाजों पर हमले रोके।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व क्या है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
यूएनएससी रेजोल्यूशन 2817 क्या है?
यूएनएससी रेजोल्यूशन 2817 अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में हमलों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
क्या बयान में शांति की अपील की गई है?
हाँ, बयान में सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
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